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राधाष्टमी: आस्था और उल्लास का संगम बना बरसाना...गलियां रोशनी से नहाईं, हर चौक पर गूंजे बधाई गीत; तस्वीरें

संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा Published by: अरुन पाराशर Updated Sat, 30 Aug 2025 10:13 PM IST
सार

मथुरा के बरसाना में राधाष्टमी का उल्लास देखते ही बनता है। हर कोई राधारानी के जन्मोत्सव की खुशियों सराबोर है। पूरा बरसाना मानो सांसें थामे लाडली जू के जन्मक्षण की प्रतीक्षा कर रहा था। नगरी की आभा, भक्तों की उत्कंठा और भक्ति की उमंग, इस रात को अविस्मरणीय बना रही थी।

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Excitement in Radharani temple in Barsana Mathura for Radhastami
बरसाना में राधाष्टमी महोत्सव। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
मथुरा के बरसाना में जन्मोत्सव से पूर्व की रात वृषभानु की नगरी अनुपम छटा बिखेर रही थी। जैसे ही सांझ ढली, गलियां रंग-बिरंगी झालरों से जगमगा उठीं। हर चौक और मंदिर में राधे-राधे की ध्वनि गूंज उठी। लाडली जू के महल की ओर जाते श्रद्धालुओं के कदम और अधरों पर बधाई गीत, यह दृश्य मानो संपूर्ण नगर को भक्ति-रस में डुबो रहा था। सखियां भी शृंगार कर आल्हा और बधाई पदों पर थिरक उठीं। महिलाएं समूह बनाकर पद गातीं तो बच्चे ढोलक-करतल की ताल पर झूमते रहे।


 
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Excitement in Radharani temple in Barsana Mathura for Radhastami
मंदिर में भव्य लाइटिंग। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
भक्तों की उमंग और भावनाओं की बरसात
हर ओर बधाई गीत बरसाने बजी है बधाई, रानी कीरत ने लाली जाई, गूंज रहे थे। मथुरा से आए गोपेश शर्मा ने बताया कि हम पूरी रात जागते हैं, क्योंकि यही तो वह घड़ी है, जब हमारी लाडली धरा पर अवतरित होती हैं। इस आनंद में थकान का कोई अस्तित्व नहीं। वृंदावन से आईं सावित्री देवी ने भाव-विभोर होकर कहा कि जब गलियों में बधाई गूंजती है तो लगता है जैसे स्वयं राधारानी हमारे बीच आकर आशीष दे रही हों। 

 
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Excitement in Radharani temple in Barsana Mathura for Radhastami
बरसाना में राधाष्टमी का भक्तों में उत्साह। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
वहीं नंदगांव के हरिनारायण दास ने बताया कि इस भूमि पर कदम रखते ही मन भक्ति में डूब जाता है। राधा जन्मोत्सव हमारे जीवन का सबसे पावन पर्व है। आगरा से आए अनिरुद्ध पाठक ने कहा कि बरसाना की यह रात केवल उत्सव नहीं, यह तो आत्मा को छू लेने वाली अनुभूति है।

 
Excitement in Radharani temple in Barsana Mathura for Radhastami
राधाष्टमी महोत्सव। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
आध्यात्मिक वातावरण और अलौकिक छटा
केवल गलियां ही नहीं, बल्कि वृक्ष, तालाब और पर्वत भी मानो इस उत्सव की गवाही दे रहे थे। मान्यता है कि बरसाना का हर कण राधा नाम में रचा-बसा है और इसी कारण जन्म की यह रात दिव्य ऊर्जा से सराबोर हो उठती है। ब्रजवासी कहते हैं कि इस रात्रि हवा की हर लहर में राधे-राधे की पुकार सुनाई देती है।

 
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राधाष्टमी महोत्सव। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
लाडली जू के स्वागत की तैयारी
पूरा बरसाना मानो सांसें थामे लाडली जू के जन्मक्षण की प्रतीक्षा कर रहा था। नगरी की आभा, भक्तों की उत्कंठा और भक्ति की उमंग, इस रात को अविस्मरणीय बना रही थी। ऐसा प्रतीत हो रहा था, मानो सम्पूर्ण वृषभानु नगरी अपनी रानी के अवतरण का स्वागत करने के लिए स्वयं ही सज-धजकर तैयार खड़ी हो। भक्तों का विश्वास है कि इस रात जागरण और भजन करने वाला हर साधक राधारानी की कृपा का अधिकारी बनता है। इसी भावना से लोग बिना थके, बिना रुके पूरी रात गाते-बजाते रहे।

 
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