Shiv Parivar Puja Vidhi: भारतीय सनातन परंपरा में ऐसे बहुत कम देवी-देवता हैं, जिनके पूरे परिवार की पूजा या आराधना की जाती हो, लेकिन शिव परिवार की बात ही निराली है। इस परिवार का अपना एक अलग ही मकाम और प्रभाव है। चलिए जानते हैं विस्तार से।
Shiv Parivar Puja: शिव परिवार की महिमा पूरे भारत में, जानिए किस क्षेत्र में किसकी होती है सबसे अधिक पूजा
Shiva Family Worship: भारत में भगवान शिव और उनके परिवार- माता पार्वती, श्री गणेश, भगवान कार्तिकेय (मुरुगन) तथा नंदी जी की पूजा का प्रचलन उत्तर में कश्मीर से लेकर दक्षिण में कन्याकुमारी तक संपूर्ण देश में व्यापक रूप से है।
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भारत में शिव परिवार की पूजा-परंपरा और क्षेत्रीय स्वरूप
भारत में भगवान शिव और उनके परिवार- माता पार्वती, श्री गणेश, भगवान कार्तिकेय (मुरुगन) तथा नंदी जी की पूजा का प्रचलन उत्तर में कश्मीर से लेकर दक्षिण में कन्याकुमारी तक संपूर्ण देश में व्यापक रूप से है। हालाँकि, देश के विभिन्न क्षेत्रों में शिव परिवार के सदस्यों और उनकी पूजन-पद्धतियों का अपना-अपना विशिष्ट स्वरूप देखने को मिलता है:-
1. उत्तर भारत (उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल, बिहार, पंजाब, हरियाणा)
- विशेष स्वरूप: उत्तर भारत के घरों और मंदिरों में समग्र 'शिव परिवार' (शिव-पार्वती, गणेश और कार्तिकेय) की संयुक्त प्रतिमा या चित्र के रूप में सामूहिक पूजा अत्यधिक प्रचलित है।
- मुख्य पर्व व परंपराएं: सावन सोमवार, महाशिवरात्रि, हरतालिका तीज और कजरी तीज जैसे पर्वों पर शिव परिवार की एक साथ आराधना की जाती है।
- प्रमुख तीर्थ क्षेत्र: वाराणसी (काशी), केदारनाथ, अमरनाथ, हरिद्वार और ऋषिकेश जैसे पावन क्षेत्रों में शिव परिवार का संयुक्त पूजन गृहस्थ जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का कारक माना जाता है।
2. दक्षिण भारत (तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना)
दक्षिण भारत में शिव परिवार के प्रत्येक सदस्य का अपना एक विशिष्ट सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक प्रभाव क्षेत्र है:-
- भगवान कार्तिकेय (मुरुगन/सुब्रमण्यम): तमिलनाडु तथा निकटवर्ती राज्यों में भगवान कार्तिकेय को 'मुरुगन स्वामी' के रूप में सर्वोच्च स्थान प्राप्त है। थिरुथानी और पलानी जैसे प्रसिद्ध मंदिरों में इनकी विशेष आराधना होती है।
- भगवान अयप्पा (केरल): केरल में भगवान शिव और मोहिनी (श्री विष्णु रूप) के पुत्र स्वरूप स्वामी अयप्पा (सबरीमाला मंदिर) की अपार मान्यता है।
- वीरशैव/लिंगायत संप्रदाय (कर्नाटक): यहां 'इष्टलिंग' के रूप में भगवान शिव की व्यक्तिगत साधना और पूजा का विशेष विधान है।
3. पश्चिम भारत (महाराष्ट्र एवं गुजरात)
- गणेशोत्सव की प्रमुखता: महाराष्ट्र में शिव परिवार के कनिष्ठ पुत्र श्री गणेश की 'गणपति बाप्पा' के रूप में सबसे व्यापक और भव्य आराधना की जाती है।
- शिव-पार्वती पूजन: गुजरात और महाराष्ट्र में 'मंगला गौरी' व्रत तथा महाशिवरात्रि के अवसर पर शिव परिवार की विशेष पूजा का विधान है।
4. पूर्वी एवं पूर्वोत्तर भारत (पश्चिम बंगाल, ओडिशा, असम)
- शक्ति और शिव का रूप: पश्चिम बंगाल और असम में माता पार्वती के 'शक्ति' स्वरूप (माँ दुर्गा व काली) की प्रधानता है। दुर्गा पूजा के पंडालों में माता दुर्गा के साथ श्री गणेश, भगवान कार्तिकेय और पृष्ठभूमि में भगवान शिव की उपस्थिति संपूर्ण शिव परिवार का बोध कराती है।
5. मध्य भारत (मध्य प्रदेश एवं छत्तीसगढ़)
उज्जैन (श्री महाकालेश्वर) और ओंकारेश्वर जैसे ज्योतिर्लिंग क्षेत्रों के प्रभाव से मध्य भारत में शिव-उपासना के साथ-साथ तीज-त्योहारों पर गृहस्थों द्वारा संपूर्ण शिव परिवार के सम्मिलित रूप का पूजन किया जाता है।
जहां उत्तर और मध्य भारत में शिव परिवार को एकजुट रूप (पारिवारिक सामंजस्य एवं आदर्श गृहस्थ के प्रतीक) में पूजने की परंपरा अधिक है, वहीं दक्षिण भारत में भगवान कार्तिकेय (मुरुगन) तथा पश्चिम भारत में श्री गणेश की मुख्य रूप से व्यक्तिगत आराधना प्रचलित है। इसके बावजूद, संपूर्ण भारत में शिव परिवार को सुख, शांति, समृद्धि और पारिवारिक एकता का सर्वोच्च प्रतीक माना जाता है।
- शैली प्रकाश