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Bus AC: 45 डिग्री की गर्मी में भी कैसे ठंडी रहती है स्लीपर बस? जानिए इसमें कितने टन का एसी लगा होता है

टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Nitish Kumar Updated Tue, 26 May 2026 04:44 PM IST
सार

Sleeper Bus AC: गर्मियों के मौसम में स्लीपर बस का सफर बेहद आरामदायक होता है। बाहर चाहे जितनी भी चिलचिलाती धूप हो, अंदर कड़कड़ाती ठंड का अहसास होता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इतनी बड़ी बस को चिल्ड करने के लिए कितने टन के एसी (AC) की जरूरत होती है? आइए जानते हैं इस दिलचस्प तकनीक के बारे में।

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स्लीपर बस - फोटो : एआई जनरेटेड
गर्मियों में लंबी दूरी की यात्रा करने के लिए स्लीपर बस लोगों की पहली पसंद होती है। बाहर का तापमान 40-45 डिग्री होने पर भी बस के अंदर यात्रियों को अक्सर कंबल ओढ़ना पड़ जाता है। घरों में तो एक सामान्य बेडरूम को ठंडा करने के लिए 1 या 1.5 टन का एसी काफी होता है। लेकिन एक विशालकाय स्लीपर बस को ठंडा रखने के लिए बहुत ज्यादा कूलिंग पावर की जरूरत पड़ती है।
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आमतौर पर 10 टन का एसी होता है - फोटो : adobestock

स्लीपर बस में कितने टन का एसी होता है?

एक बस के आकार और प्रकार के आधार पर उसमें इस्तेमाल होने वाले एयर कंडीशनर की क्षमता अलग-अलग होती है।
  • सामान्य स्लीपर बसें: भारत में चलने वाली ज्यादातर स्टैंडर्ड 12 मीटर लंबी स्लीपर बसों में आमतौर पर 8 से 10 टन क्षमता वाला एसी लगा होता है। यह रूफ-माउंटेड (छत पर लगा हुआ) सिस्टम होता है।
  • प्रीमियम मल्टी-एक्सल बसें: वॉल्वो, स्कैनिया या मर्सिडीज-बेंज जैसी लंबी और प्रीमियम मल्टी-एक्सल (13.5 से 14.5 मीटर लंबी) बसों में कूलिंग क्षमता और अधिक होती है। इनमें 11 से 14 टन तक का शक्तिशाली एसी लगा होता है।
  • कूलिंग कैपेसिटी: तकनीकी भाषा में बात करें तो इन बसों के एसी की कूलिंग क्षमता लगभग 30,000 से 45,000 किलो-कैलोरी प्रति घंटा (kcal/hr) तक होती है।
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बड़ा होता है केबिन स्पेस - फोटो : Amar Ujala
आखिर इतने बड़े एसी की जरूरत क्यों पड़ती है?
बस में इतना हैवी-ड्यूटी एसी लगाने के पीछे कई वैज्ञानिक और तकनीकी कारण होते हैं:
  • बड़ा केबिन स्पेस: बस का अंदरूनी हिस्सा एक बड़े हॉल जितना विशाल होता है। इतनी बड़ी जगह को ठंडा करने के लिए भारी कूलिंग चाहिए।
  • कांच का प्रभाव: बस में चारों तरफ बड़े-बड़े कांच लगे होते हैं। इन कांच की खिड़कियों से बाहर की सूरज की गर्मी और रेडिएशन बहुत तेजी से अंदर आते हैं।
  • यात्रियों की बॉडी हीट: एक फुल स्लीपर बस में 30 से 40 यात्री एक साथ सफर करते हैं। इतने सारे इंसानी शरीरों से निकलने वाली गर्मी को संतुलित करना एसी के लिए एक बड़ा टास्क होता है।
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AC चलने से माइलेज होता है कम - फोटो : अमर उजाला
क्या बस की माइलेज पर असर पड़ता है?
बिल्कुल। इतने बड़े एसी को चलाने के लिए भारी ऊर्जा की जरूरत होती है। बस का एसी घरों की तरह बिजली से नहीं चलता है। इसे सीधे बस के मुख्य इंजन से जुड़े एक शक्तिशाली कंप्रेसर (Compressor) के जरिए चलाया जाता है।

जब यह भारी भरकम एसी चलता है, तो बस के इंजन पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इस दबाव के कारण बस के इंजन को ज्यादा फ्यूल जलाना पड़ता है, जिससे बस के माइलेज में लगभग 15% से 20% तक की कमी आ जाती है। यही वजह है कि एक बेहतरीन कूलिंग का अनुभव देने के लिए बस मालिक ईंधन पर ज्यादा खर्च करते हैं।
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