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बारिश में कूड़े से महामारी का खतरा: सफाई कर्मचारियों की हड़ताल पर हाईकोर्ट सख्त, सभी नगर निकायों से मांगा जवाब
Tue, 21 Jul 2026 10:38 AM IST
Nivedita
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: Nivedita
Updated Tue, 21 Jul 2026 10:38 AM IST
सार
अदालत ने कहा कि बारिश के मौसम में जगह-जगह जमा कूड़ा जलभराव और गंदगी गंभीर स्वास्थ्य संकट पैदा कर सकते हैं। हाईकोर्ट ने अतिरिक्त महाधिवक्ता को निर्देश दिया कि अगली सुनवाई से पहले सभी नगर निकायों का विस्तृत हलफनामा दाखिल किया जाए।
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बिखरा हुआ कूड़ा
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
पंजाब में सफाई कर्मचारियों की हड़ताल से पैदा हुए सफाई संकट पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है।
अदालत ने कहा कि मानसून के दौरान समय पर कूड़े और गंदगी का निपटारा नहीं हुआ तो महामारी फैलने का खतरा पैदा हो सकता है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को 22 जुलाई तक सभी नगर परिषदों और नगर निकायों की सफाई व्यवस्था पर विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है।
न्यायमूर्ति पंकज जैन की पीठ ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि केवल संगरूर नगर परिषद की व्यवस्था बताना पर्याप्त नहीं है। राज्य के सभी नगर निकायों में हड़ताल से बने हालात और उनसे निपटने के लिए किए गए वैकल्पिक प्रबंधों की जानकारी देना जरूरी है।
सुनवाई के दौरान संगरूर नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी अश्वनी कुमार की ओर से हलफनामा पेश किया गया जिसमें केवल संगरूर में किए गए प्रबंधों का उल्लेख था। इस पर अदालत ने कहा कि मामला पूरे पंजाब से जुड़ा है। अदालत ने कहा कि बारिश के मौसम में जगह-जगह जमा कूड़ा जलभराव और गंदगी गंभीर स्वास्थ्य संकट पैदा कर सकते हैं।
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हाईकोर्ट ने अतिरिक्त महाधिवक्ता को निर्देश दिया कि अगली सुनवाई से पहले सभी नगर निकायों का विस्तृत हलफनामा दाखिल किया जाए। इसमें हड़ताल के दौरान किए गए वैकल्पिक इंतजामों का पूरा ब्योरा हो। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि सरकार सफाई व्यवस्था बनाए रखने और आकस्मिक योजना लागू करने में विफल रही।
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अदालत ने कहा कि मानसून के दौरान समय पर कूड़े और गंदगी का निपटारा नहीं हुआ तो महामारी फैलने का खतरा पैदा हो सकता है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को 22 जुलाई तक सभी नगर परिषदों और नगर निकायों की सफाई व्यवस्था पर विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है।
न्यायमूर्ति पंकज जैन की पीठ ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि केवल संगरूर नगर परिषद की व्यवस्था बताना पर्याप्त नहीं है। राज्य के सभी नगर निकायों में हड़ताल से बने हालात और उनसे निपटने के लिए किए गए वैकल्पिक प्रबंधों की जानकारी देना जरूरी है।
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सुनवाई के दौरान संगरूर नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी अश्वनी कुमार की ओर से हलफनामा पेश किया गया जिसमें केवल संगरूर में किए गए प्रबंधों का उल्लेख था। इस पर अदालत ने कहा कि मामला पूरे पंजाब से जुड़ा है। अदालत ने कहा कि बारिश के मौसम में जगह-जगह जमा कूड़ा जलभराव और गंदगी गंभीर स्वास्थ्य संकट पैदा कर सकते हैं।
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हाईकोर्ट ने अतिरिक्त महाधिवक्ता को निर्देश दिया कि अगली सुनवाई से पहले सभी नगर निकायों का विस्तृत हलफनामा दाखिल किया जाए। इसमें हड़ताल के दौरान किए गए वैकल्पिक इंतजामों का पूरा ब्योरा हो। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि सरकार सफाई व्यवस्था बनाए रखने और आकस्मिक योजना लागू करने में विफल रही।