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AI Malware: बेवजह स्लो हो रहा Phone तो न करें नजरअंदाज, हो सकता है AI मालवेयर का अटैक, चुपके से करता है ये काम
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नीतीश कुमार
Updated Tue, 27 Jan 2026 05:04 PM IST
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सार
AI Android Malware: एंड्रॉइड यूजर्स के लिए एक नई चेतावनी जारी की गई है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की ताकत से लैस एक शातिर मालवेयर गुपचुप तरीके से फोन में घुसकर विज्ञापनों पर क्लिक कर रहा है। इससे फोन स्लो होने के साथ-साथ बैटरी और डेटा की भी भारी खपत हो रही है।
फोन में एआई मालवेयर का खतरा
- फोटो : AI
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विस्तार
एंड्रॉयड स्मार्टफोन्स को लेकर साइबर सुरक्षा एक्सपर्ट्स ने एक नए और खतरनाक मैलवेयर के बारे में चेतावनी दी है। इस बार खतरा इसलिए ज्यादा गंभीर माना जा रहा है, क्योंकि यह मैलवेयर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से काम करता है और बिना यूजर को पता चले फोन की परफॉर्मेंस बिगाड़ता रहता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, यह मैलवेयर न तो सीधे डेटा चोरी करता है और न ही यूजर की जासूसी करता है। यह एक बार फोन के अंदर घुस गया तो बेहद चालाकी से अपना काम करता है। यह AI तकनीक का इस्तेमाल करके एप्स और वेबसाइट्स में दिखने वाले विज्ञापनों को पहचानता है और बैकग्राउंड में अपने आप उन पर क्लिक करता रहता है।
साइबर सुरक्षा कंपनी ने किया सावधान
साइबर एक्सपर्ट्स का कहना है कि लगातार होने वाली ये बैकग्राउंड गतिविधियां फोन के सिस्टम रिसोर्सेज का ज्यादा इस्तेमाल करती हैं। नतीजा यह होता है कि डिवाइस धीरे-धीरे स्लो हो जाता है, बैटरी तेजी से खत्म होने लगती है और फोन जरूरत से ज्यादा गर्म भी हो सकता है। कई मामलों में डेटा खपत भी बढ़ जाती है।
इस नए खतरे की जानकारी साइबर सुरक्षा कंपनी Dr. Web ने दी है। शोधकर्ताओं के अनुसार, यह मैलवेयर खुद को इस तरह डिजाइन करता है कि वह सामान्य एप प्रोसेस का हिस्सा लगे। कोई संदिग्ध हरकत नजर न आने के कारण यूजर को लंबे समय तक पता ही नहीं चलता कि फोन में कोई गड़बड़ी है।
APK फाइल से है खतरा
रिपोर्ट में बताया गया है कि यह मैलवेयर संक्रमित एंड्रॉयड एप्स के जरिए फैलता है। इनमें से कुछ एप्स Xiaomi के GetApps स्टोर और कई थर्ड-पार्टी प्लेटफॉर्म्स पर भी पाए गए हैं। खासतौर पर वे यूजर्स ज्यादा जोखिम में हैं, जो अनजान वेबसाइट्स से APK फाइल डाउनलोड कर एप इंस्टॉल करते हैं।
एक बार फोन में इंस्टॉल हो जाने के बाद यह मैलवेयर लगातार बैकग्राउंड में चलता रहता है। समय के साथ फोन की स्पीड कम होना, बार-बार हैंग होना या बैटरी जल्दी खत्म होना आम लक्षण बन जाते हैं। अक्सर लोग इसे फोन के पुराने होने की समस्या मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे मैलवेयर लंबे समय तक सक्रिय रहता है।
एआई मैलवेयर से कैसे बचें?
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रिपोर्ट के मुताबिक, यह मैलवेयर न तो सीधे डेटा चोरी करता है और न ही यूजर की जासूसी करता है। यह एक बार फोन के अंदर घुस गया तो बेहद चालाकी से अपना काम करता है। यह AI तकनीक का इस्तेमाल करके एप्स और वेबसाइट्स में दिखने वाले विज्ञापनों को पहचानता है और बैकग्राउंड में अपने आप उन पर क्लिक करता रहता है।
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साइबर सुरक्षा कंपनी ने किया सावधान
साइबर एक्सपर्ट्स का कहना है कि लगातार होने वाली ये बैकग्राउंड गतिविधियां फोन के सिस्टम रिसोर्सेज का ज्यादा इस्तेमाल करती हैं। नतीजा यह होता है कि डिवाइस धीरे-धीरे स्लो हो जाता है, बैटरी तेजी से खत्म होने लगती है और फोन जरूरत से ज्यादा गर्म भी हो सकता है। कई मामलों में डेटा खपत भी बढ़ जाती है।
इस नए खतरे की जानकारी साइबर सुरक्षा कंपनी Dr. Web ने दी है। शोधकर्ताओं के अनुसार, यह मैलवेयर खुद को इस तरह डिजाइन करता है कि वह सामान्य एप प्रोसेस का हिस्सा लगे। कोई संदिग्ध हरकत नजर न आने के कारण यूजर को लंबे समय तक पता ही नहीं चलता कि फोन में कोई गड़बड़ी है।
APK फाइल से है खतरा
रिपोर्ट में बताया गया है कि यह मैलवेयर संक्रमित एंड्रॉयड एप्स के जरिए फैलता है। इनमें से कुछ एप्स Xiaomi के GetApps स्टोर और कई थर्ड-पार्टी प्लेटफॉर्म्स पर भी पाए गए हैं। खासतौर पर वे यूजर्स ज्यादा जोखिम में हैं, जो अनजान वेबसाइट्स से APK फाइल डाउनलोड कर एप इंस्टॉल करते हैं।
एक बार फोन में इंस्टॉल हो जाने के बाद यह मैलवेयर लगातार बैकग्राउंड में चलता रहता है। समय के साथ फोन की स्पीड कम होना, बार-बार हैंग होना या बैटरी जल्दी खत्म होना आम लक्षण बन जाते हैं। अक्सर लोग इसे फोन के पुराने होने की समस्या मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे मैलवेयर लंबे समय तक सक्रिय रहता है।
एआई मैलवेयर से कैसे बचें?
- एक्सपर्ट्स का मानना है कि मैलवेयर में AI का बढ़ता इस्तेमाल एक खतरनाक ट्रेंड की ओर इशारा करता है। ऐसे खतरों को पहचानना अब पहले से ज्यादा मुश्किल हो रहा है। यह इसलिए क्योंकि ये यूजर के व्यवहार और स्क्रीन पर दिख रहे कंटेंट के हिसाब से खुद को ढाल लेते हैं।
- एक्सपर्ट्स की सलाह है कि यूजर्स केवल Google Play Store जैसे भरोसेमंद प्लेटफॉर्म से ही एप डाउनलोड करें, फोन को नियमित रूप से लेटेस्ट सिक्योरिटी अपडेट्स के साथ अपडेट रखें और संदिग्ध लिंक या थर्ड-पार्टी एप स्टोर्स से दूरी बनाए रखें। फोन में समय-समय पर सिक्योरिटी या एंटीवायरस स्कैन करना चाहिए। इससे ज्यादातर वायरस-मैलवेयर पकड़ में आ जाते हैं।
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