पंजाब कांग्रेस में फिर दिखी गुटबाजी: रंधावा सुसाइड मामले में CBI जांच के लिए चार सांसद एकमत, तीन ने बनाई दूरी
पंजाब कांग्रेस में यह विवाद कोई नया नहीं है। प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के बीच मतभेद पहले ही सार्वजनिक हो चुके हैं। चन्नी ने पार्टी की आंतरिक बैठकों में यह मुद्दा उठाया था कि संगठन और विधायक दल जैसे महत्वपूर्ण पदों पर दलित नेतृत्व की अनदेखी हो रही है। इस बयान के बाद पार्टी में असहज स्थिति बन गई थी। यह मामला हाईकमान तक पहुंचा।
विस्तार
पंजाब कांग्रेस एक बार फिर अंदरूनी गुटबाजी को लेकर सुर्खियों में है। पंजाब स्टेट वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन के अधिकारी गगनदीप सिंह रंधावा की आत्महत्या के मामले में सीबीआई जांच की मांग को लेकर लिखे गए पत्र ने पार्टी के भीतर चल रही खींचतान को सामने ला दिया है।
चार सांसदों ने संयुक्त रूप से इस मांग का समर्थन किया, वहीं तीन अन्य सांसदों ने इससे दूरी बना ली है। पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष व सांसद राजा वड़िंग ने भी पत्र पर साइन नहीं किए।
चार सांसदों ने किए साइन, तीन ने नहीं
पंजाब से कांग्रेस के लोकसभा सांसद गुरजीत सिंह औजला, चरणजीत सिंह चन्नी, डॉ. धर्मवीर गांधी और सुखजिंदर सिंह रंधावा ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर रंधावा मामले की सीबीआई जांच की मांग की। सांसदों ने यह भी आग्रह किया कि जांच के दौरान आरोपियों को देश छोड़कर भागने से रोकने के लिए उनके खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी किया जाए।
वहीं पंजाब कांग्रेस के ही सांसद अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, अमर सिंह और शेर सिंह घुबाया ने इस पत्र पर हस्ताक्षर नहीं किए। इन नेताओं का अलग रुख पार्टी के भीतर मतभेदों की गहराई को दर्शाता है। राजनीतिक हलकों में इसे महज एक प्रशासनिक मुद्दा नहीं, बल्कि नेतृत्व की खींचतान और आपसी असहमति का परिणाम माना जा रहा है।
अमित शाह ने कहा था लिखित में दें तो सीबीआई जांच तुरंत
इस पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि में लोकसभा में दिया गया अमित शाह का बयान अहम है जिसमें उन्होंने कहा था कि यदि पंजाब के सांसद इस मामले में औपचारिक रूप से लिखित अनुरोध करेंगे तो केंद्र सरकार तुरंत सीबीआई जांच के आदेश दे सकती है। इसी आश्वासन के आधार पर चार सांसदों ने पहल की लेकिन सभी सांसदों का एकमत न होना इस मुद्दे को राजनीतिक रंग दे गया।
हाईकमान ने अनुशासनहीनता पर अपनाया था सख्त रुख
जनवरी 2026 में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने पंजाब के नेताओं को दिल्ली बुलाकर अनुशासनहीनता पर सख्त रुख अपनाया था। राहुल ने कहा था कि पार्टी के आंतरिक मामलों को सार्वजनिक करना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और सभी नेताओं को एकजुट होकर काम करना होगा। हालांकि, ताजा घटनाक्रम से साफ है कि यह चेतावनी ज्यादा असरदार साबित नहीं हुई।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री पद के संभावित चेहरों की होड़ ने गुटबाजी को और बढ़ा दिया है। चरणजीत सिंह चन्नी, प्रताप सिंह बाजवा, अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और सुखजिंदर रंधावा अपनी-अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने में जुटे हैं। यही वजह है कि छोटे-छोटे मुद्दे भी बड़े राजनीतिक संकेत बनकर उभर रहे हैं।