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Mohali News: जीनोमिक तकनीक से ऑटिज्म की गहराई तक पहुंचेगा एम्स मोहाली
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मोहाली। डॉ. बीआर आंबेडकर स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एम्स) मोहाली ने स्वास्थ्य अनुसंधान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। संस्थान ने ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (एएसडी) को समझने के लिए एक बड़ी जीनोमिक स्टडी शुरू की है। इस परियोजना का नाम जीनोमिक एंड मॉलिक्यूलर कैरेक्टराइजेशन ऑफ ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर है। इसका मुख्य उद्देश्य उत्तर भारत में ऑटिज्म के आनुवंशिक कारणों की पहचान करना है।
250 से 350 बच्चों पर किया जाएगा शोध
ऑटिज्म एक तेजी से बढ़ती न्यूरोडेवलपमेंटल समस्या है, जो हर 68 में से एक बच्चे को प्रभावित करती है। भारत में इसके प्रभावित बच्चों की दर लगभग 0.9 से 1.5 प्रतिशत के बीच मानी जाती है, लेकिन क्षेत्रीय स्तर पर इसके जेनेटिक कारणों पर पर्याप्त जानकारी नहीं है। इस परियोजना को पंजाब सरकार द्वारा 1 करोड़ रुपये की ग्रांट दी गई है और इसे एम्स मोहाली की पूर्व निदेशक-प्रिंसिपल डॉ. भवनीत भारती के नेतृत्व में शुरू किया गया है। इस अध्ययन में 2 से 18 वर्ष तक के 250 से 350 बच्चों और उनके माता-पिता (कुल 750 से 1050 सैंपल) को शामिल किया जाएगा। इसमें आधुनिक तकनीकों जैसे होल एक्सोम सीक्वेंसिंग और क्रोमोसोमल माइक्रोए एनालिसिस का उपयोग किया जाएगा। इस शोध का उद्देश्य ऑटिज्म से जुड़े जीन वेरिएंट्स की पहचान करना, उनके लक्षणों से संबंध समझना और यह पता लगाना है कि यह बीमारी पारिवारिक है या नई उत्पत्ति (डी नोवो) से जुड़ी है।
पंजाब ऑटिज्म जीनोमिक डेटाबेस की स्थापना
इस शोध से पंजाब ऑटिज्म जीनोमिक डेटाबेस तैयार किया जाएगा। जो भविष्य के शोध और इलाज में मददगार होगा। तीन वर्षों तक चलने वाली इस परियोजना से न केवल ऑटिज्म की शुरुआती और सटीक पहचान संभव होगी, बल्कि मरीजों के लिए बेहतर इलाज और काउंसलिंग की दिशा में भी नई संभावनाएं खुलेंगी। डॉ. नवदीप सिंह सैनी, निदेशक-प्रिंसिपल ने सभी शोधकर्ताओं के योगदान की सराहना की और इस परियोजना की महत्ता को भी बताया।
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250 से 350 बच्चों पर किया जाएगा शोध
ऑटिज्म एक तेजी से बढ़ती न्यूरोडेवलपमेंटल समस्या है, जो हर 68 में से एक बच्चे को प्रभावित करती है। भारत में इसके प्रभावित बच्चों की दर लगभग 0.9 से 1.5 प्रतिशत के बीच मानी जाती है, लेकिन क्षेत्रीय स्तर पर इसके जेनेटिक कारणों पर पर्याप्त जानकारी नहीं है। इस परियोजना को पंजाब सरकार द्वारा 1 करोड़ रुपये की ग्रांट दी गई है और इसे एम्स मोहाली की पूर्व निदेशक-प्रिंसिपल डॉ. भवनीत भारती के नेतृत्व में शुरू किया गया है। इस अध्ययन में 2 से 18 वर्ष तक के 250 से 350 बच्चों और उनके माता-पिता (कुल 750 से 1050 सैंपल) को शामिल किया जाएगा। इसमें आधुनिक तकनीकों जैसे होल एक्सोम सीक्वेंसिंग और क्रोमोसोमल माइक्रोए एनालिसिस का उपयोग किया जाएगा। इस शोध का उद्देश्य ऑटिज्म से जुड़े जीन वेरिएंट्स की पहचान करना, उनके लक्षणों से संबंध समझना और यह पता लगाना है कि यह बीमारी पारिवारिक है या नई उत्पत्ति (डी नोवो) से जुड़ी है।
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पंजाब ऑटिज्म जीनोमिक डेटाबेस की स्थापना
इस शोध से पंजाब ऑटिज्म जीनोमिक डेटाबेस तैयार किया जाएगा। जो भविष्य के शोध और इलाज में मददगार होगा। तीन वर्षों तक चलने वाली इस परियोजना से न केवल ऑटिज्म की शुरुआती और सटीक पहचान संभव होगी, बल्कि मरीजों के लिए बेहतर इलाज और काउंसलिंग की दिशा में भी नई संभावनाएं खुलेंगी। डॉ. नवदीप सिंह सैनी, निदेशक-प्रिंसिपल ने सभी शोधकर्ताओं के योगदान की सराहना की और इस परियोजना की महत्ता को भी बताया।