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महंगी पड़ सकती है ई-पेमेंट, 26 भारतीय बैंक निशाने पर
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sun, 04 Dec 2016 09:57 AM IST
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देश में कैशलेस इकॉनोमी का प्रचार हो रहा है, दूसरी ओर एक अमेरिका स्थित साइबर सिक्योरिटी कंपनी फायरआई की रिपोर्ट के मुताबिक कुछ फिशिंग वेबसाइट्स करीब 26 भारतीय बैंकों का डाटा चुरा रही हैं।
ये वेबसाइट चुरा रही हैं बैंकों का डाटा
फायरआई ने नए डोमेन csecurepay.com और nsecurepay.com की पहचान की है। ऐसा लगता है कि ये वेबसाइट एक ऑनलाइन पेमेंट गेटवे हैं। लेकिन वास्तव में ये फिशिंग वेबसाइट हैं। ये भारत के 26 बैंकों के ग्राहकों की सूचनाएं चुराने में शामिल हैं। इन्हें अगस्त से अक्टूबर 2016 के बीच रजिस्टर किया गया था।
फायरआई ने नए डोमेन csecurepay.com और nsecurepay.com की पहचान की है। ऐसा लगता है कि ये वेबसाइट एक ऑनलाइन पेमेंट गेटवे हैं। लेकिन वास्तव में ये फिशिंग वेबसाइट हैं। ये भारत के 26 बैंकों के ग्राहकों की सूचनाएं चुराने में शामिल हैं। इन्हें अगस्त से अक्टूबर 2016 के बीच रजिस्टर किया गया था।
क्या होती हैं फिशिंग वेबसाइट ?
फिशिंग वेबसाइट एक तरह से आभासी वेबसाइट होती है, जो यूजर को अलग-अलग तरीके से आकर्षित कर साइट तक लाती है। जैसे ई-मेल लिंक्स, सोशल मीडिया लिंक्स आदि।
फिशिंग वेबसाइट एक तरह से आभासी वेबसाइट होती है, जो यूजर को अलग-अलग तरीके से आकर्षित कर साइट तक लाती है। जैसे ई-मेल लिंक्स, सोशल मीडिया लिंक्स आदि।
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कुछ यूं दिलाती हैं भरोसा ?
फिशिंग वेबसाइट यूजर से उनके अकाउंट नंबर, मोबाइल नंबर, ई-मेल, वन टाइम पासवर्ड आदि मांगती है। यूजर को लगता है कि वो एक सही साइट पर है।
फिशिंग वेबसाइट यूजर से उनके अकाउंट नंबर, मोबाइल नंबर, ई-मेल, वन टाइम पासवर्ड आदि मांगती है। यूजर को लगता है कि वो एक सही साइट पर है।
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ऐसे लगती है बैंक अकाउंट में सेंध
एक बार जानकारी मिल जाने के बाद फिशिंग वेबसाइट यूजर को संबंधित बैंक के नकली पेज पर ले जाती हैं। यह बिल्कुल वैसा ही होता है, जैसे कि आप सही में बैंक की साइट से लॉगिन कर रहे हैं।
एक बार जानकारी मिल जाने के बाद फिशिंग वेबसाइट यूजर को संबंधित बैंक के नकली पेज पर ले जाती हैं। यह बिल्कुल वैसा ही होता है, जैसे कि आप सही में बैंक की साइट से लॉगिन कर रहे हैं।