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पंजाब में भी आप के लिए चुनौती: चुनावी वादे अब तक न किए पूरे, राज्य पर बढ़ रहा कर्ज; जल्द हो सकते बड़े फेरबदल

Sun, 09 Feb 2025 02:54 PM IST
आकाश दुबे विशाल पाठक, अमर उजाला, चंडीगढ़
विशाल पाठक, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: आकाश दुबे Updated Sun, 09 Feb 2025 02:54 PM IST
सार

मान सरकार को दोबारा सत्ता हासिल करने के लिए अपने इस कार्यकाल के बचे हुए दो वर्षों में जनता से किए वादे जो अधूरे रह गए हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर पूरा करना होगा।

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Delhi Election Result AAP has not yet fulfilled its election promises in Punjab debt of state is increasing
Delhi Election 2025 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी (आप) को करारी हार का सामना करना पड़ा है। 2020 के चुनाव में जहां आप ने 62 सीटों पर जीत दर्ज की थी, इस चुनाव में 22 सीटों पर ही कामयाबी हाथ लगी। आप की इस हार का सीधा असर अब पंजाब की सियासत पर पड़ना तय माना जा रहा है। पंजाब इकाई में आने वाले दिनों में बड़े फेरबदल भी देखने को मिल सकते हैं। मान सरकार को दोबारा सत्ता हासिल करने के लिए अपने इस कार्यकाल के बचे हुए दो वर्षों में जनता से किए वादे जो अधूरे रह गए हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर पूरा करना होगा, जिसमें सबसे बड़ा चुनावी वादा महिलाओं को हर माह एक हजार रुपये आर्थिक मदद देना है। जो सत्ता को संभाले तीन साल में मान सरकार पूरा नहीं कर पाई है। 

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प्रदेश पर इस समय 3.75 लाख करोड़ रुपये का कर्ज है। सरकार के कामकाज, 2022 में किए अपने चुनावी वायदों को पूरा करने, विकास का पहिया चलाते रहने और रंगला पंजाब से जुड़े नए बुनियादी ढांचे खड़े करने के लिए सरकार को मौजूदा वित्तीय वर्ष में भी 28 हजार करोड़ का कर्ज लेना पड़ा है। प्रदेश पर लगातार बढ़ते कर्ज का बोझ सबसे बड़ी चुनौती बन चुका है। विपक्षी दल भी सरकार को इस मुद्दे पर समय-समय पर घेरते नजर आते हैं। ऐसे में मान सरकार को अपने कार्यकाल के बचे हुए दो साल में सरकार की आर्थिक स्थिति को पहले के मुकाबले बेहतर करना होगा। 

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कर्ज लेने की सीमा को कम करना होगा और आय के नए स्रोत के जरिए राजस्व को बढ़ावा होगा। सरकार के सामने दूसरी बड़ी चुनौती है केंद्र के साथ अपने रिश्तों में सुधार करना, जिसकी वजह से प्रदेश के करीब 10,500 करोड़ रुपये के फंड रुके हुए हैं। तीसरी बड़ी चुनौती प्रदेश इकाई को जमीनी स्तर पर अपने संगठनात्मक मजबूती के लिए कई बड़े बदलाव करने होंगे। बीते वर्ष के अंत में पंजाब आप प्रधान के रूप में कार्यभार संभालने वाले कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा के नेतृत्व में नगर निगम चुनाव हुए, लेकिन आप को अपना मेयर बनाने के लिए जमीनी स्तर पर काफी जद्दोजहद तक करनी पड़ी, आप को निगम चुनाव में पूर्ण बहुमत का अंदेश अधूरा दिखाई पड़ा।

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दिल्ली-हरियाणा चुनाव का गजब का संयोग
हरियाणा-दिल्ली चुनाव में गजब का संयोग देखने को मिला है। दोनों ही जगह चुनाव,परिणाम और सीटें भी उतनी ही आई। हरियाणा में पांच अक्तूबर को विधानसभा चुनाव हुए और परिणाम आठ को आया। हरियाणा में भाजपा ने 48 सीटें जीती थीं। वहीं, दिल्ली में भी पांच अक्तूबर को मतदान हुआ। आठ को परिणाम आया और दिल्ली में भी भाजपा को 48 सीटें मिली। इस गजब संयोग को लेकर  हरियाणा में काफी चर्चा है।

राजनीतिक विशेषज्ञ प्रोफेसर गुरमीत सिंह ने कहा, आम आदमी पार्टी का सबसे बड़ा गढ़ दिल्ली ही था जहां पार्टी का जन्म भी हुआ। दिल्ली के बाद जिस इकलौते राज्य में आप को सफलता मिली वह पंजाब है। इस दृष्टि से दिल्ली में आप की हार का सीधा असर पंजाब की राजनीति पर पड़ना लाजिमी है।

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