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सावधान: कहीं आपका ब्रांडेड फोन भी तो नकली नहीं? करोल बाग रेड के बाद खरीदारी से पहले जान लें ये जरूरी बातें

टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Nitish Kumar Updated Mon, 11 May 2026 04:57 PM IST
सार

Karol Bagh Fake Smartphone Raid: दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने करोल बाग और मोती नगर में छापेमारी कर एक बड़े गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जो Realme, OPPO और OnePlus जैसे मशहूर ब्रांड्स के नाम पर नकली स्मार्टफोन और एक्सेसरीज बेच रहा था। अगर आप भी नया फोन खरीदने जा रहे हैं, तो ठगी से बचने के लिए असली और नकली की पहचान करना बेहद जरूरी है।

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नकली स्मार्टफोन की पहचान करना आसान है। - फोटो : एआई जनरेटेड
देश की राजधानी दिल्ली के करोल बाग और मोती नगर इलाके मोबाइल फोन्स और गैजेट्स के बड़े हब माने जाते हैं। इसी का फायदा उठाकर शातिर ठग बड़े ब्रांड्स जैसे रियलमी (Realme), ओप्पो (OPPO) और वनप्लस (OnePlus) की हूबहू कॉपी बनाकर ग्राहकों को चूना लगा रहे थे। क्राइम ब्रांच की छापेमारी में भारी मात्रा में नकली मोबाइल और चार्जर बरामद हुए हैं।


ये डिवाइस दिखने में बिल्कुल असली जैसे लगते हैं, लेकिन इनकी क्वालिटी बेहद घटिया होती है, जो न सिर्फ ग्राहकों के पैसों की बर्बादी है बल्कि सुरक्षा के लिहाज से भी खतरनाक हो सकती है। ऐसे में यह जानना बहुत जरूरी है कि नया फोन या एक्सेसरीज खरीदते समय असली और नकली माल के बीच कैसे फर्क किया जाए।
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भारी डिस्काउंट के लालच से बचें - फोटो : AI
खरीदने से पहले ऐसे करें असली-नकली की पहचान:

भारी डिस्काउंट के लालच से बचें
ठग हमेशा ग्राहकों को सस्ते दामों का लालच देकर फंसाते हैं। अगर कोई अनधिकृत दुकानदार आपको 30,000 रुपये का स्मार्टफोन 15,000 रुपये में नया पैक करके दे रहा है, तो समझ जाइए कि दाल में कुछ काला है। फोन के सस्ता होने की वजह ड्यूटी फीस न लगने और सीधे कंपनी से खरीदने की बात कही जाती है। ब्रांडेड कंपनियां इस तरह के अजीबोगरीब डिस्काउंट नहीं देती हैं। हमेशा कंपनी के आधिकारिक स्टोर, रीटेल चेन या विश्वसनीय ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स से ही खरीदारी करें। स्टोर से फोन खरीदते समय पक्का बिल (GST Bill) जरूर मांगें।

पैकेजिंग और बॉक्स की बारीकी से जांच करें
नकली फोन की पहचान उसके डिब्बे से ही शुरू हो जाती है। असली कंपनियों की पैकेजिंग बहुत उच्च गुणवत्ता वाली होती है। डिब्बे पर इस्तेमाल किए गए फॉन्ट, रंग और लोगो बिल्कुल स्पष्ट होते हैं। वहीं, नकली फोन्स के बॉक्स पर अक्सर स्पेलिंग की गलतियां देखने को मिलती हैं। इनकी प्लास्टिक रैपिंग भी काफी हल्की और ढीली होती है। खरीदारी करते समय इंटरनेट पर उस ब्रांड के असली बॉक्स की तस्वीर निकालें और उसकी तुलना दुकानदार द्वारा दिए गए बॉक्स से करें। बारकोड और सील को भी ध्यान से चेक करना न भूलें।
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IMEI नंबर से खुलेगी फोन की कुंडली - फोटो : फ्रीपिक
IMEI नंबर से खुलेगी फोन की कुंडली
किसी भी फोन के असली या नकली होने का सबसे पुख्ता सबूत उसका आईएमईआई (IMEI) नंबर होता है। फोन हाथ में आते ही उसके डायलर में जाएं और *#06# डायल करें। इसके बाद आपकी स्क्रीन पर 15 अंकों का एक नंबर आएगा। इस नंबर का मिलान फोन के डिब्बे और दुकानदार द्वारा दिए गए बिल पर लिखे नंबर से करें। अगर ये अलग-अलग हैं, तो फोन पक्का नकली है। इसके अलावा, आप भारत सरकार के KYM (Know Your Mobile) पोर्टल पर या कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट पर इस नंबर को डालकर फोन का पूरा कच्चा-चिट्ठा जान सकते हैं।
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बनावट, वजन और फिनिशिंग पर दें ध्यान - फोटो : एआई जनरेटेड
बनावट, वजन और फिनिशिंग पर दें ध्यान
नकली फोन बनाने वाले डिजाइन की नकल तो कर लेते हैं, लेकिन असली जैसी प्रीमियम क्वालिटी नहीं दे पाते। असली फोन के मुकाबले नकली फोन अक्सर सस्ते प्लास्टिक से बने होते हैं। जब आप इन्हें हाथ में पकड़ेंगे, तो इनका वजन या तो असली फोन से बहुत हल्का लगेगा या फिर जरूरत से ज्यादा भारी। इसके अलावा, कैमरा लेंस की बनावट, साइड के बटन (वॉल्यूम और पावर बटन) की आवाज और चार्जिंग पोर्ट की फिनिशिंग में आपको साफ अंतर और सस्तापन दिखाई दे जाएगा।
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सॉफ्टवेयर और परफॉरमेंस की करें टेस्टिंग - फोटो : एआई जनरेटेड
सॉफ्टवेयर और परफॉरमेंस की करें टेस्टिंग
दुकानदार से फोन को चालू करवाकर जरूर चलाएं। असली ब्रांड्स का सॉफ्टवेयर यानी यूजर इंटरफेस (UI) बहुत स्मूद होता है, जबकि नकली फोन को चलाते ही आपको यह अटकता हुआ महसूस होगा। नकली फोन्स में अक्सर पहले से ही कई सारे फालतू चाइनीज एप्स इंस्टॉल होते हैं। 

इसके साथ ही फोन की सेटिंग्स में जाकर About Phone सेक्शन चेक करें। कई बार नकली फोन्स के डिब्बे पर लेटेस्ट प्रोसेसर और रैम लिखी होती है, लेकिन अंदर पुराना सॉफ्टवेयर और कम मेमोरी होती है। कैमरे की फोटो क्वालिटी भी असली के मुकाबले बहुत धुंधली और खराब होती है।
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