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Body Scanners: क्या एयरपोर्ट पर लगा बॉडी स्कैनर कपड़ों के अंदर झांक सकता है? जानिए इस मशीन का पूरा सच
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नीतीश कुमार
Updated Thu, 15 Jan 2026 11:51 AM IST
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सार
How Full Body Scanner Works: एयरपोर्ट पर सिक्योरिटी चेक के दौरान बॉडी स्कैनर से गुजरते वक्त कई लोगों के मन में सवाल होता है कि स्क्रीन पर आखिर क्या दिखाई देता है। क्या यह कपड़ों के अंदर तक देखता है? इसकी तकनीक, सेफ्टी और प्राइवेसी से जुड़ी पूरी सच्चाई यहां जानिए।
फुल-बॉडी स्कैनर कैसे काम करता है
- फोटो : AI जनरेटेड
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विस्तार
अगर आपने कभी हवाई यात्रा की है, तो एयरपोर्ट सिक्योरिटी का अनुभव जरूर किया होगा। बोर्डिंग से पहले आपके सामान को एक्स-रे मशीन से गुजारा जाता है और यात्री को भी फुल-बॉडी स्कैनर से गुजरना पड़ता है। ये करने का मकसद होता है कि किसी भी तरह का हथियार, विस्फोटक या कोई दूसरी खतरनाक चीज प्लेन में न जाने पाए। कुछ ही सेकंड में यह प्रक्रिया पूरी हो जाती है, लेकिन कई यात्रियों के मन में अक्सर ये बात आती है कि क्या स्कैनर के अंदर खड़े होने पर आखिर जांच करने वाले को स्क्रीन पर क्या दिखाई देता है? क्या फुल-बॉडी स्कैनर उनके कपड़ों के पार सब कुछ दिखा देते हैं? आइए विस्तार से जानते हैं कि स्कैनर की स्क्रीन पर आखिर क्या दिखता है और यह कैसे काम करता है।
फुल-बॉडी स्कैनर कैसे काम करता है?
एयरपोर्ट्स पर फुल-बॉडी स्कैनर की शुरुआत 2000 के दशक में हो गई थी। 2009 में एम्सटर्डम से डेट्रॉइट जा रही फ्लाइट में अंडरवियर में छिपाए गए विस्फोटक की घटना के बाद इन्हें बड़े पैमाने पर लागू किया गया। आजकल दुनियाभर के ज्यादातर एयरपोर्ट्स पर मिलीमीटर वेव इमेजिंग तकनीक का इस्तेमाल होता है। इसमें इलेक्ट्रोमैग्नेटिक वेव्स कपड़ों के आर-पार जाती हैं और त्वचा या छिपी चीजों से टकराकर वापस आती हैं। मशीन इन्हीं संकेतों को समझकर एक सामान्य आकृति बनाती है। इसी वजह से यह तकनीक मेटल डिटेक्टर से ज्यादा असरदार मानी जाती है, क्योंकि यह सिर्फ धातु ही नहीं बल्कि कपड़ों में छिपी दूसरी चीजों को भी पकड़ सकती है।
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फुल-बॉडी स्कैनर कैसे काम करता है?
एयरपोर्ट्स पर फुल-बॉडी स्कैनर की शुरुआत 2000 के दशक में हो गई थी। 2009 में एम्सटर्डम से डेट्रॉइट जा रही फ्लाइट में अंडरवियर में छिपाए गए विस्फोटक की घटना के बाद इन्हें बड़े पैमाने पर लागू किया गया। आजकल दुनियाभर के ज्यादातर एयरपोर्ट्स पर मिलीमीटर वेव इमेजिंग तकनीक का इस्तेमाल होता है। इसमें इलेक्ट्रोमैग्नेटिक वेव्स कपड़ों के आर-पार जाती हैं और त्वचा या छिपी चीजों से टकराकर वापस आती हैं। मशीन इन्हीं संकेतों को समझकर एक सामान्य आकृति बनाती है। इसी वजह से यह तकनीक मेटल डिटेक्टर से ज्यादा असरदार मानी जाती है, क्योंकि यह सिर्फ धातु ही नहीं बल्कि कपड़ों में छिपी दूसरी चीजों को भी पकड़ सकती है।
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स्कैनर शरीर की आकृति बनाता है।
- फोटो : AI जनरेटेड
बैकस्कैटर मशीन क्यों हटाई गईं?
