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मानसून से पहले पंजाब अलर्ट: 2025 की बाढ़ से सबक, 109 बाढ़ संवेदनशील स्थान चिह्नित; बनाया विशेष एक्शन प्लान
Wed, 01 Jul 2026 12:38 PM IST
Nivedita
मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़
मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: Nivedita
Updated Wed, 01 Jul 2026 12:38 PM IST
सार
वर्ष 2025 की बाढ़ ने पंजाब में भारी तबाही मचाई थी। 54 से अधिक लोगों की मौत हुई थी। 1.74 लाख हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि प्रभावित हुई जबकि 1,400 से ज्यादा गांव जलमग्न हो गए थे। हजारों पशुधन बह गए और बड़ी संख्या में मकान क्षतिग्रस्त हुए।
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पंजाब में मानसून से पहले की तैयारी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
2025 की भीषण बाढ़ के बाद पंजाब सरकार ने इस बार मानसून से पहले व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। जल स्रोत विभाग ने राज्य में 109 बाढ़ संवेदनशील स्थानों की पहचान की है जहां से बाढ़ का खतरा सबसे अधिक है। इन स्थानों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। विभाग के अधिकारी अपनी टीमों के साथ तटबंधों का लगातार निरीक्षण कर रहे हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति से पहले जरूरी इंतजाम पूरे किए जा सकें।
सरकार का मुख्य फोकस तटबंधों को मजबूत करने और जल निकासी व्यवस्था सुधारने पर है। बाढ़ के दौरान जान-माल के नुकसान को कम करने के लिए राज्य के 850 में से 849 तटबंध अधिसूचित किए जा चुके हैं। शहरी और अर्धशहरी क्षेत्रों से गुजरने वाली बड़ी और छोटी ड्रेनों की सफाई और मरम्मत भी कराई जा रही है। आपात स्थिति से निपटने के लिए सीमेंट के खाली और भरे बैगों का भी पर्याप्त इंतजाम किया गया है।
जल स्रोत विभाग के अनुसार पंजाब में लगभग 939 किलोमीटर लंबाई तक नदियों का जाल और 8,100 किलोमीटर से अधिक का ड्रेनेज नेटवर्क है। इनमें से 915 किलोमीटर तटबंध मजबूत करने का लक्ष्य रखा गया है। विभिन्न जिलों में 223 करोड़ रुपये की लागत से बाढ़ सुरक्षा के 239 कार्य पूरे हो चुके हैं जबकि 536 कार्य अंतिम चरण में हैं। विभाग का कहना है कि 98 किलोमीटर तटबंधों को ऊंचा करने के लिए 36 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। दक्षिण-पश्चिम पंजाब में जलभराव की समस्या दूर करने के लिए भूमिगत जल निकासी कार्यों पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। वर्ष 2026-27 के लिए 30 करोड़ रुपये से अधिक लागत की 12 नई परियोजनाएं भी तैयार की गई हैं।
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सरकार का मुख्य फोकस तटबंधों को मजबूत करने और जल निकासी व्यवस्था सुधारने पर है। बाढ़ के दौरान जान-माल के नुकसान को कम करने के लिए राज्य के 850 में से 849 तटबंध अधिसूचित किए जा चुके हैं। शहरी और अर्धशहरी क्षेत्रों से गुजरने वाली बड़ी और छोटी ड्रेनों की सफाई और मरम्मत भी कराई जा रही है। आपात स्थिति से निपटने के लिए सीमेंट के खाली और भरे बैगों का भी पर्याप्त इंतजाम किया गया है।
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जल स्रोत विभाग के अनुसार पंजाब में लगभग 939 किलोमीटर लंबाई तक नदियों का जाल और 8,100 किलोमीटर से अधिक का ड्रेनेज नेटवर्क है। इनमें से 915 किलोमीटर तटबंध मजबूत करने का लक्ष्य रखा गया है। विभिन्न जिलों में 223 करोड़ रुपये की लागत से बाढ़ सुरक्षा के 239 कार्य पूरे हो चुके हैं जबकि 536 कार्य अंतिम चरण में हैं। विभाग का कहना है कि 98 किलोमीटर तटबंधों को ऊंचा करने के लिए 36 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। दक्षिण-पश्चिम पंजाब में जलभराव की समस्या दूर करने के लिए भूमिगत जल निकासी कार्यों पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। वर्ष 2026-27 के लिए 30 करोड़ रुपये से अधिक लागत की 12 नई परियोजनाएं भी तैयार की गई हैं।
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बाढ़ से बचाव का एक्शन प्लान
109 बाढ़ संवेदनशील स्थानों की पहचान कर विशेष निगरानी शुरू।915 किलोमीटर तटबंध मजबूत करने और 98 किलोमीटर तटबंध ऊंचे करने का लक्ष्य।
850 में से 849 तटबंध अधिसूचित।
223 करोड़ रुपये से 239 कार्य पूरे जबकि 536 कार्य प्रगति पर।
25 करोड़ रुपये से 384 नालों और 8 करोड़ रुपये से 210 नालियों की सफाई जारी।
2026-27 के लिए 30 करोड़ रुपये से अधिक लागत की 12 नई परियोजनाएं तैयार।
आपात स्थिति के लिए 8.76 लाख खाली और 2.77 लाख भरे सीमेंट बैग उपलब्ध।