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Axiom-4 Mission: एक्सिओम मिशन-4 में कब-कब हुई देरी, छह बार क्यों टालनी पड़ी लॉन्चिंग? नई तारीख अब भी तय नहीं

Fri, 20 Jun 2025 08:35 AM IST
अभिषेक दीक्षित वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Fri, 20 Jun 2025 08:35 AM IST
सार

'एक्सिओम मिशन 4' के प्रक्षेपण को एक बार फिर टाल दिया गया है। अब तक इस मिशन को किसी न किसी वजह से छह बार टाला गया है। हालिया लॉन्चिंग रविवार यानी 22 जून को होनी थी, जिसे अब अनिश्चितकाल के लिए टाल दिया गया है। कहा गया है कि नासा बाद में प्रक्षेपण की नई तारीख का एलान करेगा।

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Why Shubhanshu Shukla Axiom-4 mission has been postponed Six times NASA ISRO Explained
एक्सिओम मिशन में देरी - फोटो : Amar Ujala
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नासा ने भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला और तीन अन्य को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर ले जाने वाले एक्सिओम-4 मिशन के रविवार (22 जून) के प्रक्षेपण को स्थगित कर दिया है। इसकी लॉन्चिंग की नई तारीख का एलान भी नहीं किया गया है। एक्सिओम स्पेस ने एक बयान में कहा, 'नासा ने रविवार, 22 जून को प्रक्षेपण से पीछे हटने का फैसला किया है। आने वाले दिनों में प्रक्षेपण की नई तिथि तय करेगा।'

अंतरिक्ष एजेंसी ने कहा कि कक्षीय प्रयोगशाला के ज्वेज्दा सेवा मॉड्यूल के सबसे पीछे के हिस्से में हाल ही में मरम्मत कार्य के बाद अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के संचालन का मूल्यांकन जारी रखने के लिए अतिरिक्त समय की जरूरत है। एक्सिओम स्पेस के बयान में कहा गया कि अंतरिक्ष स्टेशन से जुड़े मसलों के कारण नासा यह सुनिश्चित करना चाहता है कि स्टेशन अतिरिक्त चालक दल के सदस्यों के लिए तैयार है। एजेंसी डेटा की समीक्षा करने के लिए आवश्यक समय ले रही है।



कब-कब टाला गया मिशन?
22 जून वाली लॉन्चिंग टालने से पहले एक्सिओम स्पेस मिशन 19 जून को प्रक्षेपित होना था। इससे पहले 11 जून को फ्लोरिडा में नासा के कैनेडी स्पेस सेंटर से इसकी लॉन्चिंग की तैयारी की गई थी। स्पेसएक्स के फाल्कन-9 रॉकेट में ईंधन रिसाव और फिर आईएसएस के रूसी खंड में रिसाव के कारण इसे टालना पड़ा था। इससे भी पहले इस 14 दिवसीय मिशन को 8 और 10 जून को टाल दिया गया था। मिशन को सबसे पहले 29 मई को प्रक्षेपित किया जाना था।

Why Shubhanshu Shukla Axiom-4 mission has been postponed Six times NASA ISRO Explained
एक्सिओम-4 क्रू के सदस्य - फोटो : Axiom Space

कब और क्यों हुई देरी?
इसरो के मुताबिक, Axiom-4 मिशन लॉन्च सबसे पहले 29 मई को तय किया गया था, लेकिन क्रू ड्रैगन मॉड्यूल में विद्युत हार्नेस में अवलोकन की वजह से इसे 8 जून तक के लिए स्थगित कर दिया गया। इसके बाद स्पेसएक्स के फाल्कन 9 रॉकेट की तैयारियों में देरी के कारण लॉन्च को 9 जून तक के लिए टाल दिया। 9 जून को खराब मौसम की वजह से लॉन्च को 11 जून तक के लिए टालना पड़ा। 

