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Jalabhishek Niyam: शिवलिंग पर जल अर्पित करते समय इन बातों का रखें ध्यान, जानें क्या है सही नियम

Wed, 05 Aug 2026 02:45 PM IST
ज्योति मेहरा धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: ज्योति मेहरा Updated Wed, 05 Aug 2026 02:45 PM IST
सार

Shivling Jalabhishek Vidhi: आइए जानते हैं शिवलिंग के जलाभिषेक से जुड़े जरूरी नियमों क्या है और इस दौरान किन गलतियों से बचना चाहिए।

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Shivling Jalabhishek Vidhi shivling par jal abhishek karne ke niyam
शिवलिंग पर जल अभिषेक करने के नियम - फोटो : AI
Shivji Ka Jalabhishek Kaise Karen: भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने के लिए भक्तजन उनकी पूजा-अर्चना के साथ शिवलिंग पर जलाभिषेक भी करते हैं। मान्यता है कि सच्चे मन और श्रद्धा के साथ यदि कोई भक्त केवल जल ही अर्पित कर दे, तो भी महादेव प्रसन्न हो जाते हैं। हालांकि, जल चढ़ाते समय कुछ नियमों का पालन करना आवश्यक माना गया है, ताकि पूजा का पूरा फल प्राप्त हो सके। आइए जानते हैं जलाभिषेक से जुड़े जरूरी नियमों क्या है और इस दौरान किन गलतियों से बचना चाहिए।


सही दिशा
सबसे पहले, जल अर्पित करते समय दिशा का विशेष ध्यान रखना चाहिए। मान्यता के अनुसार, शिवलिंग पर जल चढ़ाते वक्त पूर्व और दक्षिण दिशा की ओर मुख नहीं करना चाहिए। उत्तर दिशा की ओर मुख करके जल अर्पित करना शुभ माना गया है। इस दिशा में बैठकर या खड़े होकर जल चढ़ाने से पूजा का प्रभाव बढ़ता है और भगवान शिव की कृपा शीघ्र प्राप्त होती है।

 
Shivling Jalabhishek Vidhi shivling par jal abhishek karne ke niyam
एक धारा में अर्पित करें जल - फोटो : adobe stock

एक धारा में अर्पित करें जल 
इसके अलावा, जल चढ़ाने की विधि भी महत्वपूर्ण होती है। जल को एक समान और निरंतर धारा में अर्पित करना चाहिए। यदि जल रुक-रुक कर या टूटती हुई धारा में चढ़ाया जाता है, तो उसे शुभ नहीं माना जाता। इसलिए ध्यान रखें कि जल की धारा बिना रुके शिवलिंग पर गिरती रहे।
 

Shivling Jalabhishek Vidhi shivling par jal abhishek karne ke niyam
शंख से अर्पित न करें  - फोटो : adobe stock

शंख से अर्पित न करें 
एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि शिवलिंग पर जल अर्पित करने के लिए शंख का प्रयोग नहीं करना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शंख से जल चढ़ाना उचित नहीं माना गया है। इसके स्थान पर लोटा या किसी अन्य पात्र का उपयोग करना बेहतर होता है।
 

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परिक्रमा  - फोटो : Adobe stock

परिक्रमा 
जलाभिषेक के बाद परिक्रमा करना भी शुभ माना जाता है, लेकिन इसे सही तरीके से करना जरूरी है। शिवलिंग की परिक्रमा करते समय हमेशा अर्धचंद्राकार (आधे चंद्रमा के आकार में) परिक्रमा करें। ध्यान रखें कि जहां से जल बहकर नीचे गिर रहा हो, उस स्थान को पार न करें, क्योंकि इसे लांघना पूजा की मर्यादा के विरुद्ध माना जाता है।

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मंत्रों का जाप - फोटो : amar ujala

मंत्रों का जाप
इन नियमों के साथ-साथ जल अर्पित करते समय भगवान शिव के मंत्रों का जाप करना भी अत्यंत लाभकारी होता है। यदि आप विस्तृत मंत्र न भी कर पाएं, तो ‘ॐ’ का उच्चारण करते हुए भी जल चढ़ा सकते हैं। विशेष रूप से सावन माह में जलाभिषेक का महत्व और बढ़ जाता है। इस दौरान जल के साथ बेलपत्र, भांग और धतूरा अर्पित करने से पूजा और भी फलदायी मानी जाती है।

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

 

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