{"_id":"622dda62d2b36b51ba537c82","slug":"loved-ones-did-not-adopt-by-joining-new-party-became-mla-ludhiana-news-pkl4445354128","type":"story","status":"publish","title_hn":"अपनों ने अपनाया नहीं, नई पार्टी में आए तो बने विधायक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अपनों ने अपनाया नहीं, नई पार्टी में आए तो बने विधायक
विज्ञापन
विज्ञापन
लुधियाना। पंजाब विधानसभा चुनाव में चली आप की आंधी के बीच महानगर की 13 सीटों पर आप ने अपना परचम तो लहरा दिया, लेकिन 13 सीटों में ज्यादातर विधायक वह बन पाए, जिन्हें अपनी रिवायती पार्टियों ने नहीं अपनाया, बल्कि नई पार्टी में जाते ही वह विधायक बन गए। 13 नए विधायकों में सात ऐसे शहरी विधायक हैं जो या तो कांग्रेस से आए हैं या फिर अकाली दल से आए हैं। इनमें से कई नेताओं ने अपनी पार्टी के नेतृत्व से टिकट की मांग की, लेकिन अपनी पार्टियों ने उनका सम्मान नहीं किया। जिस कारण मजबूरन उन्हें पार्टी छोड़नी पड़ी और आप में जाना पड़ा। जिसके बाद वहां जाते ही पार्टी ने सम्मान भी दिया और साथ में विधानसभा का टिकट भी दे दिया। चुनाव में लोगों ने एक मौका भी दे दिया और विधायक बना दिया। अब ये नेता तुरंत एक्शन मोड में है और इलाके के काम में जुट गए हैं।
सबसे पहले बात की जाए हलका पश्चिमी से गुरप्रीत सिंह बस्सी गोगी की। गोगी किसी समय पूर्व कैबिनेट मंत्री भारत भूषण आशु के नजदीकी साथियों में से एक थे। चार बार के पार्षद गुरप्रीत सिंह गोगी को कांग्रेस की कैप्टन सरकार में इंडस्ट्री की चेयरमैनी भी मिली, लेकिन भारत भूषण आशु के साथ उनका मनमुटाव होने लगा। दो साल से दोनों के बीच लगातार दूरियां बढ़ती ही चली गई। गोगी ने कांग्रेस पार्टी से हलका साउथ से टिकट की भी मांग की थी, लेकिन पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया। उधर आशु से दूरिया बढ़ते ही उन्होंने ठीक चुनाव से पहले आप ज्वाइन की और आप ने भी टिकट दे दी। विधानसभा चुनाव में मुकाबला किया और कांग्रेस के धुरंधर नेता कैबीनेट मंत्री भारत भूषण आशु को हरा विधायक बन गए।
हलका आत्म नगर से नए बने विधायक कुलवंत सिंह सिद्धू भी पुराने कांग्रेसी रहे हैं। उन्होंने बेटे को कांग्रेस के टिकट पर पार्षद का चुनाव भी लड़ाया, लेकिन वह हार गए। वह पिछले दो बार से कांग्रेस से हलका आत्म नगर से टिकट मांग रहे थे, लेकिन कांग्रेस नेतृत्व ने टिकट नहीं दिया। दाना मंडी में जैसे ही कमलजीत सिंह कड़वल को रैली में टिकट अनाउंस किया गई तो सिद्धू ने आप ज्वाइन कर ली। वहां से उन्हें आम आदमी पार्टी ने टिकट दिया। हलका आत्म नगर में पिछले दस साल से बैंस ब्रदर्स का कब्जा था। कोई भी नहीं सोच रहा था कि कुलवंत सिंह सिद्धू बैंस को हरा पाएंगे, लेकिन उन्होंने बैंस को सिर्फ हराया ही नहीं, उनका राजनीतिक कॅरिअर भी खत्म कर दिया।