इस बीच 10 जून को एक्सिओम और स्पेसएक्स के साथ तकनीकी समीक्षा के दौरान इसरो ने लॉन्च को अंतिम रूप देने से पहले इन-सीटू मरम्मत या रिप्लेसमेंट और कम तापमान रिसाव परीक्षण की सिफारिश की। 11 जून को उस वक्त लॉन्च को फिर से स्थगित कर दिया गया, जब इंजीनियरों ने फाल्कन-9 रॉकेट के बूस्टर में एक तरल ऑक्सीजन रिसाव का पता लगाया। इसके साथ ही नासा ने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के पुराने रूसी मॉड्यूल में रिसाव का भी पता चला। बाद में लॉन्च की नई तारीख 19 जून तय की गई।

इस बीच 18 जून को इसरो ने बताया कि पोलैंड और हंगरी की टीमों ने Axiom मिशन 4 की संभावित लॉन्च टाइमलाइन के बारे में एक्सिओम स्पेस के साथ विस्तार से चर्चा की। इसके बाद कई मापदंडों का आकलन करने के लिए नासा और स्पेसएक्स से बात की गई। स्पेसएक्स के फाल्कन 9 लॉन्च रॉकेट, ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट की स्थिति, अंतरिक्ष स्टेशन के ज्वेज्दा मॉड्यूल में मरम्मत, मौसम की स्थिति, चालक दल की सेहत तैयारियों के आधार पर अगली संभावित लॉन्च तिथि 22 जून 2025 तय की गई है।

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Axiom 4 - फोटो : Amar Ujala

क्या है एक्सिओम मिशन 4?
यह मिशन भारत के लिए ऐतिहासिक होगा, साथ ही पोलैंड और हंगरी के लिए भी। ये दोनों देश 40 साल बाद पहली बार मानव अंतरिक्ष उड़ान में हिस्सा लेंगे। यह पहली बार होगा जब भारत, पोलैंड और हंगरी एक संयुक्त मिशन के तहत आईएसएस पर साथ जाएंगे। इस मिशन को फाल्कन 9 रॉकेट पर स्पेसएक्स ड्रैगन कैप्सूल में लॉन्च किया जाएगा। एक्सिओम-4 चालक दल का प्रक्षेपण फ्लोरिडा में नासा के कैनेडी स्पेस सेंटर में लॉन्च कॉम्प्लेक्स 39A से होगा।  
 

इन वजहों से बार-बार हुई मिशन में देरी

  • फाल्कन 9 रॉकेट को तैयार करने में देरी
  • फाल्कन 9 रॉकेट में ईंधन रिसाव 
  • फाल्कन 9 रॉकेट में तरल ऑक्सीजन का रिसाव
  • मौसम की स्थिति
  • अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर सर्विस मॉड्यूल में खराबी

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शुभांशु शुक्ला। - फोटो : अमर उजाला

अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर पहुंचने वाले पहले भारतीय
इस महत्वाकांक्षी अभियान के तहत भारत जल्द ही ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करने वाला है। भारत के शुभांशु शुक्ल अब अंतरिक्ष में जाने वाले दूसरे भारतीय बनने वाले हैं। इतना ही नहीं, वे अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) में पहुंचने वाले पहले भारतीय होंगे।  इस मिशन को अमेरिका के अंतरिक्ष अभियानों से जुड़ी कंपनी एक्सिओम स्पेस और नासा के सहयोग से अंजाम दिया जा रहा है। साथ ही एलन मस्क की स्पेसएक्स इस मिशन में अहम भूमिका निभाएगी।

 

तस्वीरें और वीडियो के जरिए अनुभवों को इकट्ठा करेगी टीम
बता दें कि इस मिशन में शुभांशु के साथ तीन और अंतरिक्ष यात्री शामिल रहेंगे। शुभांशु शुक्ल इस अभियान के दौरान कई वैज्ञानिक मिशन्स को अंजाम देंगे। शुभांशु ने इससे पहले एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया था कि उन्हें उम्मीद है कि उनकी यह अंतरिक्ष यात्रा भविष्य की पीढ़ियों को प्रेरित करने का काम करेगी। उन्होंने कहा कि वह आईएसएस पर एक निजी एजेंडे के साथ भी जा रहे हैं। वहां वे अपने अनुभवों को वे तस्वीरें और वीडियो के जरिए इकट्ठा करेंगे। शुभांशु ने कहा, मैं इन अनुभवों को साझा करुंगा, ताकि सभी भारतवासी मेरी आंखों से देखी गई चीजों को खुद महसूस करें। मैं भले ही एक व्यक्ति की तरह यह यात्रा कर रहा हूं, लेकिन यह सफर 1.4 अरब लोगों का है। 

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शुभांशु शुक्ला। - फोटो : अमर उजाला

कौन हैं शुभांशु शुक्ला?

