सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Punjab ›   Chandigarh-Punjab News ›   Western command engages in indigenous drone manufacturing on Mission Mode

आर्मी का स्वदेशी मिशन: हर रेजिमेंट में बनेगी ड्रोन स्ट्राइक यूनिट, सेना की वर्कशॉप में तैयार होंगे हथियार

मोहित धुपड़, चंडीगढ़ Published by: Ankesh Kumar Updated Thu, 26 Mar 2026 06:18 AM IST
विज्ञापन
सार

सेना ने यह भी तय किया है कि ड्रोन के निर्माण के साथ-साथ उसमें इस्तेमाल होने वाला गोला-बारूद और हथियार भी सेना की अपनी कार्यशालाओं में ही तैयार किए जाएंगे। वेस्टर्न कमांड इस पूरे मिशन पर मिशन मोड में काम कर रही है।

Western command engages in indigenous drone manufacturing on Mission Mode
स्वदेशी ड्रोन को ऑपरेट करता भारतीय सेना का जवान। - फोटो : सेना
विज्ञापन

विस्तार

बदलते युद्ध के स्वरूप को देखते हुए भारतीय सेना अब ड्रोन युद्ध क्षमता को तेजी से मजबूत करने में जुट गई है। वेस्टर्न कमांड के अंतर्गत हर रेजिमेंट में ड्रोन युद्ध में कुशल विशेष टुकड़ियां तैयार की जाएंगी। इन टुकड़ियों को विशेष प्रशिक्षण देकर आधुनिक युद्ध के अनुरूप घातक बनाया जाएगा।

Trending Videos


सेना ने यह भी तय किया है कि ड्रोन के निर्माण के साथ-साथ उसमें इस्तेमाल होने वाला गोला-बारूद और हथियार भी सेना की अपनी कार्यशालाओं में ही तैयार किए जाएंगे। वेस्टर्न कमांड इस पूरे मिशन पर मिशन मोड में काम कर रही है, ताकि स्वदेशी स्तर पर एक मजबूत ड्रोन इकोसिस्टम विकसित किया जा सके।
विज्ञापन
विज्ञापन


अधिकारियों के अनुसार, मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों और युद्ध के बदलते तरीकों को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। इसी रणनीति के तहत कमांड अपने सबसे महत्वपूर्ण खड्गा कोर को ड्रोन हब के रूप में विकसित करने की दिशा में काम कर रही है। इसके साथ ही सभी रेजिमेंट में छोटी-छोटी विशेष टुकड़ियों का गठन किया जाएगा, जो ड्रोन ऑपरेशन और ड्रोन वारफेयर में विशेषज्ञ होंगी। इन टुकड़ियों को एक विशेष पहचान भी दी जाएगी।

Western command engages in indigenous drone manufacturing on Mission Mode
टारगेट को नेस्तनाबूत करता सेना का स्वदेशी ड्रोन - फोटो : सेना

जरूरत के अनुसार तैयार हो रहे ड्रोन
वेस्टर्न कमांड के एक सैन्य अधिकारी ने बताया कि बड़े स्तर पर स्वदेशी ड्रोन तैयार किए जा रहे हैं। ऑपरेशन सिंदूर के बाद से इस काम में तेजी आई है और अब तक रिकॉर्ड संख्या में ड्रोन बनाए जा चुके हैं। सेना की जरूरतों के अनुसार इन ड्रोन की डिजाइन और क्षमता तय की जा रही है।
ड्रोन की रेंज, पेलोड क्षमता, आकार और मिशन के अनुसार उनकी उपयोगिता को ध्यान में रखते हुए विभिन्न यूनिटों की कार्यशालाओं में तकनीकी विंग के अधिकारी और जवान इन्हें तैयार कर रहे हैं। खास बात यह है कि इन ड्रोन में लगाए जाने वाले हथियार और गोला-बारूद भी सेना खुद ही विकसित कर रही है, जिससे आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिल रहा है।

भविष्य के युद्ध में निर्णायक भूमिका
रक्षा विशेषज्ञ कर्नल हरबख्श सिंह के अनुसार, रूस-यूक्रेन युद्ध और ईरान-इस्राइल-अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने साफ कर दिया है कि आने वाले समय में ड्रोन और एंटी-ड्रोन तकनीक युद्ध के नतीजे तय करेंगे। ऐसे में स्वदेशी ड्रोन निर्माण पर जोर देना जरूरी और रणनीतिक रूप से बेहद अहम कदम है। उन्होंने कहा कि सेना का खुद ड्रोन निर्माण में जुटना न सिर्फ एक चुनौतीपूर्ण प्रयास है, बल्कि इससे देश की विदेशी निर्भरता भी कम होगी और रक्षा क्षमता में बड़ा इजाफा होगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed