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Ghost Murmur: दिल की धड़कन से ढूंढ निकाला पायलट! अमेरिका की इस सीक्रेट टेक्नोलॉजी ने दुनिया को चौंकाया
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Nitish Kumar
Updated Wed, 08 Apr 2026 03:26 PM IST
सार
Ghost Murmur Technology Explained: अमेरिका की खुफिया एजेंसी CIA ने एक ऐसी गुप्त तकनीक का इस्तेमाल किया, जो इंसान की दिल की धड़कन से उसकी लोकेशन पता लगा सकती है। 'घोस्ट मर्मर' नाम की यह टेक्नोलॉजी हाल ही में ईरान में फंसे एक अमेरिकी पायलट को खोजने में काम आई।
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कैसे काम करता है 'घोस्ट मर्मर'?
- फोटो : एआई जनरेटेड
पिछले हफ्ते ईरान के दक्षिणी हिस्से में अमेरिका का एक F-15 लड़ाकू विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। विमान में सवार वेपन सिस्टम ऑफिसर, जिन्हें दुनिया 'ड्यूड 44 ब्रावो' के नाम से जानती है, किसी तरह जिंदा बच गए। दो दिनों तक वह ईरान की बंजर पहाड़ियों और ठंडे रेगिस्तान में छिपे रहे, जबकि ईरानी सेना उन पर रखे इनाम के लालच में उन्हें चप्पे-चप्पे पर तलाश रही थी। जब उम्मीदें धुंधली होने लगीं, तब 'घोस्ट मर्मर' (Ghost Murmur) नाम के एक खामोश शिकारी ने उनकी जान बचाई।
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क्वांटम मैग्नेटोमेट्री पर काम करता है डिवाइस
- फोटो : एआई जनरेटेड
क्या है 'घोस्ट मर्मर' और यह कैसे काम करता है?
न्यू यॉर्क पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, 'घोस्ट मर्मर' को लॉकहीड मार्टिन की बेहद गुप्त डिवीजन 'स्कंक वर्क्स' (Skunk Works) ने विकसित किया है। यह तकनीक 'क्वांटम मैग्नेटोमेट्री' के सिद्धांत पर काम करती है। सरल शब्दों में कहें तो, हर इंसान की धड़कन एक खास इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फिंगरप्रिंट यानी विद्युत-चुंबकीय छाप छोड़ती है। यह तकनीक मीलों दूर से उस बेहद कमजोर सिग्नल को पकड़ लेती है और फिर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से हजोरों अन्य शोर-शराबे के बीच से केवल उस इंसान की धड़कन को अलग करके उसकी लोकेशन बता देती है।
मेडिकल साइंस में धड़कन मापने के लिए सेंसर को छाती से सटाना पड़ता है, लेकिन यह तकनीक इतनी एडवांस है कि यह लंबी दूरी से भी धड़कन पहचान लेती है। इसका नाम 'घोस्ट मर्मर' इसलिए रखा गया क्योंकि 'मर्मर' धड़कन की लय को कहते हैं और 'घोस्ट' का मतलब है उस व्यक्ति को ढूंढ निकालना जो दुनिया की नजरों में पूरी तरह गायब हो चुका है।
न्यू यॉर्क पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, 'घोस्ट मर्मर' को लॉकहीड मार्टिन की बेहद गुप्त डिवीजन 'स्कंक वर्क्स' (Skunk Works) ने विकसित किया है। यह तकनीक 'क्वांटम मैग्नेटोमेट्री' के सिद्धांत पर काम करती है। सरल शब्दों में कहें तो, हर इंसान की धड़कन एक खास इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फिंगरप्रिंट यानी विद्युत-चुंबकीय छाप छोड़ती है। यह तकनीक मीलों दूर से उस बेहद कमजोर सिग्नल को पकड़ लेती है और फिर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से हजोरों अन्य शोर-शराबे के बीच से केवल उस इंसान की धड़कन को अलग करके उसकी लोकेशन बता देती है।
मेडिकल साइंस में धड़कन मापने के लिए सेंसर को छाती से सटाना पड़ता है, लेकिन यह तकनीक इतनी एडवांस है कि यह लंबी दूरी से भी धड़कन पहचान लेती है। इसका नाम 'घोस्ट मर्मर' इसलिए रखा गया क्योंकि 'मर्मर' धड़कन की लय को कहते हैं और 'घोस्ट' का मतलब है उस व्यक्ति को ढूंढ निकालना जो दुनिया की नजरों में पूरी तरह गायब हो चुका है।
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ईरान में गिरा था अमेरिकी विमान
