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Touchscreen: कारों से बड़ी-बड़ी टचस्क्रीन की होगी छुट्टी, वापस लौटेंगे बटन वाले सिस्टम, जानें क्यों
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नीतीश कुमार
Updated Thu, 15 Jan 2026 07:30 AM IST
सार
Buttons To Return In Cars: आजकल की कारों में डैशबोर्ड पर लगे बड़े टचस्क्रीन भले ही हाई-टेक दिखते हों, लेकिन ये आपकी सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन गए हैं। रिसर्च के मुताबिक, इनका इस्तेमाल ड्राइविंग के दौरान मोबाइल चलाने जितना खतरनाक है। इसीलिए अब कारों में फिजिकल बटन फिर से वापस लौट रहे हैं।
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बटन वाले सिस्टम ड्राइवर के लिए ज्यादा सेफ
- फोटो : AI जनरेटेड
पिछले कुछ वर्षों में फीचर्स के मामले में कारों को काफी एडवांस बना दिया गया है। डैशबोर्ड से पुराने जमाने के बटन गायब हो रहे हैं और उनकी जगह ले ली है बड़ी-बड़ी टचस्क्रीन ने। आज कार के अंदर बैठने पर ऐसा लगता है कि मानों सिनेमाहॉल के अंदर बैठे हों। महंगी कारों में लगभग सभी फीचर्स अब टचस्क्रीन से ऑपरेट हो रहे हैं। लेकिन ये आधुनिकता अब कार ड्राइवर्स की जान जोखिम में डाल रही है।
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कार टचस्क्रीन
- फोटो : Adobe Stock
क्यों खतरनाक है टचस्क्रीन
ड्राइविंग के दौरान किसी भी तरह का ध्यान भटकना एक्सीडेंट की सबसे बड़ी वजह होता है। रिसर्च बताती है कि टचस्क्रीन का इस्तेमाल करना मोबाइल पर मैसेज टाइप करने जितना खतरनाक है। एजेंसियों का मानना है कि कारों में बड़ी स्क्रीन से ड्राइविंग के दौरान डिस्ट्रैक्शन बढ़ रहा है। स्क्रीन पर सही मेन्यू ढूंढने के लिए आपको बार-बार स्क्रीन की तरफ देखना पड़ता है। टचस्क्रीन पर छोटे-छोटे स्लाइडर को कंट्रोल करने के लिए हाथ हटाना पड़ता है। स्क्रीन के जटिल मेन्यू में उलझने से ड्राइवर का ध्यान ड्राइविंग से हट जाता है।
इसके उलट, पुराने फिजिकल बटन या नॉब को आप बिना देखे भी चला सकते हैं। आपके दिमाग को फिजिकल बटन की जगह याद रहती है और हाथ अपने आप वहां चले जाते हैं। जिससे आप सड़क पर नजरें जमाए हुए भी AC या म्यूजिक कंट्रोल कर पाते हैं।
ड्राइविंग के दौरान किसी भी तरह का ध्यान भटकना एक्सीडेंट की सबसे बड़ी वजह होता है। रिसर्च बताती है कि टचस्क्रीन का इस्तेमाल करना मोबाइल पर मैसेज टाइप करने जितना खतरनाक है। एजेंसियों का मानना है कि कारों में बड़ी स्क्रीन से ड्राइविंग के दौरान डिस्ट्रैक्शन बढ़ रहा है। स्क्रीन पर सही मेन्यू ढूंढने के लिए आपको बार-बार स्क्रीन की तरफ देखना पड़ता है। टचस्क्रीन पर छोटे-छोटे स्लाइडर को कंट्रोल करने के लिए हाथ हटाना पड़ता है। स्क्रीन के जटिल मेन्यू में उलझने से ड्राइवर का ध्यान ड्राइविंग से हट जाता है।
इसके उलट, पुराने फिजिकल बटन या नॉब को आप बिना देखे भी चला सकते हैं। आपके दिमाग को फिजिकल बटन की जगह याद रहती है और हाथ अपने आप वहां चले जाते हैं। जिससे आप सड़क पर नजरें जमाए हुए भी AC या म्यूजिक कंट्रोल कर पाते हैं।
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Volkswagen Tiguan R-Line
- फोटो : Volkswagen
क्या कहते हैं वैज्ञानिक आंकड़े
