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Mohali News: मोहाली की 20 सड़कों का रखरखाव हिसार की कंपनी करेगी
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मोहाली। शहर की 20 प्रमुख सड़कों के रखरखाव और प्रबंधन का जिम्मा अब हरियाणा के हिसार की एक निजी कंपनी को सौंप दिया गया है। कैबिनेट मंत्री हरदीप सिंह मुंडियां ने गमाडा कार्यालय में हुई उच्चस्तरीय बैठक के बाद गावर कंपनी को यह ठेका देने की मंजूरी दी।
विभागीय सूत्रों के अनुसार यह अनुबंध 10 वर्षों की अवधि के लिए किया गया है। इसके तहत कंपनी सड़कों की मरम्मत, गड्ढों की भराई, नियमित रखरखाव और सड़क किनारे बुनियादी ढांचे की देखरेख जैसे कार्य करेगी। यह टेंडर शुरू से ही विवादों में रहा है।
गमाडा कांट्रैक्टर्स एसोसिएशन समेत अन्य पक्षों ने इस मामले को हाईकोर्ट में चुनौती दे रखी है। अगली सुनवाई 21 सितंबर को निर्धारित है। अदालत ने अपने पूर्व आदेश में स्पष्ट किया था कि यदि किसी कार्य का आवंटन किया जाता है तो उसकी वैधता अंतिम निर्णय पर निर्भर करेगी और वर्तमान में दिए गए सभी ठेके अस्थायी माने जाएंगे। ऐसे में टेंडर आवंटन के फैसले पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
विपक्ष ने इस निर्णय के समय को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। विधान सभा सदन समाप्त होने के एक सप्ताह के भीतर इतने बड़े और दीर्घकालिक प्रोजेक्ट को मंजूरी देने को लेकर मिलीभगत के आरोप लगाए जा रहे हैं। विपक्षी नेताओं का कहना है कि इस तरह के प्रोजेक्ट पर विस्तृत चर्चा और पारदर्शिता जरूरी होती है, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की वित्तीय या प्रशासनिक समस्या न आए। परियोजना की लागत और भुगतान की शर्तें भी चर्चा का विषय बनी हुई है। करीब 674 करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट में से लगभग 40 प्रतिशत राशि कंपनी को शुरुआती चरण में ही जारी कर दी जाएगी, जबकि शेष राशि विभाग द्वारा तय अवधि में किस्तों के रूप में दी जाएगी।
इन किस्तों पर ब्याज भी जोड़ा जाएगा। इसके अलावा महंगाई के आधार पर अतिरिक्त भुगतान का प्रावधान भी रखा गया है। विभागीय अनुमान के अनुसार इन सभी पहलुओं को जोड़ने पर परियोजना की कुल लागत करीब 933 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है।
प्रशासन का दावा है कि सभी नियमों का पालन करते हुए यह निर्णय लिया गया है और इससे शहर की सड़कों की गुणवत्ता में सुधार होगा। वहीं, विपक्ष इसे जल्दबाजी में लिया गया और वित्तीय रूप से भारी निर्णय बताते हुए जांच की मांग कर रहा है। आने वाले दिनों में यह मामला और तूल पकड़ सकता है।
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विभागीय सूत्रों के अनुसार यह अनुबंध 10 वर्षों की अवधि के लिए किया गया है। इसके तहत कंपनी सड़कों की मरम्मत, गड्ढों की भराई, नियमित रखरखाव और सड़क किनारे बुनियादी ढांचे की देखरेख जैसे कार्य करेगी। यह टेंडर शुरू से ही विवादों में रहा है।
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गमाडा कांट्रैक्टर्स एसोसिएशन समेत अन्य पक्षों ने इस मामले को हाईकोर्ट में चुनौती दे रखी है। अगली सुनवाई 21 सितंबर को निर्धारित है। अदालत ने अपने पूर्व आदेश में स्पष्ट किया था कि यदि किसी कार्य का आवंटन किया जाता है तो उसकी वैधता अंतिम निर्णय पर निर्भर करेगी और वर्तमान में दिए गए सभी ठेके अस्थायी माने जाएंगे। ऐसे में टेंडर आवंटन के फैसले पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
विपक्ष ने इस निर्णय के समय को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। विधान सभा सदन समाप्त होने के एक सप्ताह के भीतर इतने बड़े और दीर्घकालिक प्रोजेक्ट को मंजूरी देने को लेकर मिलीभगत के आरोप लगाए जा रहे हैं। विपक्षी नेताओं का कहना है कि इस तरह के प्रोजेक्ट पर विस्तृत चर्चा और पारदर्शिता जरूरी होती है, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की वित्तीय या प्रशासनिक समस्या न आए। परियोजना की लागत और भुगतान की शर्तें भी चर्चा का विषय बनी हुई है। करीब 674 करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट में से लगभग 40 प्रतिशत राशि कंपनी को शुरुआती चरण में ही जारी कर दी जाएगी, जबकि शेष राशि विभाग द्वारा तय अवधि में किस्तों के रूप में दी जाएगी।
इन किस्तों पर ब्याज भी जोड़ा जाएगा। इसके अलावा महंगाई के आधार पर अतिरिक्त भुगतान का प्रावधान भी रखा गया है। विभागीय अनुमान के अनुसार इन सभी पहलुओं को जोड़ने पर परियोजना की कुल लागत करीब 933 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है।
प्रशासन का दावा है कि सभी नियमों का पालन करते हुए यह निर्णय लिया गया है और इससे शहर की सड़कों की गुणवत्ता में सुधार होगा। वहीं, विपक्ष इसे जल्दबाजी में लिया गया और वित्तीय रूप से भारी निर्णय बताते हुए जांच की मांग कर रहा है। आने वाले दिनों में यह मामला और तूल पकड़ सकता है।
