टीसीएस और विप्रो जैसी कंपनियों का मिलेगा साथ
इस डिजिटल परिवर्तन के लिए टेक्नोलॉजी जगत की प्रमुख कंपनियां टीसीएस (TCS) और विप्रो (Wipro) अपना तकनीकी सहयोग देंगी। ये कंपनियां बैंकों के डाटा सुरक्षा, सर्वर प्रबंधन और साइबर सुरक्षा के लिए उच्च स्तरीय समाधान प्रदान करेंगी। इससे बैंकिंग प्रणाली न केवल सुरक्षित होगी, बल्कि अधिक प्रभावशाली और पारदर्शी भी बनेगी।
नाबार्ड देगा प्रशिक्षण और आर्थिक सहायता
पूरे प्रोजेक्ट की निगरानी और संचालन में नाबार्ड (NABARD) की अहम भूमिका रहेगी। नाबार्ड तकनीकी मार्गदर्शन के साथ-साथ बैंकों के कर्मचारियों को प्रशिक्षित करने और आवश्यक वित्तीय सहायता देने का कार्य करेगा। इसका मकसद है सभी सहकारी बैंकों को एकीकृत और अत्याधुनिक बैंकिंग सेवाएं देने में सक्षम बनाना।
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साइबर फ्रॉड से बचाव के लिए सरकार जनता को भी जागरूक करेगी। इसके तहत ग्राम पंचायतों, बैंक शाखाओं और डिजिटल माध्यमों से अभियान चलाया जाएगा। उपभोक्ताओं को बताया जाएगा कि साइबर ठगी से कैसे बचें, किस हेल्पलाइन पर शिकायत करें और किन सुरक्षा उपायों का पालन करें।
10 करोड़ का विशेष बजट प्रावधान
सरकार ने इस परियोजना के लिए वित्त वर्ष 2025-26 में 10 करोड़ रुपये का विशेष बजटीय प्रावधान रखा है। यह राशि क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर, साइबर सुरक्षा सेटअप, कर्मचारियों के प्रशिक्षण और जन जागरूकता अभियानों में खर्च की जाएगी।
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यह योजना न केवल तकनीकी सुरक्षा बढ़ाएगी, बल्कि बैंकों की वित्तीय स्थिति भी सुधारने में मदद करेगी। बेहतर पारदर्शिता और टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर से ग्राहकों का भरोसा बढ़ेगा, जिससे खातों की संख्या और ऋण वितरण में भी तेजी आएगी।