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Artemis-2: चांद के बेहद करीब से गुजरा आर्टेमिस-2, सामने आईं सांसें थमा देने वाली तस्वीरें
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Nitish Kumar
Updated Tue, 07 Apr 2026 06:35 PM IST
सार
Artemis-2 Fly-by: 50 साल के लंबे इंतजार के बाद इंसान एक बार फिर चांद की दहलीज पर है। नासा के आर्टेमिस 2 मिशन ने चांद के बेहद करीब से गुजरते हुए ऐसी हैरतअंगेज तस्वीरें और वीडियो भेजी हैं, जिन्हें देखकर दुनिया दंग है। इसमें चांद के गड्ढे और पहाड़ियां बिल्कुल साफ नजर आ रही हैं।
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आर्टेमिस-2 ने पूरा किया चांद का चक्कर
- फोटो : एलन मस्क/एक्स
अंतरिक्ष की गहराइयों से एक ऐसी खबर आई है जिसने पूरी दुनिया के विज्ञान प्रेमियों को रोमांचित कर दिया है। एलन मस्क ने नासा के आर्टेमिस-2 अंतरिक्ष यान का एक बेहद खास वीडियो साझा किया है, जिसमें ओरियन कैप्सूल चांद की सतह के बिल्कुल करीब से गुजरता हुआ दिखाई दे रहा है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इन तस्वीरों में चांद की सतह इतनी स्पष्ट और विस्तृत दिख रही है, मानो कोई विमान बेहद कम ऊंचाई पर पहाड़ियों और खाइयों के ऊपर से उड़ रहा हो। इन तस्वीरों ने उन यादों को ताजा कर दिया है जब आधी सदी पहले इंसान पहली बार चांद के इतने करीब पहुंचा था।
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आर्टेमिस-2 मिशन
- फोटो : एक्स
40 मिनट का वो सन्नाटा और फिर 'कमबैक'
इस ऐतिहासिक मिशन के दौरान एक ऐसा पल भी आया जब पूरी दुनिया की सांसें थम गईं। जब ओरियन कैप्सूल चांद के 'डार्क साइड' (वह हिस्सा जो पृथ्वी से कभी दिखाई नहीं देता) के पीछे पहुंचा, तो नासा के 'डीप स्पेस नेटवर्क' से उसका संपर्क पूरी तरह टूट गया। यह 40 मिनट का ब्लैकआउट मिशन का एक रूटीन लेकिन सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्सा था। जैसे ही यान चांद के पिछले हिस्से से बाहर निकला और सिग्नल वापस आए, वैज्ञानिकों और अंतरिक्ष प्रेमियों में खुशी की लहर दौड़ गई। मशहूर उद्यमी मारियो नॉफल ने इस पल पर अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए लिखा कि इंसान का फिर से चांद की कक्षा में होना किसी सपने जैसा है।
इस ऐतिहासिक मिशन के दौरान एक ऐसा पल भी आया जब पूरी दुनिया की सांसें थम गईं। जब ओरियन कैप्सूल चांद के 'डार्क साइड' (वह हिस्सा जो पृथ्वी से कभी दिखाई नहीं देता) के पीछे पहुंचा, तो नासा के 'डीप स्पेस नेटवर्क' से उसका संपर्क पूरी तरह टूट गया। यह 40 मिनट का ब्लैकआउट मिशन का एक रूटीन लेकिन सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्सा था। जैसे ही यान चांद के पिछले हिस्से से बाहर निकला और सिग्नल वापस आए, वैज्ञानिकों और अंतरिक्ष प्रेमियों में खुशी की लहर दौड़ गई। मशहूर उद्यमी मारियो नॉफल ने इस पल पर अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए लिखा कि इंसान का फिर से चांद की कक्षा में होना किसी सपने जैसा है।
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अपोलो-13 के बाद पहला मानवयुक्त मून मिशन
- फोटो : एक्स
इतिहास के पन्नों में नई इबारत
आर्टेमिस-2 मिशन सिर्फ एक तकनीकी उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह मानव जाति के साहस की नई कहानी है। 1970 के दशक के अपोलो-13 मिशन के बाद यह पहली बार है जब इंसान फिर से चांद के घेरे में पहुंचा है। ये दृश्य न सिर्फ तकनीकी प्रगति का प्रमाण हैं, बल्कि यह भी बताते हैं कि अंतरिक्ष में हमारी पहुंच पहले से कहीं ज्यादा बढ़ चुकी है। इन अद्भुत नजारों ने एक बार फिर लोगों के मन में अंतरिक्ष के प्रति जिज्ञासा और उत्साह जगा दिया है।
