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UP: लड्डू गोपाल की पोशाक बनाने में जुटे तौफीक और वसीम, इनके हुनर पर हो जाएंगे फिदा; दिल जीत लेंगी ये तस्वीरें
Thu, 06 Aug 2026 02:54 PM IST
Dhirendra Singh
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Thu, 06 Aug 2026 02:54 PM IST
सार
जन्माष्टमी से पहले ब्रज में भाईचारे की अनूठी तस्वीर देखने को मिल रही है, जहां मुस्लिम कारीगर मोरपंख, जरी और जरदोजी से कान्हा का दिव्य शृंगार तैयार कर रहे हैं। इस बार 200 करोड़ रुपये से अधिक के कारोबार और विदेशी ऑर्डरों से बाजार में उत्साह है।
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लड्डू गोपाल की पोशाक बनाने में जुटे तौफीक और वसीम
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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कान्हा की नगरी में राधे-राधे की धुन के साथ ही सांप्रदायिक सौहार्द भी देखने को मिल रहा है। बाल गोपाल के जिस मनमोहक शृंगार और पोशाक की चर्चा देश ही नहीं बल्कि विदेश में भी होती है, उसे तैयार करने में मुख्य भूमिका मुस्लिम कारीगरों की है। पीढ़ियों से कान्हा के वस्त्र और मुकुट सजा रहे मुस्लिम कारीगरों ने मोरपंख की मनमोहक पोशाक और मुकुट तैयार किए हैं। इस बार जन्माष्टमी पर कान्हा की पोशाक, शृंगार सामग्री और मुरली-मुकुट के कारोबार में जबरदस्त उछाल की उम्मीद जताई जा रही है। देश और विदेश से आए ऑर्डर के मुताबिक कारोबारी इस बार 200 करोड़ से अधिक के व्यापार की उम्मीद जता रहे हैं।
मुस्लिम कारीगर
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया से मिले ऑर्डर
मुस्लिम कारीगरों के हुनर की गूंज अब सात समंदर पार भी सुनाई दे रही है। इस बार अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, ब्रिटेन और खाड़ी देशों से ब्रज की पोशाकों और शृंगार सामग्री के भारी ऑर्डर मिले हैं। विदेशी भक्त और प्रवासी भारतीय विशेष रूप से मथुरा में बनी जरी और जरदोजी वर्क वाली पोशाकें मंगवा रहे हैं। इसके अलावा कुछ जगहों से मोरपंख की पोशाक और मुकुट की मांग भी बढ़ी है।
मुस्लिम कारीगरों के हुनर की गूंज अब सात समंदर पार भी सुनाई दे रही है। इस बार अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, ब्रिटेन और खाड़ी देशों से ब्रज की पोशाकों और शृंगार सामग्री के भारी ऑर्डर मिले हैं। विदेशी भक्त और प्रवासी भारतीय विशेष रूप से मथुरा में बनी जरी और जरदोजी वर्क वाली पोशाकें मंगवा रहे हैं। इसके अलावा कुछ जगहों से मोरपंख की पोशाक और मुकुट की मांग भी बढ़ी है।
पोशाक
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
90 हजार रुपये में मोरपंख की पोशाक तैयार करते हैं कारीगर
कारीगर राजू ने बताया कि मोरपंख की पोशाक तैयार करने में काफी समय लगता है। कारीगर पोशाक को वजन के हिसाब से तैयार करते हैं, जिसमें 5 से 6 किलो वजन होता है। कारीगर इसके लिए व्यापारियों से 15 हजार रुपये प्रति किलो के हिसाब से अपना मेहनताना लेते हैं। इसके हिसाब से कारीगर एक पोशाक को तैयार करने के लिए करीब 90 हजार रुपये लेते हैं।
कारीगर राजू ने बताया कि मोरपंख की पोशाक तैयार करने में काफी समय लगता है। कारीगर पोशाक को वजन के हिसाब से तैयार करते हैं, जिसमें 5 से 6 किलो वजन होता है। कारीगर इसके लिए व्यापारियों से 15 हजार रुपये प्रति किलो के हिसाब से अपना मेहनताना लेते हैं। इसके हिसाब से कारीगर एक पोशाक को तैयार करने के लिए करीब 90 हजार रुपये लेते हैं।
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पोशाक
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
रूस-मलेशिया तक जा रहीं ठाकुरजी की पोशाकें
वृंदावन से पोशाक विदेशों में बड़ी मात्रा में जा रही हैं। रूस, यूक्रेन, मलेशिया में वृंदावन की बनीं पोशाक को ज्यादा पसंद करते हैं। मलेशिया में तो इंडियन लोक स्थान है, जहां छोेटे-छोेटे मंदिरों में वृंदावन की बनीं पोशाक ही जाती हैं। युद्ध के कारण इस बार पोशाकें कम जा पा रही हैं। इसके अलावा देश में चेन्नई, गुजरात, मुंबई सहित देश के विभिन्न राज्यों में भी पोशाक जा रही हैं।
वृंदावन से पोशाक विदेशों में बड़ी मात्रा में जा रही हैं। रूस, यूक्रेन, मलेशिया में वृंदावन की बनीं पोशाक को ज्यादा पसंद करते हैं। मलेशिया में तो इंडियन लोक स्थान है, जहां छोेटे-छोेटे मंदिरों में वृंदावन की बनीं पोशाक ही जाती हैं। युद्ध के कारण इस बार पोशाकें कम जा पा रही हैं। इसके अलावा देश में चेन्नई, गुजरात, मुंबई सहित देश के विभिन्न राज्यों में भी पोशाक जा रही हैं।
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कारीगर
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पोशाक कारोबारी गणेश अग्रवाल ने बताया कि जिस तरह से श्रीबांकेबिहारी मंदिर में फूलबंगला बन रहे हैं। उसी शैली में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर कान्हाजी के लिए नई डिजायन की पोशाक तैयार की जा रही हैं। पोशाक के साथ पगड़ी, मुकुट, पटका, चोली भी उपलब्ध कराई जा रही है। श्रीकृष्ण जन्मष्टमी के लिए नई डिजायन की पोशाक बनाने का कार्य होली के बाद से ही प्रारंभ हो गया है। जून माह से देश-विदेश से पोशाक मंगाने के ऑर्डर पोशाक कारोबारियों के पास आने लगे।