2010 से 2013 के बीच कुछ एयरपोर्ट्स पर बैकस्कैटर स्कैनर भी इस्तेमाल किए जाते थे, जो एक्स-रे तकनीक पर आधारित थे। ये मशीनें शरीर की ज्यादा डिटेल वाली छवि दिखा सकती थीं, जिसमें निजी अंग, पियर्सिंग और यहां तक कि हर्निया तक नजर आ जाता था। इसी वजह से इन्हें प्राइवेसी के लिए खतरा माना गया। लोगों को डर था कि उनकी तस्वीरें सेव की जा रही हैं। कई एयरपोर्ट्स पर लोगों के भारी विरोध के बाद 2013 में इन मशीनों का इस्तेमाल बंद हो गया। इसके बाद मिलीमीटर वेव स्कैनर्स में प्राइवेसी फिल्टर जोड़े गए, जिससे अब सिर्फ एक सामान्य सिलुएट ही दिखती है।
क्या कपड़ों के आर-पार देख सकते हैं स्कैनर?
हकीकत यह है कि फुल-बॉडी स्कैनर किसी इंसान के कपड़ों के भीतर नहीं झांक सकता। यह स्क्रीन पर सिर्फ एक इंसानी आकृति तैयार करता है। अगर सब कुछ सामान्य हो, तो कोई अलर्ट नहीं आता और आप आगे बढ़ जाते हैं। लेकिन अगर स्कैनर को कुछ संदिग्ध लगता है, तो वह शरीर के उसी हिस्से को हाइलाइट कर देता है। अहम बात यह भी है कि ये स्कैनर शरीर के अंदर नहीं देख सकते।
क्या फुल-बॉडी स्कैनर सेहत के लिए खतरनाक हैं?
क्योंकि ये स्कैनर रेडिएशन का इस्तेमाल करते हैं, इसलिए सेहत को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। हालांकि, विशेषज्ञों के मुताबिक इनमें नॉन-आयोनाइजिंग रेडिएशन होता है, जो कैंसर फैलाने वाले आयोनाइजिंग रेडिएशन से अलग और कहीं ज्यादा सुरक्षित है। वैज्ञानिकों का कहना है कि फुल-बॉडी स्कैनर से मिलने वाला रेडिएशन, फ्लाइट के दौरान मिलने वाले रेडिएशन से भी कम होता है।
2010 से 2013 के बीच कुछ एयरपोर्ट्स पर बैकस्कैटर स्कैनर भी इस्तेमाल किए जाते थे, जो एक्स-रे तकनीक पर आधारित थे। ये मशीनें शरीर की ज्यादा डिटेल वाली छवि दिखा सकती थीं, जिसमें निजी अंग, पियर्सिंग और यहां तक कि हर्निया तक नजर आ जाता था। इसी वजह से इन्हें प्राइवेसी के लिए खतरा माना गया। लोगों को डर था कि उनकी तस्वीरें सेव की जा रही हैं। कई एयरपोर्ट्स पर लोगों के भारी विरोध के बाद 2013 में इन मशीनों का इस्तेमाल बंद हो गया। इसके बाद मिलीमीटर वेव स्कैनर्स में प्राइवेसी फिल्टर जोड़े गए, जिससे अब सिर्फ एक सामान्य सिलुएट ही दिखती है।
क्या कपड़ों के आर-पार देख सकते हैं स्कैनर?
हकीकत यह है कि फुल-बॉडी स्कैनर किसी इंसान के कपड़ों के भीतर नहीं झांक सकता। यह स्क्रीन पर सिर्फ एक इंसानी आकृति तैयार करता है। अगर सब कुछ सामान्य हो, तो कोई अलर्ट नहीं आता और आप आगे बढ़ जाते हैं। लेकिन अगर स्कैनर को कुछ संदिग्ध लगता है, तो वह शरीर के उसी हिस्से को हाइलाइट कर देता है। अहम बात यह भी है कि ये स्कैनर शरीर के अंदर नहीं देख सकते।
क्या फुल-बॉडी स्कैनर सेहत के लिए खतरनाक हैं?
क्योंकि ये स्कैनर रेडिएशन का इस्तेमाल करते हैं, इसलिए सेहत को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। हालांकि, विशेषज्ञों के मुताबिक इनमें नॉन-आयोनाइजिंग रेडिएशन होता है, जो कैंसर फैलाने वाले आयोनाइजिंग रेडिएशन से अलग और कहीं ज्यादा सुरक्षित है। वैज्ञानिकों का कहना है कि फुल-बॉडी स्कैनर से मिलने वाला रेडिएशन, फ्लाइट के दौरान मिलने वाले रेडिएशन से भी कम होता है।