- फोटो : X/@WhiteHouse
ईरान की बंजर जमीन बनी इस तकनीक के लिए वरदान
रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान का वह इलाका इस तकनीक के पहले इस्तेमाल के लिए सबसे उपयुक्त था। वहां मानवीय आबादी कम होने के कारण अन्य इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तरंगों का शोर बहुत कम था। इसके अलावा, रात के समय रेगिस्तान की ठंडी रेत और एक जीवित इंसान के शरीर की गर्मी के बीच का अंतर इतना ज्यादा था कि इस तकनीक को अपना काम करने में आसानी हुई। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि यह तकनीक अभी शुरुआती दौर में है और भीड़भाड़ वाले इलाकों में उतनी सटीक नहीं है, जितनी सुनसान जगहों पर।
रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान का वह इलाका इस तकनीक के पहले इस्तेमाल के लिए सबसे उपयुक्त था। वहां मानवीय आबादी कम होने के कारण अन्य इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तरंगों का शोर बहुत कम था। इसके अलावा, रात के समय रेगिस्तान की ठंडी रेत और एक जीवित इंसान के शरीर की गर्मी के बीच का अंतर इतना ज्यादा था कि इस तकनीक को अपना काम करने में आसानी हुई। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि यह तकनीक अभी शुरुआती दौर में है और भीड़भाड़ वाले इलाकों में उतनी सटीक नहीं है, जितनी सुनसान जगहों पर।
पहाड़ के दरारों से ढूंढ निकाला पायलट
- फोटो : एआई जनरेटेड
पहाड़ की दरार में छिपे पायलट को कैसे ढूंढा?
हादसे के बाद घायल अमेरिकी पायलट एक पहाड़ की संकरी दरार में छिपा हुआ था। उसने बोइंग द्वारा निर्मित अपना इमरजेंसी सिग्नल बीकन (CLocator) चालू तो कर दिया था, लेकिन रेस्क्यू टीम को उनकी सटीक जगह का अंदाजा नहीं मिल पा रहा था। जैसे ही वह पायलट बीकन सिग्नल भेजने के लिए थोड़ी देर के लिए दरार से बाहर आया, 'घोस्ट मर्मर' ने तुरंत उनकी धड़कन के सिग्नल को पकड़ लिया जिससे रेस्क्यू टीम को पायलट की सटीक लोकेशन मिल गई।
हादसे के बाद घायल अमेरिकी पायलट एक पहाड़ की संकरी दरार में छिपा हुआ था। उसने बोइंग द्वारा निर्मित अपना इमरजेंसी सिग्नल बीकन (CLocator) चालू तो कर दिया था, लेकिन रेस्क्यू टीम को उनकी सटीक जगह का अंदाजा नहीं मिल पा रहा था। जैसे ही वह पायलट बीकन सिग्नल भेजने के लिए थोड़ी देर के लिए दरार से बाहर आया, 'घोस्ट मर्मर' ने तुरंत उनकी धड़कन के सिग्नल को पकड़ लिया जिससे रेस्क्यू टीम को पायलट की सटीक लोकेशन मिल गई।
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CIA ने किया एडवांस टेक्नोलॉजी होने का दावा
- फोटो : एआई जनरेटेड
सीआईए चीफ ने किया एडवांस टेक्नोलॉजी होने का इशारा
हालांकि, अमेरिकी सरकार ने आधिकारिक तौर पर घोस्ट मर्मर जैसी तकनीक के अस्तित्व को स्वीकार नहीं किया है, लेकिन सीआईए डायरेक्टर जॉन रैटक्लिफ ने एक ब्रीफिंग के दौरान इसके संकेत जरूर दिए। उन्होंने गर्व से कहा कि एजेंसी के पास ऐसी 'उत्कृष्ट तकनीकें' हैं जो दुनिया की किसी भी दूसरी इंटेलिजेंस सर्विस के पास नहीं हैं। उन्होंने साफ किया कि इनमें से कई क्षमताएं बेहद गुप्त होती हैं और सुरक्षा कारणों से उनकी पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा सकती।
हालांकि, अमेरिकी सरकार ने आधिकारिक तौर पर घोस्ट मर्मर जैसी तकनीक के अस्तित्व को स्वीकार नहीं किया है, लेकिन सीआईए डायरेक्टर जॉन रैटक्लिफ ने एक ब्रीफिंग के दौरान इसके संकेत जरूर दिए। उन्होंने गर्व से कहा कि एजेंसी के पास ऐसी 'उत्कृष्ट तकनीकें' हैं जो दुनिया की किसी भी दूसरी इंटेलिजेंस सर्विस के पास नहीं हैं। उन्होंने साफ किया कि इनमें से कई क्षमताएं बेहद गुप्त होती हैं और सुरक्षा कारणों से उनकी पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा सकती।