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Mohali News: 10 लाख रुपये रिश्वत मामले में सीजीएसटी सहायक आयुक्त के खिलाफ चार्जशीट दाखिल
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मोहाली। पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने सीजीएसटी जालंधर के सहायक आयुक्त रविंदर कुमार शर्मा के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। यह चार्जशीट 10 लाख रुपये रिश्वत लेने के मामले में मोहाली की अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत में दायर की गई है। इस मामले में सह-आरोपी चार्टर्ड अकाउंटेंट गुरसेवक सिंह के खिलाफ पहले ही आरोपपत्र दाखिल हो चुका है।
यह मामला जालंधर निवासी कारोबारी अनीश गांधी की शिकायत पर दर्ज किया गया था। गांधी डीआर मेटल्स नाम से पीतल का कारोबार करते हैं। 22 अप्रैल 2025 को सहायक आयुक्त शर्मा ने उनकी फर्म और फैक्ट्री पर छापेमारी की थी। यह छापेमारी जीएसटी एवं आईटीसी धोखाधड़ी से संबंधित जांच के तहत हुई थी। 24 अप्रैल 2025 को शर्मा ने गांधी से मुलाकात की। अधिकारी ने उनकी कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने की धमकी दी। कार्रवाई से बचाने के बदले 30 लाख रुपये की रिश्वत मांगी। आरोपी अधिकारी ने गांधी को सीए गुरसेवक सिंह से संपर्क करने के लिए कहा।
रिश्वत की मांग और रिकॉर्डिंग
अनीश गांधी का आरोप है कि गुरसेवक सिंह ने उन्हें बताया कि काम करवाने के लिए 30 लाख रुपये तीन किस्तों में देने होंगे। शिकायतकर्ता ने 2 मई 2025 को सहायक आयुक्त से हुई बातचीत रिकॉर्ड कर ली। इसमें उसने सात लाख रुपये का इंतजाम होने की बात कही थी। इसके अलावा 27 मई को सीए के साथ हुई बातचीत भी रिकॉर्ड कर विजिलेंस को सौंप दी गई।
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सीए रंगे हाथ गिरफ्तार, फिर चार्जशीट
विजिलेंस ने शिकायत की जांच के बाद दो सरकारी गवाह नियुक्त किए। शिकायतकर्ता द्वारा उपलब्ध कराए गए 10 लाख रुपये के नोटों पर विशेष पाउडर लगाया गया। 30 मई 2025 को सीए गुरसेवक सिंह को 10 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया। इसके बाद सहायक आयुक्त रविंदर कुमार शर्मा और सीए गुरसेवक सिंह के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया। अब जांच पूरी होने के बाद सहायक आयुक्त रविंदर कुमार शर्मा के खिलाफ भी अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी गई है।
यह मामला जालंधर निवासी कारोबारी अनीश गांधी की शिकायत पर दर्ज किया गया था। गांधी डीआर मेटल्स नाम से पीतल का कारोबार करते हैं। 22 अप्रैल 2025 को सहायक आयुक्त शर्मा ने उनकी फर्म और फैक्ट्री पर छापेमारी की थी। यह छापेमारी जीएसटी एवं आईटीसी धोखाधड़ी से संबंधित जांच के तहत हुई थी। 24 अप्रैल 2025 को शर्मा ने गांधी से मुलाकात की। अधिकारी ने उनकी कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने की धमकी दी। कार्रवाई से बचाने के बदले 30 लाख रुपये की रिश्वत मांगी। आरोपी अधिकारी ने गांधी को सीए गुरसेवक सिंह से संपर्क करने के लिए कहा।
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रिश्वत की मांग और रिकॉर्डिंग
अनीश गांधी का आरोप है कि गुरसेवक सिंह ने उन्हें बताया कि काम करवाने के लिए 30 लाख रुपये तीन किस्तों में देने होंगे। शिकायतकर्ता ने 2 मई 2025 को सहायक आयुक्त से हुई बातचीत रिकॉर्ड कर ली। इसमें उसने सात लाख रुपये का इंतजाम होने की बात कही थी। इसके अलावा 27 मई को सीए के साथ हुई बातचीत भी रिकॉर्ड कर विजिलेंस को सौंप दी गई।
सीए रंगे हाथ गिरफ्तार, फिर चार्जशीट
विजिलेंस ने शिकायत की जांच के बाद दो सरकारी गवाह नियुक्त किए। शिकायतकर्ता द्वारा उपलब्ध कराए गए 10 लाख रुपये के नोटों पर विशेष पाउडर लगाया गया। 30 मई 2025 को सीए गुरसेवक सिंह को 10 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया। इसके बाद सहायक आयुक्त रविंदर कुमार शर्मा और सीए गुरसेवक सिंह के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया। अब जांच पूरी होने के बाद सहायक आयुक्त रविंदर कुमार शर्मा के खिलाफ भी अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी गई है।