Jalabhishek Niyam: शिवलिंग पर जल अर्पित करते समय इन बातों का रखें ध्यान, जानें क्या है सही नियम
Shivling Jalabhishek Vidhi: आइए जानते हैं शिवलिंग के जलाभिषेक से जुड़े जरूरी नियमों क्या है और इस दौरान किन गलतियों से बचना चाहिए।
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एक धारा में अर्पित करें जल
इसके अलावा, जल चढ़ाने की विधि भी महत्वपूर्ण होती है। जल को एक समान और निरंतर धारा में अर्पित करना चाहिए। यदि जल रुक-रुक कर या टूटती हुई धारा में चढ़ाया जाता है, तो उसे शुभ नहीं माना जाता। इसलिए ध्यान रखें कि जल की धारा बिना रुके शिवलिंग पर गिरती रहे।
शंख से अर्पित न करें
एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि शिवलिंग पर जल अर्पित करने के लिए शंख का प्रयोग नहीं करना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शंख से जल चढ़ाना उचित नहीं माना गया है। इसके स्थान पर लोटा या किसी अन्य पात्र का उपयोग करना बेहतर होता है।
परिक्रमा
जलाभिषेक के बाद परिक्रमा करना भी शुभ माना जाता है, लेकिन इसे सही तरीके से करना जरूरी है। शिवलिंग की परिक्रमा करते समय हमेशा अर्धचंद्राकार (आधे चंद्रमा के आकार में) परिक्रमा करें। ध्यान रखें कि जहां से जल बहकर नीचे गिर रहा हो, उस स्थान को पार न करें, क्योंकि इसे लांघना पूजा की मर्यादा के विरुद्ध माना जाता है।
मंत्रों का जाप
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
इन नियमों के साथ-साथ जल अर्पित करते समय भगवान शिव के मंत्रों का जाप करना भी अत्यंत लाभकारी होता है। यदि आप विस्तृत मंत्र न भी कर पाएं, तो ‘ॐ’ का उच्चारण करते हुए भी जल चढ़ा सकते हैं। विशेष रूप से सावन माह में जलाभिषेक का महत्व और बढ़ जाता है। इस दौरान जल के साथ बेलपत्र, भांग और धतूरा अर्पित करने से पूजा और भी फलदायी मानी जाती है।
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