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लाखों कर्मचारियों-पेंशनरों का डीए-डीआर बकाया: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट सख्त, सरकार की दलीलों से असंतुष्ट

Mon, 06 Jul 2026 09:01 PM IST
शाहिल शर्मा अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़ Published by: शाहिल शर्मा Updated Mon, 06 Jul 2026 09:01 PM IST
सार

सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार ने हाईकोर्ट में स्पष्ट किया कि डीए और डीआर के भुगतान में वह केंद्र सरकार की नीति अपनाने के लिए बाध्य नहीं है।

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Issue regarding outstanding DA/DR for lakhs of employees and pensioners
पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पंजाब सरकार के लाखों कर्मचारियों और पेंशनरों के महंगाई भत्ता (डीए) और महंगाई राहत (डीआर) के बकाया भुगतान के मामले में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सोमवार को राज्य सरकार के रुख पर गंभीर सवाल उठाए। सरकार की ओर से पेश दलीलों से असंतुष्ट हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि मामले में उठाए गए कानूनी पहलुओं पर विस्तृत सुनवाई जरूरी है। अदालत ने सुनवाई मंगलवार 7 जुलाई तक के लिए स्थगित कर दी।
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कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश अश्विनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति रोहित कपूर की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता दीपेंद्र सिंह पटवालिया ने कहा कि डीए और डीआर के भुगतान के मामले में पंजाब सरकार केंद्र सरकार की नीति अपनाने के लिए बाध्य नहीं है। राज्य में इस संबंध में अलग वैधानिक नियम लागू हैं और सरकार उन्हीं के अनुरूप निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र है।
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सरकार की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने बकाया भुगतान और राज्य के रुख को लेकर कई सवाल उठाए। अदालत सरकार के जवाब से संतुष्ट नहीं दिखी और मामले के कानूनी पहलुओं पर विस्तार से सुनवाई का निर्णय लेते हुए सुनवाई मंगलवार तक स्थगित कर दी। कर्मचारियों और पेंशनरों की ओर से दायर याचिकाओं में केंद्र सरकार की तर्ज पर लंबित डीए और डीआर का लाभ समय पर देने की मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि लंबे समय से बकाया भुगतान नहीं होने के कारण कर्मचारियों और सेवानिवृत्त कर्मचारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
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इस मामले में हाईकोर्ट पहले भी राज्य सरकार से कई बार जवाब मांग चुका है। एकल पीठ बकाया भुगतान के संबंध में आदेश दे चुकी है, जिसके खिलाफ राज्य सरकार ने अपील दायर की है। अपील पर सुनवाई के दौरान सरकार लगातार यह पक्ष रख रही है कि डीए और डीआर के भुगतान पर निर्णय राज्य की वित्तीय स्थिति और लागू नियमों को ध्यान में रखकर ही लिया जा सकता है।

केंद्र की नीति मानने के लिए बाध्य नहीं : सरकार
सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार ने हाईकोर्ट में स्पष्ट किया कि डीए और डीआर के भुगतान में वह केंद्र सरकार की नीति अपनाने के लिए बाध्य नहीं है। सरकार का तर्क है कि पंजाब में इस संबंध में अलग वैधानिक नियम लागू हैं और इन्हीं नियमों के आधार पर भुगतान के संबंध में निर्णय लेने का अधिकार राज्य सरकार को है।

एकल पीठ के आदेश के खिलाफ सरकार ने की है अपील
डीए और डीआर के बकाया भुगतान को लेकर एकल पीठ पहले आदेश दे चुकी है। पंजाब सरकार ने इस आदेश को चुनौती देते हुए अपील दायर की है। इसी अपील पर सुनवाई के दौरान सरकार राज्य की वित्तीय स्थिति और लागू नियमों के आधार पर भुगतान का निर्णय लेने का पक्ष रख रही है।
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