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शादी का झांसा देकर युवती का शारीरिक शोषण: हाईकोर्ट सख्त, जांच अधिकारी बदलने के आदेश
Tue, 21 Jul 2026 08:46 PM IST
शाहिल शर्मा
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
Published by: शाहिल शर्मा
Updated Tue, 21 Jul 2026 08:46 PM IST
सार
शादी का झांसा देकर युवती का शारीरिक शोषण करने के मामले में हाईकोर्ट ने सख्ती दिखाते हुए जांच अधिकारी बदलने का आदेश दिया है।
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पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने अमृतसर में युवती को शादी का झांसा देकर शारीरिक शोषण करने और आपत्तिजनक तस्वीरों के जरिए ब्लैकमेल करने के मामले में जांच अधिकारी बदलने का आदेश दिया है। कोर्ट ने मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपने से इनकार किया लेकिन निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए नए अधिकारी की नियुक्ति के निर्देश दिए।
हाईकोर्ट ने पंजाब के पुलिस महानिदेशक को आदेश दिया कि जांच महिला मामलों से जुड़े विशेष पुलिस महानिदेशक की निगरानी में कराई जाए। नए जांच अधिकारी ऐसे वरिष्ठ राजपत्रित अधिकारी होंगे जिनका इस मामले की पहले की जांच से कोई संबंध न रहा हो।
मामला युवती के पिता की शिकायत पर दर्ज प्राथमिकी से जुड़ा है। आरोप है कि आरोपी युवती को शादी का झांसा देकर अपने साथ ले गया और उसकी इच्छा के खिलाफ शारीरिक संबंध बनाए। बाद में उसने आपत्तिजनक तस्वीरें इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित करने और परिवार को भेजने की धमकी देकर ब्लैकमेल किया तथा शादी से इनकार कर दिया।
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याचिकाकर्ता ने पुलिस जांच पर बाहरी प्रभाव का आरोप लगाया था। जस्टिस मंदीप पन्नू ने कहा कि आरोप गंभीर हैं। सभी पक्षों का भरोसा बनाए रखने के लिए जांच स्वतंत्र, निष्पक्ष और पहले की जांच से असंबंधित अधिकारी को सौंपना उचित होगा।
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हाईकोर्ट ने पंजाब के पुलिस महानिदेशक को आदेश दिया कि जांच महिला मामलों से जुड़े विशेष पुलिस महानिदेशक की निगरानी में कराई जाए। नए जांच अधिकारी ऐसे वरिष्ठ राजपत्रित अधिकारी होंगे जिनका इस मामले की पहले की जांच से कोई संबंध न रहा हो।
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मामला युवती के पिता की शिकायत पर दर्ज प्राथमिकी से जुड़ा है। आरोप है कि आरोपी युवती को शादी का झांसा देकर अपने साथ ले गया और उसकी इच्छा के खिलाफ शारीरिक संबंध बनाए। बाद में उसने आपत्तिजनक तस्वीरें इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित करने और परिवार को भेजने की धमकी देकर ब्लैकमेल किया तथा शादी से इनकार कर दिया।
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याचिकाकर्ता ने पुलिस जांच पर बाहरी प्रभाव का आरोप लगाया था। जस्टिस मंदीप पन्नू ने कहा कि आरोप गंभीर हैं। सभी पक्षों का भरोसा बनाए रखने के लिए जांच स्वतंत्र, निष्पक्ष और पहले की जांच से असंबंधित अधिकारी को सौंपना उचित होगा।