UK में हुई एक रिसर्च के मुताबिक, टचस्क्रीन का इस्तेमाल करते समय ड्राइवर का रिएक्शन टाइम काफी बढ़ जाता है। इसका मतलब है कि अगर अचानक सामने कोई खतरा आए, तो टचस्क्रीन चलाने वाला ड्राइवर ब्रेक लगाने में ज्यादा समय लेगा, जो जानलेवा साबित हो सकता है।
यही नहीं, अमेरिका में 92,000 कार मालिकों पर किए गए एक सर्वे में पता चला कि लोग सबसे ज्यादा परेशान अपनी कार के टचस्क्रीन इन्फोटेनमेंट सिस्टम से ही हैं। लोग इस बात से चिढ़ते हैं कि लाइट जलाने या तापमान कम करने जैसे साधारण कामों के लिए भी उन्हें स्क्रीन पर कई बार उंगली दौड़ानी पड़ती है।
UK में हुई एक रिसर्च के मुताबिक, टचस्क्रीन का इस्तेमाल करते समय ड्राइवर का रिएक्शन टाइम काफी बढ़ जाता है। इसका मतलब है कि अगर अचानक सामने कोई खतरा आए, तो टचस्क्रीन चलाने वाला ड्राइवर ब्रेक लगाने में ज्यादा समय लेगा, जो जानलेवा साबित हो सकता है।
यही नहीं, अमेरिका में 92,000 कार मालिकों पर किए गए एक सर्वे में पता चला कि लोग सबसे ज्यादा परेशान अपनी कार के टचस्क्रीन इन्फोटेनमेंट सिस्टम से ही हैं। लोग इस बात से चिढ़ते हैं कि लाइट जलाने या तापमान कम करने जैसे साधारण कामों के लिए भी उन्हें स्क्रीन पर कई बार उंगली दौड़ानी पड़ती है।
2025 BYD Seal
- फोटो : BYD
क्या वॉयस कंट्रोल समाधान है
कई कंपनियां कहती हैं कि आप बोलकर यानी वॉइस कमांड देकर कार को कंट्रोल कर सकते हैं। लेकिन रिसर्च कहती है कि यह भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं है। भले ही आपकी नजरें सड़क पर हों, लेकिन सिस्टम से बात करने में आपका दिमाग ड्राइविंग से थोड़ा भटक जाता है, जिससे प्रतिक्रिया देने की गति धीमी हो जाती है।
कई कंपनियां कहती हैं कि आप बोलकर यानी वॉइस कमांड देकर कार को कंट्रोल कर सकते हैं। लेकिन रिसर्च कहती है कि यह भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं है। भले ही आपकी नजरें सड़क पर हों, लेकिन सिस्टम से बात करने में आपका दिमाग ड्राइविंग से थोड़ा भटक जाता है, जिससे प्रतिक्रिया देने की गति धीमी हो जाती है।
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Aston Martin DBX S
- फोटो : Aston Martin
बटनों की हो सकती है घर वापसी
अब समय बदल रहा है। कार एक्सपर्ट्स का मानना है कि तापमान, पंखे की गति, वॉल्यूम और वाइपर जैसे रोज इस्तेमाल होने वाले फीचर्स के लिए बटन ही सबसे बेहतर हैं। टचस्क्रीन का इस्तेमाल केवल सेकेंडरी कामों, जैसे नेविगेशन या म्यूजिक चुनने के लिए होना चाहिए, वो भी कार रोकने के बाद।
अच्छी खबर यह है कि Volkswagen और Hyundai जैसी बड़ी कंपनियां ग्राहकों के दबाव और सुरक्षा नियमों को देखते हुए अपनी नई कारों में बटन और नॉब वापस लाने लगी हैं।
अब समय बदल रहा है। कार एक्सपर्ट्स का मानना है कि तापमान, पंखे की गति, वॉल्यूम और वाइपर जैसे रोज इस्तेमाल होने वाले फीचर्स के लिए बटन ही सबसे बेहतर हैं। टचस्क्रीन का इस्तेमाल केवल सेकेंडरी कामों, जैसे नेविगेशन या म्यूजिक चुनने के लिए होना चाहिए, वो भी कार रोकने के बाद।
अच्छी खबर यह है कि Volkswagen और Hyundai जैसी बड़ी कंपनियां ग्राहकों के दबाव और सुरक्षा नियमों को देखते हुए अपनी नई कारों में बटन और नॉब वापस लाने लगी हैं।