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सेना ने तैयार किया खास पोर्टल: जवानों तक देरी से नहीं पहुंचेगी सैन्य रसद, गड़बड़ियों पर कसेगी लगाम
मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Fri, 13 Feb 2026 01:49 PM IST
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सार
सेना ने एक खास पोर्टल तैयार किया है जो इस सारी प्रक्रिया को संघटित करते हुए इसमें पारदर्शिता बढ़ाएगा। यूनिट स्तर से लेकर सेना मुख्यालय तक आला अफसर भी इसके जरिये सेना रसद प्रणाली की निगरानी कर सकेंगे।
सेना के लिए रसद लेकर जाता वाहन
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
सेना की यूनिटों, कोर, कमांड व दुर्गम क्षेत्रों में तैनात टुकड़ियों को सैन्य रसद की आपूर्ति में अब देरी नहीं होगी। इस प्रक्रिया में संभावित गड़बड़ियों पर भी लगाम कसेगी जबकि इसकी रियल टाइम जानकारी भी डैशबोर्ड के जरिये अपडेट होती रहेगी।
इसके लिए सेना ने एक खास पोर्टल तैयार किया है जो इस सारी प्रक्रिया को संघटित करते हुए इसमें पारदर्शिता बढ़ाएगा। यूनिट स्तर से लेकर सेना मुख्यालय तक आला अफसर भी इसके जरिये सेना रसद प्रणाली की निगरानी कर सकेंगे।
सैन्य यूनिटों तक विभिन्न रसद सामग्री पहुंचाने की जिम्मेदारी मूल रूप से दो विंगों की होती है। एक विंग जवानों के लिए रोजमर्रा संबंधी सामग्री की आपूर्ति करती है जबकि दूसरी विंग युद्धक गाड़ियों से लेकर गोला-बारूद, जवानों की वर्दी, बूट, बैडिंग इत्यादि चीजें उपलब्ध करवाती है। इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, एएससी व ऑर्डिनेंस इत्यादि विभागों से संबंधित रसद सामग्रियों की संख्या काफी ज्यादा होती है।
हर यूनिट से लेकर मुख्यालय स्तर तक किसी न किसी रसद की डिमांड जेनरेट होती रहती है, लिहाजा दोनों विंग इस प्रक्रिया में निरंतर जुटी रहती हैं। चूंकि अभी तक सेना रसद प्रणाली मैनुअल थी, लिहाजा इसमें काफी समय लगता था और गड़बड़ियों की आशंका भी ज्यादा रहती थी।
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इसके लिए सेना ने एक खास पोर्टल तैयार किया है जो इस सारी प्रक्रिया को संघटित करते हुए इसमें पारदर्शिता बढ़ाएगा। यूनिट स्तर से लेकर सेना मुख्यालय तक आला अफसर भी इसके जरिये सेना रसद प्रणाली की निगरानी कर सकेंगे।
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सैन्य यूनिटों तक विभिन्न रसद सामग्री पहुंचाने की जिम्मेदारी मूल रूप से दो विंगों की होती है। एक विंग जवानों के लिए रोजमर्रा संबंधी सामग्री की आपूर्ति करती है जबकि दूसरी विंग युद्धक गाड़ियों से लेकर गोला-बारूद, जवानों की वर्दी, बूट, बैडिंग इत्यादि चीजें उपलब्ध करवाती है। इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, एएससी व ऑर्डिनेंस इत्यादि विभागों से संबंधित रसद सामग्रियों की संख्या काफी ज्यादा होती है।
हर यूनिट से लेकर मुख्यालय स्तर तक किसी न किसी रसद की डिमांड जेनरेट होती रहती है, लिहाजा दोनों विंग इस प्रक्रिया में निरंतर जुटी रहती हैं। चूंकि अभी तक सेना रसद प्रणाली मैनुअल थी, लिहाजा इसमें काफी समय लगता था और गड़बड़ियों की आशंका भी ज्यादा रहती थी।