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2011 में हुई थी दिल्ली के रवि की हत्या, ब्रेन मैपिंग से आठ साल बाद पकड़े गए हत्यारे

Tue, 08 Oct 2019 01:46 PM IST
प्रदीप पांडे टेक डेस्क, अमर उजाला
टेक डेस्क, अमर उजाला Published by: प्रदीप पांडे Updated Tue, 08 Oct 2019 01:46 PM IST
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crime police solve murder case after 8 years with help of brain mapping
brain mapping - फोटो : megaanswer

हत्या की गुत्थी सुलझाने और अपराधियों को पकड़ने के लिए पुलिस के पास कई तरीके होते हैं। उन्हीं में से एक तरीका है ब्रेन मैपिंग। दिल्ली की क्राइम ब्रांच की पुलिस ने कापसहेड़ा के संभालखा इलाके में आठ साल पहले हुई हत्या की गुत्थी को ब्नेन मैपिंग के जरिए सुलझा दिया है। आइए जानते हैं ब्रेन मैपिंग के बारे में विस्तार से...


 

crime police solve murder case after 8 years with help of brain mapping
delhi police - फोटो : delhi police

क्या है मामला
आठ साल पहले रवि की हत्या उसकी पत्नी के प्रेमी और चालक ने अगवा करके की थी। हत्या के बाद शव को राजस्थान के अलवर स्थित गांव टापुकड़ा में जमीन में गाड़ दिया था। इस हत्या के बारे में रवि की पत्नी, उसके प्रेमी और ड्राइवर के अलावा कोई नहीं जानता था।
 

crime police solve murder case after 8 years with help of brain mapping
murder - फोटो : social media

रवि की पत्नी शकुंतला पर था शक
दरअसल पुलिस को हत्या के समय से ही रवि की पत्नी शकुंतला और उसके प्रेमी कमल सिंघला पर शक था, लेकिन पुलिस को कोई ठोस सबूत नहीं मिल रहा था। यहां तक रवि का शव भी पुलिस को नहीं मिली। इसके बाद पुलिस ने कमल सिंघला व शकुंतला की ब्रेन मैपिंग कराई जिसमें पूरी कहानी सामने आई।
 

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crime police solve murder case after 8 years with help of brain mapping
brain mapping demo - फोटो : scienceorg

क्राइम ब्रांच ने ब्रेन मैपिंग के बाद अपनी रिपोर्ट में कमल और शकुंतला को रवि के गायब करने का दोषी पाया, लेकिन टेस्ट के तुरंत बाद कमल और शकुंतला फरार हो गए। इसके बाद पुलिस ने 27 सितंबर को कमल को गिरफ्तार किया। कमल के बयान के मुताबिक पुलिस ने टापुकड़ा गांव में खुदाई कर रवि कुमार की 25 हड्डियां बरामद की है, वहीं शकुंतला की तलाश अभी जारी है। आगे पढ़ें क्या होती है ब्रेन मैपिंग....

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EEG - फोटो : verywell health

क्या होती है ब्रेन मैपिंग
ब्रेन मैपिंग टेस्ट में आरोपी को हेलमेटनुमा एक यंत्र पहनाया जाता है और उसके बाद कंप्यूटर की मदद से उसकी मस्तिष्क में चल रही हलचलों को रिकॉर्ड किया जाता है। हेलमेटनुमा यंत्र में कई तरह के सेंसर लगे होते हैं। टेस्ट के दौरान फॉरेंसिक एक्सपर्ट आरोपी को अपराध से जुड़ी फोटो और वस्तुओं को दिखाते हैं इसके बाद उनके दिमाग में हो रही हलचल को डिकोड किया जाता है। ब्रेन मैपिंग को इलेक्ट्रोएन्सेफलोग्राम (EEG) भी कहा जाता है।  ब्रेन मैंपिंग टेस्ट का आविष्कार अमेरिकी न्यूरोलॉजिस्ट डॉ लारेंस ए फारवेल ने किया था

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