  • शुभांशु शुक्ला का जन्म उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में 10 अक्तूबर 1985 को हुआ था। तीन भाई-बहनों में सबसे छोटे शुभांशु लखनऊ के अलीगंज में स्थित सिटी मॉन्टेसरी स्कूल में पढ़े और 2001 में स्कूली शिक्षा पूरी की।
  • शुभांशु का परिवार मूलतः उत्तर प्रदेश के ही हरदोई स्थित संडीला से है। हालांकि, उनके पिता शंभू दयाल शुक्ल सत्तर के दशक में लखनऊ आ गए थे। उनकी मां गृहिणी हैं। वहीं, दो बहनें निधि और शुचि हैं।  
  • शुभांशु की पत्नी डॉ. कामना डेंटिस्ट हैं और उनका एक बेटा (कियास) है। शुभांशु को परिजन प्यार से गुंजन बुलाते हैं। 
  • 2003 में उन्हें एनडीए में चुना गया। ट्रेनिंग के बाद शुभांशु ने विमानन क्षेत्र में विशेषज्ञता हासिल की और भारतीय वायुसेना का हिस्सा बने। 
  • 17 जून 2006 को शुभांशु भारतीय वायुसेना के फाइटर जेट्स को उड़ाने वाले बेड़े का हिस्सा बने। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। अपने करियर में आगे बढ़ते हुए 2019 में उन्होंने विंग कमांडर की रैंक हासिल की।
  • शुभांशु फाइटर कॉम्बैट लीडर और एक टेस्ट पायलट हैं, जिनके पास लगभग दो हजार घंटे की उड़ान का अनुभव है। उन्होंने एसयू-30 एमकेआई, मिग-21, मिग-29, जगुआर, हॉक, डोर्नियर, एएन-32 समेत कई तरह के विमान उड़ाए हैं।
  • 2019 ही वह साल था, जब भारत ने अपने पहले मानव अंतरिक्ष मिशन- गगनयान के लिए अंतरिक्ष यात्री की खोज शुरू की थी। शुभांशु का सैन्य रिकॉर्ड और कॉम्बैट अनुभव यहीं अहम साबित हुआ और वे मिशन के लिए चुने जाने वालों में से एक बने।

एनडीए, एसएसबी दोनों में चयनित
भारतीय सेना में शामिल होने वाले शुभांशु अपने परिवार में पहले व्यक्ति हैं। उनके परिजन चाहते थे कि शुभांशु सिविल सेवा में जाएं या फिर डॉक्टर बनें, लेकिन वह तो सैन्य अधिकारी बनने की ठाने बैठे थे। उनके एनडीए में चयन की कहानी भी बड़ी दिलचस्प है। शुभांशु ने सेना में जाने के लिए एसएसबी का फॉर्म भरा था। वहीं, उनका एक दोस्त एनडीए का फॉर्म लेकर आया, लेकिन दोस्त का मन पलट गया और उसने एनडीए का फॉर्म भरने से इन्कार कर दिया। शुरू से ही अवसर को भांपने में माहिर शुभांशु ने अपने दोस्त से एनडीए वाला फॉर्म ले लिया और खुद भर दिया। संयोग से शुभांशु का एसएसबी और एनडीए, दोनों में चयन हो गया, लेकिन उन्होंने एनडीए में जाने का निश्चय किया। 

एक्सिओम मिशन की लॉन्चिंग से पहले शुभांशु के घर पर जश्न का माहौल है। उनके अंतरिक्ष रवाना होने से उनके घर को उनकी जीवन यात्रा से जुड़े पोस्टर लगाकर सजाया गया है। साथ ही इसमें उनको इस बड़ी उपलब्धि के लिए बधाई दी गई है। इनमें वह अलग-अलग कार्यक्रमों में दिख रहे हैं। किसी में प्रधानमंत्री मोदी उनका हौसला अफजाई कर रहे हैं। किसी में वह प्रशिक्षण स्थान पर दिख रहे हैं।
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