Dahi Chura Kis Din Hai: इस वर्ष मकर संक्रांति को लेकर लोगों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है। दरअसल इस बार मकर संक्रांति के साथ षटतिला एकादशी की तिथि भी पड़ रही है। आमतौर पर मकर संक्रांति पर देशभर में स्नान, दान और खिचड़ी खाने की परंपरा निभाई जाती है। वहीं बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश में दही-चूड़ा खाने का विशेष रिवाज है। लेकिन सनातन परंपरा में एकादशी के दिन चावल का सेवन वर्जित माना गया है। ऐसे में यह सवाल उठता है कि इस बार मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी और दही चूड़ा खाया जा सकता है या नहीं?
Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति पर एकादशी के कारण नहीं बनेगी खिचड़ी, जानें कब खा सकते हैं दही-चूड़ा?
Dahi Chura Kab Khana Hai: सनातन परंपरा में एकादशी के दिन चावल का सेवन वर्जित माना गया है। ऐसे में यह सवाल उठता है कि इस बार मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी और दही चूड़ा खाया जा सकता है या नहीं?
मकर संक्रांति की तिथि क्या है?
दृक पंचांग के अनुसार, 14 जनवरी 2026 को दोपहर 03:13 बजे सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। सूर्य का यही राशि परिवर्तन मकर संक्रांति कहलाता है। हालांकि, इस समय तक दिन का अधिकांश भाग निकल चुका होगा, जिससे उदया तिथि का प्रश्न खड़ा होता है।
उदया तिथि के अनुसार कब मनाएं मकर संक्रांति?
इस परिस्थिति में कुछ लोगों का मानना है कि मकर संक्रांति जैसे सूर्य आधारित पर्व को उदया तिथि के अनुसार ही मनाना उचित होता है। सूर्य का मकर राशि में प्रवेश दिन ढलने के बाद हो रहा है, इसलिए 15 जनवरी 2026 को मकर संक्रांति मनाना अधिक शास्त्र सम्मत माना जाएगा। ऐसा करने से एकादशी की तिथि का प्रभाव भी नहीं रहेगा और खिचड़ी, स्नान व दान की परंपरा भी निभाई जा सकेगी।
सूर्य की चाल से तय होता है मकर संक्रांति का पर्व
मकर संक्रांति न तो चंद्र तिथि पर आधारित है और न ही किसी निश्चित तारीख पर। यह पर्व पूरी तरह सूर्य के राशि परिवर्तन पर निर्भर करता है। दरअसल, ग्रहों की गति के कारण हर 70-75 वर्षों में इसकी तिथि में बदलाव आता है। आपको बता दें कि पहले यह पर्व 10-12 जनवरी के आसपास भी मनाया जाता था। इसी कड़ी में अब यह पर्व 14 या 15 जनवरी के आसपास पड़ता है।
कब खा सकते हैं दही-चूड़ा?
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
मकर संक्रांति और षटतिला एकादशी व्रत को ध्यान में रखते हुए खिचड़ी और दही चूड़ा खाने की परंपरा 15 जनवरी को निभाई जा सकती है। इस दिन खिचड़ी और दही चूड़ा का सेवन और दान पुण्यकारी माना जाता है।