हलका सेंट्रल से नए विधायक अशोक पराशर पप्पी कांग्रेस के विधायक रहे शहीद सतपाल पराशर के भाई हैं। उनके छोटे भाई करीब पांच बार से पार्षद रहे हैं। अशोक पराशर पप्पी 2012 में कांग्रेस के टिकट पर साउथ हलके से चुनाव लड़े थे, लेकिन हार गए थे। इसके बाद उन्होंने आप को ज्वाइन कर लिया, लेकिन 2017 विधानसभा चुनाव से पहले कैप्टन अमरिंदर सिंह उन्हें वापस ले आए। वह सेंट्रल हलके से टिकट की मांग कर रहे थे, लेकिन उन्हें पता चल चुका था कि कांग्रेस उन्हें कद्दावर नेता सुरिंदर डावर की जगह पर टिकट नहीं देगी। जिसके बाद उन्होंने फिर से आप ज्वाइन कर ली और आप की तरफ से उन्हें टिकट भी मिल गया। इसी दौरान उनके भाई पार्षद राकेश पराशर ने भी आप ज्वाइन कर लिया। इस बार वह कांग्रेस का किला भेदने में कामयाब रहे।
बग्गा पहले दो बार पार्षद रह चुके हैं
हलका उत्तरी से नए विधायक बने मदन लाल बग्गा पहले दो बार पार्षद रह चुके हैं। वह कांग्रेस और बाद में अकाली दल में शामिल हो गए थे। 2012 में वह आजाद के तौर पर विधानसभा चुनाव में उतर आए और वह हार गए। उसके बाद वह फिर एक बार 2017 में विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए आजाद उतर गए। फिर उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा। फिर अकाली दल ज्वाइन कर लिया, लेकिन इस बार करीब पांच महीने पहले आप ज्वाइन की और वहां से टिकट मिल गई। वह इस बार कांग्रेस के सात बार के विधायक पांडे को पराजित कर उन्होंने खुद विजय हासिल की।
मुंडियां ने भी कुछ दिन पहले ज्वाइन की थी पार्टी
हलका साहनेवाल की बात की जाए को कट्टर कांग्रेसी नेता हरदीप सिंह मुंडियां ने भी कुछ दिन पहले ही आप ज्वाइन की थी और इस बार वह अकाली दल के कद्दावर नेता और पूर्व मंत्री शरणजीत सिंह ढिल्लों को हराने में कामयाब रहे। हलका रायकोट की बात की जाए तो हाकम सिंह ठेकेदार कभी कट्टर कांग्रेसी थे, लेकिन वह टिकट की दावेदारी जता रहे थे। इस बार भी उन्हें कांग्रेस से टिकट नहीं मिल रही थी तो आप में चले गए। वहां से टिकट मिली और सांसद डॉ. अमर सिंह के बेटे कामिल बोपाराय को हराकर चुनाव जीता।
Trending Videos
सबसे पहले बात की जाए हलका पश्चिमी से गुरप्रीत सिंह बस्सी गोगी की। गोगी किसी समय पूर्व कैबिनेट मंत्री भारत भूषण आशु के नजदीकी साथियों में से एक थे। चार बार के पार्षद गुरप्रीत सिंह गोगी को कांग्रेस की कैप्टन सरकार में इंडस्ट्री की चेयरमैनी भी मिली, लेकिन भारत भूषण आशु के साथ उनका मनमुटाव होने लगा। दो साल से दोनों के बीच लगातार दूरियां बढ़ती ही चली गई। गोगी ने कांग्रेस पार्टी से हलका साउथ से टिकट की भी मांग की थी, लेकिन पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया। उधर आशु से दूरिया बढ़ते ही उन्होंने ठीक चुनाव से पहले आप ज्वाइन की और आप ने भी टिकट दे दी। विधानसभा चुनाव में मुकाबला किया और कांग्रेस के धुरंधर नेता कैबीनेट मंत्री भारत भूषण आशु को हरा विधायक बन गए।
