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Mohali News: मोहाली में 65 वर्षीय महिला से डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर 1.21 करोड़ रुपये की ठगी
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मोहाली। साइबर ठगों ने 65 वर्षीय महिला से डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर 1.21 करोड़ रुपये की ठगी कर ली। आरोपियों ने खुद को सरकारी अधिकारी बताकर महिला को यह डर दिया कि उसके नाम से मुंबई में खरीदा गया एक सिम कार्ड आतंकवादी गतिविधियों में इस्तेमाल हुआ है। महिला इस डर के कारण ठगों के झांसे में आ गई और उन्होंने जांच और ऑडिट के नाम पर उसे अलग-अलग किश्तों में बड़ी रकम अपने खाते में ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया।
महिला ने बताया कि 13 जनवरी को उसके पास एक अज्ञात नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को अमन कुमार, डाटा प्रोटेक्शन बोर्ड ऑफ इंडिया का सीनियर अधिकारी बताया और कहा कि उसके नाम से मुंबई में एक सिम कार्ड खरीदा गया है, जिसका आतंकवादी गतिविधियों में इस्तेमाल हुआ। यह सुनकर महिला घबरा गई। इसके बाद कॉलर ने महिला को अपने कथित सीनियर अधिकारी से भी बात करवाई, जिसने कहा कि जांच एजेंसियों ने उसे डिजिटल अरेस्ट कर लिया है। अगर वह गिरफ्तारी से बचना चाहती है तो उसे तुरंत जांच में सहयोग करना होगा।
आरोपियों ने महिला को लगातार फोन पर रखा और उसके बैंक खातों की पूरी जानकारी ले ली। जांच और ऑडिट के नाम पर महिला को भरोसा दिलाया गया कि खातों में मौजूद राशि की जांच करनी है और पैसे उनके बताए बैंक खाते में ट्रांसफर करने होंगे। ठगों ने यह भी कहा कि जांच पूरी होने के 24 घंटे के भीतर पैसे वापस कर दिए जाएंगे। ठगों की बातों में आकर महिला ने पहले करीब 20 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। इसके बाद उसने अपने दूसरे बैंक खाते से लगभग 1.01 करोड़ रुपये उसी खाते में भेज दिए। इसके बावजूद आरोपियों ने महिला पर और पैसे भेजने का दबाव बनाना जारी रखा। लगातार पैसे मांगने पर महिला को शक हुआ कि उसके साथ ठगी हो रही है।
महिला ने तुरंत साइबर क्राइम पुलिस मोहाली को शिकायत दी। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि शिकायत के आधार पर अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। अब बैंक खातों और कॉल डिटेल की जांच की जा रही है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अज्ञात कॉल या संदेश पर व्यक्तिगत बैंक और पहचान संबंधी जानकारी साझा न करें। यह घटना साइबर ठगों की नवीन तकनीक से की जाने वाली धोखाधड़ी का एक उदाहरण है, जिसमें डर और मानसिक दबाव के जरिए बड़ी रकम ठगी जाती है। यह मामला लोगों के लिए चेतावनी है कि डिजिटल सुरक्षा और बैंकिंग लेन-देन में सतर्क रहना कितना जरूरी है।
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महिला ने बताया कि 13 जनवरी को उसके पास एक अज्ञात नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को अमन कुमार, डाटा प्रोटेक्शन बोर्ड ऑफ इंडिया का सीनियर अधिकारी बताया और कहा कि उसके नाम से मुंबई में एक सिम कार्ड खरीदा गया है, जिसका आतंकवादी गतिविधियों में इस्तेमाल हुआ। यह सुनकर महिला घबरा गई। इसके बाद कॉलर ने महिला को अपने कथित सीनियर अधिकारी से भी बात करवाई, जिसने कहा कि जांच एजेंसियों ने उसे डिजिटल अरेस्ट कर लिया है। अगर वह गिरफ्तारी से बचना चाहती है तो उसे तुरंत जांच में सहयोग करना होगा।
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आरोपियों ने महिला को लगातार फोन पर रखा और उसके बैंक खातों की पूरी जानकारी ले ली। जांच और ऑडिट के नाम पर महिला को भरोसा दिलाया गया कि खातों में मौजूद राशि की जांच करनी है और पैसे उनके बताए बैंक खाते में ट्रांसफर करने होंगे। ठगों ने यह भी कहा कि जांच पूरी होने के 24 घंटे के भीतर पैसे वापस कर दिए जाएंगे। ठगों की बातों में आकर महिला ने पहले करीब 20 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। इसके बाद उसने अपने दूसरे बैंक खाते से लगभग 1.01 करोड़ रुपये उसी खाते में भेज दिए। इसके बावजूद आरोपियों ने महिला पर और पैसे भेजने का दबाव बनाना जारी रखा। लगातार पैसे मांगने पर महिला को शक हुआ कि उसके साथ ठगी हो रही है।
महिला ने तुरंत साइबर क्राइम पुलिस मोहाली को शिकायत दी। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि शिकायत के आधार पर अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। अब बैंक खातों और कॉल डिटेल की जांच की जा रही है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अज्ञात कॉल या संदेश पर व्यक्तिगत बैंक और पहचान संबंधी जानकारी साझा न करें। यह घटना साइबर ठगों की नवीन तकनीक से की जाने वाली धोखाधड़ी का एक उदाहरण है, जिसमें डर और मानसिक दबाव के जरिए बड़ी रकम ठगी जाती है। यह मामला लोगों के लिए चेतावनी है कि डिजिटल सुरक्षा और बैंकिंग लेन-देन में सतर्क रहना कितना जरूरी है।