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पंजाब कांग्रेस में होगी टूट!: राहुल के खास चन्नी नाराज, रंधावा शाह से मिले; चुनाव से पहले होगा बड़ा खेला

Sat, 04 Jul 2026 09:45 AM IST
Nivedita मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़
मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: Nivedita Updated Sat, 04 Jul 2026 09:45 AM IST
सार

कांग्रेस हाईकमान के पंजाब में पार्टी नेतृत्व को न बदलने के फैसले के बाद कांग्रेसियों ने विद्रोह छेड़ा है। जिसकी अगुवाई सांसद एवं पूर्व सीएम चन्नी कर रहे हैं।

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Punjab Congress rift Rahul Gandhi charanjit Channi sukhjinder Randhawa punjab assembly election
पंजाब कांग्रेस में बगावत के सुर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पंजाब कांग्रेस में बगावत के सुरों ने पार्टी की फूट को एक बार फिर उजागर कर दिया है। राहुल गांधी के खास माने जाने वाले पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी हाईकमान के फैसले से नाराज हो गए हैं। 

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जिस दिन पंजाब में बगावत हुई उसी दिन सांसद एवं पूर्व डिप्टी सीएम सुखजिंदर सिंह रंधावा नई दिल्ली में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मिलते हैं और इस पूरे प्रकरण पर पंजाब भाजपा के अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों कहते हैं कि भाजपा में सबका स्वागत है।

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पार्टी के सामने सियासी संकट

सूबे में विधानसभा चुनाव सिर पर हैं और कांग्रेस में बगावत की टाइमिंग ने पार्टी के समक्ष एक बड़ा सियासी संकट खड़ा कर दिया है। राहुल गांधी ने सितंबर 2021 में अंदरूनी राजनीतिक विवाद और कलह के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह से इस्तीफा लेकर दलित नेता चरणजीत सिंह चन्नी को पंजाब का सीएम बनाया था। आज वही पूर्व सीएम चन्नी राहुल गांधी के फैसले को चुनौती दे रहे हैं।

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कई नाखुश नेता भाजपा के संपर्क में

शुक्रवार को जो घटनाक्रम हुआ उससे सूबे की सियासत में बड़े खेल की संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता। उधर, भाजपा सूत्रों की मानें तो कांग्रेस के कई नाखुश नेता भाजपा के संपर्क में हैं। दरअसल, भाजपा पंजाब में अपनी जड़ें जमाने की कोशिशों में लगी है। सत्ता में आने के लिए भाजपा हर तरह की रणनीति पर काम करने की तैयारी में है क्योंकि पार्टी जानती है कि पंजाब में उसके पास खोने के लिए कुछ नहीं है। अभी सूबे में भाजपा के केवल दो ही विधायक हैं।


 

ढिल्लों बोले-भाजपा में सबका स्वागत

सात महीने बाद पंजाब में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। ऐसी स्थिति में पंजाब कांग्रेस में एक बड़ी कलह छिड़ जाने को भाजपा अपने लिए किसी बड़े अवसर से कम नहीं देख रही है। भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों भी जून 2022 से पहले कांग्रेस के बड़े नेता और दो बार के विधायक रहे हैं।

लिहाजा कई कांग्रेसी नेताओं के गैर सियासी संबंध आज भी उनके साथ बहुत अच्छे हैं। चूंकि अब कांग्रेस में बगावत के सुर उठ रहे हैं तो लाजिमी है कि ढिल्लों भी नाराज नेताओं को भाजपा की ओर आकर्षित करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ेंगे। शुक्रवार को कांग्रेस में बगावत संबंधी प्रकरण पर ढिल्लों ने साफ कहा कि भाजपा एक बहुत बड़ा परिवार है और यहां आने वाले हर नेता का स्वागत है।

ढिल्लों के अलावा सूबे के कई कांग्रेसी नेता राज्यसभा सदस्य तरुण चुघ, केंद्रीय राज्यमंत्री रवनीत सिंह बिट्टू, पूर्व अध्यक्ष सुनील जाखड़ और कार्यकारी प्रधान अश्वनी शर्मा के भी संपर्क में हैं। उधर, सांसद और पूर्व डिप्टी सीएम सुखजिंदर सिंह रंधावा की शुक्रवार को ही शाह से मीटिंग की टाइमिंग ने भी अटकलों का बाजार खासा गर्म रखा। हालांकि इन सभी अटकलों को रंधावा ने खारिज कर दिया है।

अब कांग्रेस हाईकमान का रुख अहम

कांग्रेस हाईकमान के पंजाब में पार्टी नेतृत्व को न बदलने के फैसले के बाद चन्नी ने कुछ विधायकों, पूर्व मंत्रियों और पूर्व विधायकों समेत 60 से अधिक नेताओं के साथ शक्ति प्रदर्शन कर हाईकमान को दबाव में लेने की कोशिश की है। 

हालांकि इसी मसले पर कांग्रेस हाईकमान ने पिछले दिनों पंजाब के वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं के साथ वन-टू-वन बैठक कर उन्हें नेतृत्व न बदलने के फैसले पर संतुष्ट किया था मगर उसके बावजूद बगावत हो गई। ऐसी स्थिति में अब कांग्रेस हाईकमान का रुख अहम होगा। यदि हाईकमान ने फैसला नहीं बदला तो चन्नी गुट के नेता बड़ा फैसला ले सकते हैं और ऐसे में भाजपा इस पूरे प्रकरण में अपना सियासी फायदा उठाने में चूकेगी नहीं।

हाईकमान पीछे नहीं हटेगा : वैद

पंजाब में 16 में से 5 विधायक ही पूर्व सीएम चन्नी की बैठक में पहुंचे। सात सांसदों में से चन्नी और वड़िंग को छोड़ दिया जाए तो अन्य पांच सांसदों ने भी इस बैठक से दूरी बनाए रखी। इसी तरह कई पूर्व विधायक और अन्य पूर्व मंत्री, सांसद व अन्य नेता भी चन्नी की बैठक में नहीं गए। इन सभी नेताओं का मौन हाईकमान के साथ खड़े रहने का इशारा कर रहा है। 

पंजाब कांग्रेस के एससी विंग के अध्यक्ष व पूर्व विधायक कुलदीप वैद कहते हैं कि यह घटनाक्रम बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। यदि किसी को हाईकमान के फैसले पर ऐतराज था तो केंद्रीय नेतृत्व से मिलकर वहां अपनी बात रखी जा सकती थी। चन्नी समेत अन्य वरिष्ठ नेताओं ने दिल्ली में तो फैसले पर सहमति जताई थी तो अब अचानक क्या हो गया। वैद कहते हैं कि इस पूरे प्रकरण में कौन, किसके लिए क्या रोल प्ले कर रहा है, हाईकमान सब जानता है। उनके अनुसार हाईकमान न तो कमजोर है न ही पीछे हटने वाला है। यह प्रेशर पाॅलिटिक्स उचित नहीं है।

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