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Google: गूगल चुपके से सुन रहा था आपकी बातें, अब कंपनी भरेगी 580 करोड़ का जुर्माना, जानें क्या है पूरा मामला
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नीतीश कुमार
Updated Tue, 27 Jan 2026 06:45 PM IST
सार
Google Voice Assistant Lawsuit: टेक दिग्गज गूगल ने प्राइवेसी के उल्लंघन से जुड़े एक बड़े मामले में 68 मिलियन डॉलर (लगभग 570 करोड़ रुपये) चुकाने पर सहमति जताई है। आरोप है कि कंपनी का वॉयस असिस्टेंट बिना किसी निर्देश के गुपचुप तरीके से यूजर्स की बातचीत रिकॉर्ड कर रहा था, जिसका इस्तेमाल विज्ञापनों के लिए किया गया।
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गूगल पर लगा तगड़ा जुर्माना
- फोटो : AI
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क्या आपके साथ कभी ऐसा हुआ है कि आपने किसी दोस्त से किसी खास जूते या वेकेशन के बारे में बस बात की हो और थोड़ी ही देर बाद आपके सोशल मीडिया पर उसी चीज के विज्ञापन दिखने लगें? आप सोचते होंगे कि यह शायद महज एक इत्तेफाक है, लेकिन इसके पीछे की सच्चाई आपके होश उड़ा सकती है। तकनीक की दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी गूगल अब एक ऐसे ही गंभीर आरोप के घेरे में है, जिसने लाखों लोगों की प्राइवेसी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह मामला इतना बढ़ गया कि अब गूगल को अपनी जेब ढीली करनी पड़ रही है।
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गूगल एसिस्टेंट
- फोटो : Google
बिना 'हे गूगल' बोले रिकॉर्डिंग करने का आरोप
कैलिफोर्निया के सैन जोस संघीय अदालत में दर्ज एक सामूहिक मुकदमे के अनुसार, गूगल असिस्टेंट पर आरोप लगा है कि वह बिना किसी इजाजत के यूजर्स की निजी बातचीत रिकॉर्ड कर रहा था। सामान्य तौर पर, गूगल असिस्टेंट को तभी सक्रिय होना चाहिए जब यूजर "हे गूगल" या "ओके गूगल" जैसे 'हॉट वर्ड्स' बोले या मैन्युअल रूप से बटन दबाए। लेकिन, मुकदमे में दावा किया गया कि गूगल के स्मार्टफोन, होम स्पीकर्स, लैपटॉप, टैबलेट और यहां तक कि वायरलेस ईयरफोन भी तब सक्रिय हो रहे थे जब इन शब्दों का इस्तेमाल ही नहीं किया गया था।
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विज्ञापन दिखाने के लिए निजी जानकारी का इस्तेमाल
- फोटो : AI
विज्ञापन दिखाने के लिए निजी जानकारी का इस्तेमाल
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि उनकी निजी बातों का डेटा विज्ञापनदाताओं को भेजा गया। लोगों ने दावा किया कि उन्हें उन चीजों के विज्ञापन दिखाए गए जिनके बारे में उन्होंने केवल आम बातचीत की थी, न कि उन्हें ऑनलाइन सर्च किया था। यह सीधे तौर पर निजता के अधिकार का हनन माना गया। हालांकि गूगल ने अपनी ओर से कोई गलती स्वीकार नहीं की है, लेकिन अदालत के दस्तावेजों के अनुसार, कंपनी ने लंबे समय तक चलने वाले कानूनी खर्चों और असुविधा से बचने के लिए 68 मिलियन डॉलर (लगभग 570 करोड़ रुपये) का हर्जाना देकर समझौता करने का फैसला किया। इस समझौते को अभी जिला न्यायाधीश बेथ लैबसन फ्रीमैन की अंतिम मंजूरी मिलना बाकी है।
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एपल ने भी चुकाए थे करोड़ों डॉलर
- फोटो : X
एपल ने भी चुकाए थे करोड़ों डॉलर
प्राइवेसी से जुड़े विवादों में केवल गूगल ही अकेला नहीं है। दिसंबर 2024 में एपल ने भी अपने वर्चुअल असिस्टेंट 'सिरी' (Siri) के जरिए इसी तरह की कथित रिकॉर्डिंग का आरोप लगने के बाद 95 मिलियन डॉलर का हर्जाना भरा था। गूगल के साथ ऐसा पहली बान नहीं हो रहा है। पिछले कुछ वर्षों में कंपनी को डेटा चोरी और लोकेशन ट्रैकिंग के लिए कई बार भारी कीमत चुकानी पड़ी है। पिछले साल ही गूगल ने टेक्सास में बिना अनुमति डेटा एकत्र करने के आरोप में 1.4 बिलियन डॉलर का भारी-भरकम जुर्माना चुकाया था, जबकि सितंबर में ट्रैकिंग फीचर बंद करने के बावजूद डेटा लेने पर 425.7 मिलियन डॉलर का फाइन लगाया गया था।
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डिजिटल डेटा पर बढ़ रही ताकझांक
- फोटो : blog.google
डिजिटल डेटा पर बढ़ रही ताकझांक
गूगल के साथ हुए इस समझौते का एक बड़ा हिस्सा वकीलों की फीस में जाएगा, जो कुल राशि का लगभग एक-तिहाई हो सकता है। लेकिन यह मामला उस बड़ी समस्या की ओर इशारा करता है जहां डिजिटल युग में हमारी हर बात और हरकत पर नजर रखी जा रही है। साल 2024 में ही गूगल ने 'इन्कॉग्निटो' (Incognito) मोड में यूजर्स की गतिविधियों को ट्रैक करने के आरोप के बाद अरबों डेटा रिकॉर्ड नष्ट करने पर भी सहमति दी थी। यह करोड़ों डॉलर का जुर्माना कंपनियों के लिए तो बस एक आंकड़ा हो सकता है, लेकिन आम यूजर्स के लिए यह अपनी डिजिटल प्राइवेसी के प्रति जागरूक होने की एक बड़ी चेतावनी है।
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