पंजाब में शिक्षा क्रांति: सीएम मान ने स्कूल ऑफ एमिनेंस का किया उद्घाटन, अभिभावकों से की ये अपील
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने अभिभावकों से बच्चों के रिपोर्ट कार्ड और पढ़ाई का लेखा-जोखा शिक्षकों से मांगने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, नींव की ईंट भले ही महंगी हो, लेकिन अगर वह मजबूत होगी तभी भविष्य की इमारत बुलंद बनेगी।
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लंबे इंतजार के बाद लुधियाना के किदवई नगर और मिलरगंज-ढोलेवाल में स्कूल ऑफ एमिनेंस छात्रों के लिए खुल गए हैं। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने दोनों परिसरों का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि इन संस्थानों की नींव बच्चों को हेल्थ सेक्टर, प्रशासनिक सेवाओं और सैन्य बलों में जाने जैसे लक्ष्यों को पूरा करने के लिए रखी गई है। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि 90 फीसदी बच्चों ने निजी स्कूलों को छोड़कर यहां दाखिला लिया है। पंजाब के सरकारी स्कूलों के शैक्षणिक स्तर में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। इस वर्ष प्रतियोगी परीक्षाओं (नीट व जेईई) में रिकॉर्ड 882 विद्यार्थियों ने सफलता हासिल की। पिछले सत्र में यह संख्या केवल 82 थी। किदवई नगर परिसर का उद्घाटन पहले टल गया था। अब बच्चे इन आधुनिक परिसरों में ज्ञान प्राप्त कर सकेंगे।
शिक्षा में नवाचार और सुविधाएं
यह पहल राज्य सरकार की शिक्षा व्यवस्था में सुधार की रणनीति का हिस्सा है। इन स्कूलों में तकनीकी कक्षाएं, उन्नत विज्ञान व कंप्यूटर प्रयोगशालाएं हैं। सीसीटीवी निगरानी और खेल मैदान भी बनाए गए हैं। पुरानी रट्टामार प्रणाली को छोड़कर प्रयोगात्मक शिक्षा पर जोर दिया जा रहा है। अध्यापकों को आधुनिक तकनीकों से प्रशिक्षित करने के लिए फिनलैंड और सिंगापुर भेजा जा रहा है। पंजाब 2022 में राष्ट्रीय शैक्षणिक पायदान पर 27वें नंबर पर था। अब यह केरल को पीछे छोड़कर देश में शीर्ष स्थान पर पहुंच गया है।
मुख्यमंत्री का संदेश और त्वरित कार्रवाई
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने अभिभावकों से बच्चों के रिपोर्ट कार्ड और पढ़ाई का लेखा-जोखा शिक्षकों से मांगने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, नींव की ईंट भले ही महंगी हो, लेकिन अगर वह मजबूत होगी तभी भविष्य की इमारत बुलंद बनेगी।" कार्यक्रम के दौरान एक बुजुर्ग ने विद्यालय परिसर के पास शराब के ठेके का मुद्दा उठाया। मुख्यमंत्री ने तुरंत संज्ञान लिया। उन्होंने 100 मीटर की परिधि में मदिरा बिक्री न होने के नियम के तहत ठेके को तुरंत स्थानांतरित करने का भरोसा दिया। मान ने पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम को उद्धृत करते हुए कहा, "विद्या उस शेरनी का दूध है, जिसे ग्रहण करने वाला हर शख्स अपने अधिकारों की खातिर दहाड़ना सीख जाता है।