आर्टेमिस-2 मिशन सिर्फ एक तकनीकी उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह मानव जाति के साहस की नई कहानी है। 1970 के दशक के अपोलो-13 मिशन के बाद यह पहली बार है जब इंसान फिर से चांद के घेरे में पहुंचा है। ये दृश्य न सिर्फ तकनीकी प्रगति का प्रमाण हैं, बल्कि यह भी बताते हैं कि अंतरिक्ष में हमारी पहुंच पहले से कहीं ज्यादा बढ़ चुकी है। इन अद्भुत नजारों ने एक बार फिर लोगों के मन में अंतरिक्ष के प्रति जिज्ञासा और उत्साह जगा दिया है।
अपोलो-13 का रिकॉर्ड तोड़ा
- फोटो : एक्स
अपोलो-13 का रिकॉर्ड तोड़ा
आर्टेमिस-2 (Artemis-2) अब चांद का चक्कर (फ्लाई-बाय) पूरा कर पृथ्वी की ओर वापस लौट रहा है। फ्लाईबाय के दौरान स्पेसक्राफ्ट चांद की सतह से केवल 6,545 किमी दूर था। इस मिशन ने अपोलो 13 मिशन द्वारा 50 साल पहले बनाया गया दूरी का रिकॉर्ड भी तोड़ दिया है। साल 1970 में अपोलो-13 मिशन ने पृथ्वी से 4,00,171 किलोमीटर की दूरी तय की थी, लेकिन आर्टेमिस-2 मिशन ने नया रिकॉर्ड बनाते हुए 4,06,771 किलोमीटर की दूरी तय की है।
आर्टेमिस-2 (Artemis-2) अब चांद का चक्कर (फ्लाई-बाय) पूरा कर पृथ्वी की ओर वापस लौट रहा है। फ्लाईबाय के दौरान स्पेसक्राफ्ट चांद की सतह से केवल 6,545 किमी दूर था। इस मिशन ने अपोलो 13 मिशन द्वारा 50 साल पहले बनाया गया दूरी का रिकॉर्ड भी तोड़ दिया है। साल 1970 में अपोलो-13 मिशन ने पृथ्वी से 4,00,171 किलोमीटर की दूरी तय की थी, लेकिन आर्टेमिस-2 मिशन ने नया रिकॉर्ड बनाते हुए 4,06,771 किलोमीटर की दूरी तय की है।
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क्या है आर्टेमिस-2 मिशन?
- फोटो : एक्स
क्या है आर्टेमिस-2 मिशन?
आर्टेमिस-2 अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा (NASA) के आर्टेमिस कार्यक्रम के अंतर्गत ओरियन अंतरिक्ष यान की पहली मानवयुक्त उड़ान है। यह चंद्रमा पर उतरने वाला मिशन नहीं है, बल्कि यह एक ‘लूनर फ्लाईबाय’ मिशन है, जिसमें अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा के चारों ओर चक्कर लगाकर बिना सतह पर उतरे पृथ्वी पर वापस लौटेंगे। NASA का चंद्रमा पर अंतिम मिशन अपोलो 17 था, जिसे दिसंबर 1972 में लॉन्च किया गया था।
आर्टेमिस-2 मिशन को 1 अप्रैल, 2026 को अमेरिका के फ्लोरिडा स्थित केनेडी स्पेस सेंटर से स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS) रॉकेट के माध्यम से लॉन्च किया गया था। करीब 10 दिन के इस मिशन के बाद 10 अप्रैल को अंतरिक्ष यान 'ओरियन' प्रशांत महासागर में उतरकर पृथ्वी पर लौटेगा।
इस मिशन में चार एस्ट्रोनॉट्स अंजाम दे रहे हैं जिनमें रीड वाइजमैन (कमांडर), विक्टर ग्लोवर, क्रिस्टिना कोच और कनाडाई अंतरिक्ष एजेंसी के जेरेमी हैनसेन शामिल हैं।
आर्टेमिस-2 अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा (NASA) के आर्टेमिस कार्यक्रम के अंतर्गत ओरियन अंतरिक्ष यान की पहली मानवयुक्त उड़ान है। यह चंद्रमा पर उतरने वाला मिशन नहीं है, बल्कि यह एक ‘लूनर फ्लाईबाय’ मिशन है, जिसमें अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा के चारों ओर चक्कर लगाकर बिना सतह पर उतरे पृथ्वी पर वापस लौटेंगे। NASA का चंद्रमा पर अंतिम मिशन अपोलो 17 था, जिसे दिसंबर 1972 में लॉन्च किया गया था।
आर्टेमिस-2 मिशन को 1 अप्रैल, 2026 को अमेरिका के फ्लोरिडा स्थित केनेडी स्पेस सेंटर से स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS) रॉकेट के माध्यम से लॉन्च किया गया था। करीब 10 दिन के इस मिशन के बाद 10 अप्रैल को अंतरिक्ष यान 'ओरियन' प्रशांत महासागर में उतरकर पृथ्वी पर लौटेगा।
इस मिशन में चार एस्ट्रोनॉट्स अंजाम दे रहे हैं जिनमें रीड वाइजमैन (कमांडर), विक्टर ग्लोवर, क्रिस्टिना कोच और कनाडाई अंतरिक्ष एजेंसी के जेरेमी हैनसेन शामिल हैं।