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PM Modi Kumbh Snan: आखिर 5 फरवरी को ही पीएम मोदी ने क्यों किया महाकुंभ स्नान, जानें इस दिन का धार्मिक महत्व

धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: ज्योति मेहरा Updated Wed, 05 Feb 2025 12:41 PM IST
सार

आइए जानते हैं कि आखिर माघ अष्टमी पर महाकुंभ स्नान का महत्व क्या है। प्रधानमंत्री ने मौनी अमावस्या और वसंत पंचमी जैसे प्रमुख अमृत स्नान के दिनों की बजाय 5 फरवरी का दिन क्यों चुना।
 

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PM Modi Mahakumbh Prayagraj Visit why pm modi chose 5th february for kumbh snan on magh ashtami
माघ अष्टमी पर महाकुंभ स्नान का महत्व - फोटो : Amar Ujala

PM Modi Kumbh Snan On Magh Ashtami: महाकुंभ 2025 का आयोजन 13 जनवरी से हो चुका है, जिसमें देश-विदेश से श्रद्धालु और संत बड़ी संख्या में भाग ले रहे हैं। अब तक करीब 14 करोड़ से भी अधिक श्रद्धालु पवित्र नदी में डुबकी लगा चुके हैं। आध्यात्मिक और सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण प्रयागराज में आयोजित इस उत्सव में आज, बुधवार (5 फरवरी) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल हुए। 



बहुत से लोगों के मन में ये सवाल आ रहा है कि प्रधानमंत्री ने मौनी अमावस्या और वसंत पंचमी जैसे प्रमुख अमृत स्नान के दिनों की बजाय 5 फरवरी का दिन क्यों चुना। क्या यह केवल एक संयोग है, या फिर इस तिथि का कोई गहरा आध्यात्मिक महत्व है? आइए जानते हैं कि आखिर माघ अष्टमी पर महाकुंभ स्नान का महत्व क्या है।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मां गंगा की पूजा की। - फोटो : अमर उजाला।

माघ अष्टमी का आध्यात्मिक महत्व
हिंदू पंचांग के अनुसार इस साल 5 फरवरी को माघ मास की गुप्त नवरात्रि की अष्टमी तिथि है। इस दिन का धार्मिक महत्व अत्यंत विशेष माना जाता है, क्योंकि इसे ध्यान, तप और साधना के लिए अत्यंत शुभ तिथि माना गया है। मान्यता है कि जो व्यक्ति इस दिन पवित्र नदी में स्नान करता है और साधना करता है, उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

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संगम में डुबकी लगाने के बाद पीएम ने परिक्रमा लगाकर पूजा की। - फोटो : पीटीआई।

माघ मास में स्नान-दान का विशेष महत्व होता है और इस अवधि में की गई आध्यात्मिक क्रियाएं कई गुना अधिक फलदायी मानी जाती हैं। इसलिए 5 फरवरी को कुंभ स्नान का चयन करना किसी साधारण निर्णय का परिणाम नहीं, बल्कि एक विचारशील और आध्यात्मिक दृष्टिकोण का संकेत देता है।

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भीष्माष्टमी का धार्मिक महत्व - फोटो : adobestock

भीष्माष्टमी का धार्मिक महत्व
5 फरवरी को भीष्माष्टमी के रूप में भी मनाया जाता है, जो महाभारत के महान योद्धा भीष्म पितामह से जुड़ी हुई तिथि है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जब महाभारत का युद्ध समाप्त हुआ, तब भीष्म पितामह बाणों की शय्या पर लेटे हुए सूर्य के उत्तरायण होने और शुक्ल पक्ष की प्रतीक्षा कर रहे थे। माघ मास की अष्टमी तिथि को भगवान श्रीकृष्ण की उपस्थिति में उन्होंने अपने प्राण त्यागे और मोक्ष प्राप्त किया।

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मोदी ने संगम में लगाई डुबकी। - फोटो : पीटीआई।

शास्त्रों में वर्णित है कि इस पावन तिथि पर पवित्र नदियों में स्नान करना, पितरों को तर्पण अर्पित करना और विशेष रूप से जल, तिल, अक्षत और पुष्प अर्पण करना अत्यंत शुभ होता है। ऐसा करने से पितरों को सद्गति प्राप्त होती है, और तर्पण करने वाले व्यक्ति को भी मोक्ष का आशीर्वाद प्राप्त होता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इस दिन कुंभ स्नान का चयन किया जाना उनकी गहरी आध्यात्मिक समझ और भारतीय संस्कृति के प्रति उनकी श्रद्धा को दर्शाता है।

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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