विज्ञापन
विज्ञापन
हलका आत्म नगर से नए बने विधायक कुलवंत सिंह सिद्धू भी पुराने कांग्रेसी रहे हैं। उन्होंने बेटे को कांग्रेस के टिकट पर पार्षद का चुनाव भी लड़ाया, लेकिन वह हार गए। वह पिछले दो बार से कांग्रेस से हलका आत्म नगर से टिकट मांग रहे थे, लेकिन कांग्रेस नेतृत्व ने टिकट नहीं दिया। दाना मंडी में जैसे ही कमलजीत सिंह कड़वल को रैली में टिकट अनाउंस किया गई तो सिद्धू ने आप ज्वाइन कर ली। वहां से उन्हें आम आदमी पार्टी ने टिकट दिया। हलका आत्म नगर में पिछले दस साल से बैंस ब्रदर्स का कब्जा था। कोई भी नहीं सोच रहा था कि कुलवंत सिंह सिद्धू बैंस को हरा पाएंगे, लेकिन उन्होंने बैंस को सिर्फ हराया ही नहीं, उनका राजनीतिक कॅरिअर भी खत्म कर दिया।
हलका सेंट्रल से नए विधायक अशोक पराशर पप्पी कांग्रेस के विधायक रहे शहीद सतपाल पराशर के भाई हैं। उनके छोटे भाई करीब पांच बार से पार्षद रहे हैं। अशोक पराशर पप्पी 2012 में कांग्रेस के टिकट पर साउथ हलके से चुनाव लड़े थे, लेकिन हार गए थे। इसके बाद उन्होंने आप को ज्वाइन कर लिया, लेकिन 2017 विधानसभा चुनाव से पहले कैप्टन अमरिंदर सिंह उन्हें वापस ले आए। वह सेंट्रल हलके से टिकट की मांग कर रहे थे, लेकिन उन्हें पता चल चुका था कि कांग्रेस उन्हें कद्दावर नेता सुरिंदर डावर की जगह पर टिकट नहीं देगी। जिसके बाद उन्होंने फिर से आप ज्वाइन कर ली और आप की तरफ से उन्हें टिकट भी मिल गया। इसी दौरान उनके भाई पार्षद राकेश पराशर ने भी आप ज्वाइन कर लिया। इस बार वह कांग्रेस का किला भेदने में कामयाब रहे।
बग्गा पहले दो बार पार्षद रह चुके हैं
हलका उत्तरी से नए विधायक बने मदन लाल बग्गा पहले दो बार पार्षद रह चुके हैं। वह कांग्रेस और बाद में अकाली दल में शामिल हो गए थे। 2012 में वह आजाद के तौर पर विधानसभा चुनाव में उतर आए और वह हार गए। उसके बाद वह फिर एक बार 2017 में विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए आजाद उतर गए। फिर उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा। फिर अकाली दल ज्वाइन कर लिया, लेकिन इस बार करीब पांच महीने पहले आप ज्वाइन की और वहां से टिकट मिल गई। वह इस बार कांग्रेस के सात बार के विधायक पांडे को पराजित कर उन्होंने खुद विजय हासिल की।
मुंडियां ने भी कुछ दिन पहले ज्वाइन की थी पार्टी
हलका साहनेवाल की बात की जाए को कट्टर कांग्रेसी नेता हरदीप सिंह मुंडियां ने भी कुछ दिन पहले ही आप ज्वाइन की थी और इस बार वह अकाली दल के कद्दावर नेता और पूर्व मंत्री शरणजीत सिंह ढिल्लों को हराने में कामयाब रहे। हलका रायकोट की बात की जाए तो हाकम सिंह ठेकेदार कभी कट्टर कांग्रेसी थे, लेकिन वह टिकट की दावेदारी जता रहे थे। इस बार भी उन्हें कांग्रेस से टिकट नहीं मिल रही थी तो आप में चले गए। वहां से टिकट मिली और सांसद डॉ. अमर सिंह के बेटे कामिल बोपाराय को हराकर चुनाव जीता।