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Sim-Binding: व्हाट्सएप ने शुरू की सिम-बाइंडिंग की टेस्टिंग, जानें कैसे फ्रॉड और फर्जी अकाउंट्स पर लगेगी लगाम
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Jagriti
Updated Wed, 08 Apr 2026 04:50 PM IST
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सार
Sim Binding Rule Testing: व्हाट्सएप भारत में अपनी सुरक्षा व्यवस्था को एक नए स्तर पर ले जाने की कोशिश है। अब व्हाट्सएप चलाने के लिए नंबर पर सिर्फ ओटीपी दर्ज करने से काम नहीं चलेगा, बल्कि आपके फोन में सिम कार्ड का हाेना भी अनिवार्य होगा। सरकार के सख्त नियमों का पालन करने के लिए व्हाट्सएप ने सिम बाइंडिंग फीचर की टेस्टिंग शुरू कर दी है।
व्हाट्सएप सिम बाइंडिंग की टेस्टिंग शुरू
- फोटो : एआई जनरेटेड
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विस्तार
WhatsApp new security rules: भारत सरकार और TRAI के निर्देशों के बाद व्हाट्सएप ने डिजिटल पहचान को मजबूत करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। अब व्हाट्सएप अकाउंट को आपके डिवाइस में सक्रिय सिम कार्ड से स्थायी रूप से लिंक किया जाएगा। इससे साइबर धोखाधड़ी और अकाउंट हैकिंग जैसी घटनाओं में भारी कमी आने की उम्मीद है।
व्हाट्सएप भारत में सिम-बाइंडिंग फीचर का परीक्षण कर रहा है, जो यूजर के अकाउंट को उसके फोन में मौजूद फिजिकल सिम कार्ड से जोड़ेगा। इसका मुख्य उद्देश्य साइबर फ्रॉड को रोकना और यह सुनिश्चित करना है कि अकाउंट का इस्तेमाल सही व्यक्ति ही कर रहा है या नहीं। फिलहाल यह फीचर कुछ बीटा यूजर्स के लिए उपलब्ध है, जहां एप बीच-बीच में सिम की मौजूदगी को वेरिफाई करेगा।
What is Sim Binding Rule: क्या है सिम-बाइंडिंग नियम?
देखिए अभी तक व्हाट्सएप चलाने के लिए उसके एक्टिव करने के लिए सिर्फ एक ओटीपी यानी की वन टाइम पासवर्ड की जरूरत पड़ती थी, लेकिन सिम बाइंडिंग नियम के बाद व्हाट्सएप यह चेक करेगा कि जिस नंबर से अकाउंट बनाया जा रहा है, उस नंबर की सिम उस फोन में एक्टिव है नहीं। अगर सिम कार्ड फाेन में नहीं है, तो सुरक्षा कारणों से अकाउंट का उपयोग बाधित हो सकता है।
WhatsApp account link to SIM: साइबर फ्रॉड और दुरुपयोग पर प्रहार
यह नियम खासतौर पर मुख्य रूप से इन समस्याओं को खत्म करने के लिए लाया गया है:
TRAI guidelines for WhatsApp: सरकार और TRAI के कड़े नियम
दूरसंचार नियामक ट्राई और भारत सरकार लंबे समय से ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स को पहचान वेरिफिकेशन मजबूत करने के निर्देश दे रहे थे। सिम-बाइंडिंग उसी डिजिटल पहचान जांच का हिस्सा है, जिससे दूरसंचार नेटवर्क पर सुरक्षा बढ़ाई जा सकेगी।
कब लागू होगा यह नियम?
जानकारी के अनुसार फिलहाल यह अभी ट्रायल मोड में है। कुछ चुनिंदा उपयोगकर्ताओं को एप खोलते समय या कोई खास एक्टिविटी करते समय वैरिफाई सिम प्रिफरेंस का मैसेज मिल सकता है। अगर टेस्टिंग सफल होती है, तो यह सभी भारतीयों के लिए जारी कर दिया जाएगा।
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व्हाट्सएप भारत में सिम-बाइंडिंग फीचर का परीक्षण कर रहा है, जो यूजर के अकाउंट को उसके फोन में मौजूद फिजिकल सिम कार्ड से जोड़ेगा। इसका मुख्य उद्देश्य साइबर फ्रॉड को रोकना और यह सुनिश्चित करना है कि अकाउंट का इस्तेमाल सही व्यक्ति ही कर रहा है या नहीं। फिलहाल यह फीचर कुछ बीटा यूजर्स के लिए उपलब्ध है, जहां एप बीच-बीच में सिम की मौजूदगी को वेरिफाई करेगा।
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What is Sim Binding Rule: क्या है सिम-बाइंडिंग नियम?
देखिए अभी तक व्हाट्सएप चलाने के लिए उसके एक्टिव करने के लिए सिर्फ एक ओटीपी यानी की वन टाइम पासवर्ड की जरूरत पड़ती थी, लेकिन सिम बाइंडिंग नियम के बाद व्हाट्सएप यह चेक करेगा कि जिस नंबर से अकाउंट बनाया जा रहा है, उस नंबर की सिम उस फोन में एक्टिव है नहीं। अगर सिम कार्ड फाेन में नहीं है, तो सुरक्षा कारणों से अकाउंट का उपयोग बाधित हो सकता है।
WhatsApp account link to SIM: साइबर फ्रॉड और दुरुपयोग पर प्रहार
यह नियम खासतौर पर मुख्य रूप से इन समस्याओं को खत्म करने के लिए लाया गया है:
- फेक अकाउंट्स: बिना सिम के वर्चुअल नंबरों पर चलने वाले फर्जी अकाउंट्स बंद हो जाएंगे।
- अकाउंट ब्रीच: हैकर्स अब किसी दूसरे डिवाइस पर आपका व्हाट्सएप सिर्फ OTP के जरिए आसानी से लॉगिन नहीं कर पाएंगे।
- धोखाधड़ी: चोरी किए गए सिम या अवैध तरीके से बनाए गए अकाउंट्स का इस्तेमाल मुश्किल हो जाएगा।
TRAI guidelines for WhatsApp: सरकार और TRAI के कड़े नियम
दूरसंचार नियामक ट्राई और भारत सरकार लंबे समय से ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स को पहचान वेरिफिकेशन मजबूत करने के निर्देश दे रहे थे। सिम-बाइंडिंग उसी डिजिटल पहचान जांच का हिस्सा है, जिससे दूरसंचार नेटवर्क पर सुरक्षा बढ़ाई जा सकेगी।
कब लागू होगा यह नियम?
जानकारी के अनुसार फिलहाल यह अभी ट्रायल मोड में है। कुछ चुनिंदा उपयोगकर्ताओं को एप खोलते समय या कोई खास एक्टिविटी करते समय वैरिफाई सिम प्रिफरेंस का मैसेज मिल सकता है। अगर टेस्टिंग सफल होती है, तो यह सभी भारतीयों के लिए जारी कर दिया जाएगा।
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