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कैप, कुक्ड और गोट: बच्चे बोल रहे डिजिटल स्लैंग, Gen Z की भाषा कैसे समझें; माॅम-डैड एकदम क्लूलेस
Thu, 09 Jul 2026 10:02 AM IST
Nivedita
मोनिका नागर, संवाद, चंडीगढ़
मोनिका नागर, संवाद, चंडीगढ़
Published by: Nivedita
Updated Thu, 09 Jul 2026 10:02 AM IST
सार
युवाओं की बातचीत में अब स्ले, रिज़, ऑरा, सिग्मा, एनपीसी, सस, मिड, वाइब, बेट, ब्रूह, डेलूलू, लो-की, हाई-की, टच ग्रास, इट्स गिविंग जैसे दर्जनों शब्द आम हो चुके हैं। सोशल मीडिया ट्रेंड, गेमिंग कम्युनिटी और वायरल मीम्स इन शब्दों को तेजी से लोकप्रिय बना रहे हैं। माता पिता इस नई भाषा से तालमेल बैठाने में जुटे हैं।
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जेन जी की भाषा से अभिभावक परेशान
- फोटो : AI
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विस्तार
अगर आपका बेटा कहे, आज मैं पूरी तरह कुक्ड हूं, दोस्त की बात पर कैप बोल दे या किसी खिलाड़ी को गोट कहकर सराहे, तो चौंकिए मत। यह नई पीढ़ी की डिजिटल भाषा है जो इंस्टाग्राम, गेमिंग, मीम्स और शॉर्ट वीडियो प्लेटफॉर्म के जरिये तेजी से युवाओं की रोजमर्रा की बातचीत का हिस्सा बन चुकी है।
इस बदलती भाषा ने पीढ़ियों के बीच नया संवाद अंतर पैदा कर दिया है। कई माता-पिता बच्चों की बातचीत और चैट पढ़कर भी उसका अर्थ नहीं समझ पाते।
विशेषज्ञों के अनुसार जेन-जी और उससे आगे की पीढ़ी अब लंबे वाक्यों की बजाय छोटे, तेज और भावनात्मक स्लैंग का इस्तेमाल कर रही है। इन शब्दों का अर्थ पारंपरिक शब्दकोश में नहीं मिलता लेकिन सोशल मीडिया पर यही नई अभिव्यक्ति बन चुके हैं।
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इस बदलती भाषा ने पीढ़ियों के बीच नया संवाद अंतर पैदा कर दिया है। कई माता-पिता बच्चों की बातचीत और चैट पढ़कर भी उसका अर्थ नहीं समझ पाते।
विशेषज्ञों के अनुसार जेन-जी और उससे आगे की पीढ़ी अब लंबे वाक्यों की बजाय छोटे, तेज और भावनात्मक स्लैंग का इस्तेमाल कर रही है। इन शब्दों का अर्थ पारंपरिक शब्दकोश में नहीं मिलता लेकिन सोशल मीडिया पर यही नई अभिव्यक्ति बन चुके हैं।
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मां ने समझा कैप यानी टोपी, बेटी ने बताया- इसका मतलब झूठ
चंडीगढ़ की 19 वर्षीय छात्रा जाह्न्वी ने घर पर कहा कि वह कैप कर रहा है। मां को लगा कि बात टोपी (कैप) की हो रही है। बाद में बेटी ने समझाया कि कैप का मतलब झूठ बोलना या बढ़ा-चढ़ाकर बात करना होता है जबकि नो कैप का अर्थ होता है... मैं सच कह रहा हूं।
मैं कुक्ड हूं... सुनकर पिता समझे खाना बनाने की बात
कॉलेज छात्र अर्नव ने घर लौटकर कहा कि आज मैं पूरी तरह कुक्ड हूं। पिता को लगा कि वह खाना बनाने की बात कर रहा है जबकि बेटे का मतलब था कि वह बेहद थक चुका है और अब किसी काम की स्थिति में नहीं है।
चंडीगढ़ की 19 वर्षीय छात्रा जाह्न्वी ने घर पर कहा कि वह कैप कर रहा है। मां को लगा कि बात टोपी (कैप) की हो रही है। बाद में बेटी ने समझाया कि कैप का मतलब झूठ बोलना या बढ़ा-चढ़ाकर बात करना होता है जबकि नो कैप का अर्थ होता है... मैं सच कह रहा हूं।
मैं कुक्ड हूं... सुनकर पिता समझे खाना बनाने की बात
