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महाकाली से हुआ था एक बड़ा 'महापाप', यहां पर मिली थी मुक्ति

Wed, 13 May 2015 09:20 AM IST
Updated Wed, 13 May 2015 09:20 AM IST
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महाकाली से हुआ था एक बड़ा 'महापाप', यहां पर मिली थी मुक्ति

shri kalinath mahakalishawr mahadev temple pragpur kangra himachal.

देवी योगमाया ने असुरों का नाश करने के लिए महाकाली का रूप धारण किया और

उनका संहार कर डाला। मगर क्रोध में महाकाली से ऐसा महापाप हुआ जिससे मुक्ति पाने के लिए वह वर्षों भटकती रहीं। जानिए कैसे और कहां मिली उन्हें मुक्ति..

महाकाली से हुआ था एक बड़ा 'महापाप', यहां पर मिली थी मुक्ति

shri kalinath mahakalishawr mahadev temple pragpur kangra himachal.

महाकाली का भयंकर रूप धारण करने के बाद जब मां ने राक्षसों का नाश किया तो इसके बाद भी उनका क्रोध शांत नहीं हुआ। इसी क्रोध में उन्होंने भगवान शिव पर पांव रख दिया था। इस महापाप के कारण ही उन्हें वर्षों तक हिमालय में प्रायश्चित के लिए भटकना पड़ा था। यह वही स्‍थान हैं जहां पर महाकाली को अपने इस महापाप से मुक्ति मिली थी।

महाकाली से हुआ था एक बड़ा 'महापाप', यहां पर मिली थी मुक्ति

shri kalinath mahakalishawr mahadev temple pragpur kangra himachal.

बात सतयुग की है जब भगवान शिव से वरदान प्राप्त करके राक्षस इतने बलवान हो गए कि उनके पापों से धरती कांप उठी। भगवान शिव के कहने पर योगमाया ने महाकाली का भयंकर रूप धारण किया और असुरों का सर्वनाश कर दिया। उनका क्रोध शांत करने के लिए भगवान शिव ने असुर का रूप धारण किया और दोनों में इतना भयंकर युद्ध हुआ कि देवतागण भी भयभीत हो गए।

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महाकाली से हुआ था एक बड़ा 'महापाप', यहां पर मिली थी मुक्ति

shri kalinath mahakalishawr mahadev temple pragpur kangra himachal.

भगवान शिव ने जब उन्हें चिंतित देखा तो इसका एक उपाय निकाला। वह खुद धरती पर लेट गए। महाकाली ने जैसे ही राक्षस समझकर उन पर प्रहार किया तो उन्हें शंकरजी का रूप स्पष्ट दिखाई पड़ा और उनका क्रोध शांत हो गया।

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महाकाली से हुआ था एक बड़ा 'महापाप', यहां पर मिली थी मुक्ति

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मगर खुद से हुए पाप का प्रायश्चित तो उन्हें करना ही था, तो वह हजारों वर्षों तक हिमालयी में भटकती रही। मान्यता है कि इसी स्‍थान पर ब्यास नदी के किनारे जब महाकाली ने भगवान शिव का ध्यान किया तो आखिरकार भगवान शंकर ने उन्हें दर्शन दिए और इस तरह से मां महाकाली को भूलवश हुए अपने महापाप से मुक्ति मिली। उसी समय यहां ज्योतिलिंग की स्‍थापना हुई। तभी से इस मंदिर का नाम श्री कालीनाथ महाकालेश्‍वर महादेव मंदिर पड़ा।

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