कॉलेज छात्र अर्नव ने घर लौटकर कहा कि आज मैं पूरी तरह कुक्ड हूं। पिता को लगा कि वह खाना बनाने की बात कर रहा है जबकि बेटे का मतलब था कि वह बेहद थक चुका है और अब किसी काम की स्थिति में नहीं है।
गोट को समझ बैठे बकरी
स्कूल छात्र विकास ने अपने पसंदीदा क्रिकेटर की तारीफ करते हुए कहा कि वह तो गोट है। दादा-दादी ने समझा कि वह बकरी की बात कर रहा है। बाद में पता चला कि गोट (ग्रेटेस्ट ऑफ आल टाइम) का अर्थ अपने क्षेत्र का सर्वश्रेष्ठ व्यक्ति होता है।
स्कूल छात्र विकास ने अपने पसंदीदा क्रिकेटर की तारीफ करते हुए कहा कि वह तो गोट है। दादा-दादी ने समझा कि वह बकरी की बात कर रहा है। बाद में पता चला कि गोट (ग्रेटेस्ट ऑफ आल टाइम) का अर्थ अपने क्षेत्र का सर्वश्रेष्ठ व्यक्ति होता है।
बातचीत तेज हुई, लेकिन बढ़ा पीढ़ियों का फासला
कॉलेज विद्यार्थियों का कहना है कि डिजिटल स्लैंग बातचीत को तेज, आसान और मजेदार बनाती है। वहीं अभिभावकों का कहना है कि नई भाषा के कारण कई बार बच्चों की बात समझना मुश्किल हो जाता है। इससे घरों में संवाद का अंतर भी बढ़ रहा है।
भाषा बदलना स्वाभाविक, मातृभाषा नहीं छूटनी चाहिए
पंजाब विश्वविद्यालय के भाषाविद् डॉ. अशोक कुमार ने कहा कि भाषा समय के साथ बदलती रहती है और हर पीढ़ी अपनी नई अभिव्यक्ति विकसित करती है। डिजिटल स्लैंग सीखना गलत नहीं है लेकिन इसके साथ हिंदी, पंजाबी या अपनी मातृभाषा में प्रभावी संवाद की आदत भी बनी रहनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया और डिजिटल संस्कृति ने भाषा को नया रूप दिया है जिसे रोका नहीं जा सकता लेकिन संतुलन बनाए रखना जरूरी है।
जेन-जी के 10 चर्चित शब्द
कैप : झूठ बोलना
नो कैप : सच कह रहा हूं
कुक्ड : पूरी तरह थक जाना या मुश्किल में होना
गोट : सबसे महान व्यक्ति
सिग्मा : आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी व्यक्ति
सस : संदिग्ध
वाइब : माहौल या एहसास
ब्रूह : दोस्त या हैरानी जताने का शब्द
लो-की : चुपचाप या कम दिखावा
स्ले : शानदार प्रदर्शन करना
कॉलेज विद्यार्थियों का कहना है कि डिजिटल स्लैंग बातचीत को तेज, आसान और मजेदार बनाती है। वहीं अभिभावकों का कहना है कि नई भाषा के कारण कई बार बच्चों की बात समझना मुश्किल हो जाता है। इससे घरों में संवाद का अंतर भी बढ़ रहा है।
भाषा बदलना स्वाभाविक, मातृभाषा नहीं छूटनी चाहिए
पंजाब विश्वविद्यालय के भाषाविद् डॉ. अशोक कुमार ने कहा कि भाषा समय के साथ बदलती रहती है और हर पीढ़ी अपनी नई अभिव्यक्ति विकसित करती है। डिजिटल स्लैंग सीखना गलत नहीं है लेकिन इसके साथ हिंदी, पंजाबी या अपनी मातृभाषा में प्रभावी संवाद की आदत भी बनी रहनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया और डिजिटल संस्कृति ने भाषा को नया रूप दिया है जिसे रोका नहीं जा सकता लेकिन संतुलन बनाए रखना जरूरी है।
जेन-जी के 10 चर्चित शब्द
कैप : झूठ बोलना
नो कैप : सच कह रहा हूं
कुक्ड : पूरी तरह थक जाना या मुश्किल में होना
गोट : सबसे महान व्यक्ति
सिग्मा : आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी व्यक्ति
सस : संदिग्ध
वाइब : माहौल या एहसास
ब्रूह : दोस्त या हैरानी जताने का शब्द
लो-की : चुपचाप या कम दिखावा
स्ले : शानदार प्रदर्शन करना