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Mohali News: शिमला में प्रॉपर्टी दिलाने के नाम पर नौ करोड़ ठगने वाला दंपती गिरफ्तार
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मोहाली। शिमला में प्रॉपर्टी दिलाने के नाम पर नौ करोड़ रुपये की ठगी करने वाले दंपती को मोहाली पुलिस ने हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले से गिरफ्तार कर लिया है। आरोपियों की पहचान प्रदीप कुमार और उसकी पत्नी वृंदा निवासी गांव जोरना, तहसील चौपाल, जिला शिमला के रूप में हुई है। पुलिस का कहना है कि मामले में अन्य आरोपियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। फिलहाल दोनों आरोपियों को अदालत में पेश कर पुलिस ने पांच दिन के रिमांड पर लिया है। यह मामला सेक्टर-68 निवासी कारोबारी संदीप कुमार की शिकायत पर दर्ज किया गया था। पुलिस जांच के अनुसार, शिकायतकर्ता की प्रदीप कुमार से दोस्ती के माध्यम से पहचान हुई थी। आरोप है कि प्रदीप ने मोहाली के फेज-9 स्थित कोठी नंबर-1201 में 50 फीसदी हिस्सेदारी अपने नाम कराने के बदले शिमला के राजगढ़ और कंडाघाट क्षेत्र में अपनी करीब 72 बीघा जमीन शिकायतकर्ता के नाम कराने का वादा किया था। इसी आधार पर 27 मई 2024 को दोनों पक्षों के बीच समझौता ज्ञापन भी किया गया।
जमीन नहीं दी, रकम भी नहीं लौटाई
शिकायत के अनुसार, 4 जुलाई 2024 को कोठी की 50 फीसदी रजिस्ट्री प्रदीप कुमार के नाम कर दी गई, लेकिन उसने वादे के मुताबिक जमीन की रजिस्ट्री नहीं करवाई। आरोप है कि बाद में उसने कोठी वापस करने की शर्त पर शिकायतकर्ता पर अपनी जमीन खरीदने का दबाव बनाया। इस दौरान अपने और रिश्तेदारों के खातों में करीब 4.28 करोड़ रुपये भी ट्रांसफर करवा लिए। इसके बावजूद न तो जमीन की रजिस्ट्री की गई और न ही कोठी का हिस्सा वापस किया गया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि कुल मिलाकर करीब नौ करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की गई।
गिरोह के अन्य सदस्यों की भूमिका की जांच
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि प्रदीप कुमार ने पहले शिकायतकर्ता के पक्ष में जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी बनाई, लेकिन बाद में उसे भी रद्द कर दिया। जांच के दौरान आरोपी, उसकी पत्नी वृंदा और पिता गोपाल सिंह को कई बार नोटिस भेजे गए। उन्हें मोबाइल फोन और व्हाट्सएप के माध्यम से जांच में शामिल होने के लिए बुलाया गया, लेकिन वे पेश नहीं हुए। डीएसपी (जांच) की रिपोर्ट के आधार पर थाना फेज-8 पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 316(2), 318(4) और 61(2) के तहत मामला दर्ज किया था। प्रारंभिक जांच में यह आशंका भी जताई गई है कि यह गिरोह अन्य लोगों के साथ भी इसी तरह की धोखाधड़ी कर चुका है। आरोपी गोपाल सिंह को भी मामले में नामजद किया गया है।
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जमीन नहीं दी, रकम भी नहीं लौटाई
शिकायत के अनुसार, 4 जुलाई 2024 को कोठी की 50 फीसदी रजिस्ट्री प्रदीप कुमार के नाम कर दी गई, लेकिन उसने वादे के मुताबिक जमीन की रजिस्ट्री नहीं करवाई। आरोप है कि बाद में उसने कोठी वापस करने की शर्त पर शिकायतकर्ता पर अपनी जमीन खरीदने का दबाव बनाया। इस दौरान अपने और रिश्तेदारों के खातों में करीब 4.28 करोड़ रुपये भी ट्रांसफर करवा लिए। इसके बावजूद न तो जमीन की रजिस्ट्री की गई और न ही कोठी का हिस्सा वापस किया गया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि कुल मिलाकर करीब नौ करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की गई।
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गिरोह के अन्य सदस्यों की भूमिका की जांच
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि प्रदीप कुमार ने पहले शिकायतकर्ता के पक्ष में जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी बनाई, लेकिन बाद में उसे भी रद्द कर दिया। जांच के दौरान आरोपी, उसकी पत्नी वृंदा और पिता गोपाल सिंह को कई बार नोटिस भेजे गए। उन्हें मोबाइल फोन और व्हाट्सएप के माध्यम से जांच में शामिल होने के लिए बुलाया गया, लेकिन वे पेश नहीं हुए। डीएसपी (जांच) की रिपोर्ट के आधार पर थाना फेज-8 पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 316(2), 318(4) और 61(2) के तहत मामला दर्ज किया था। प्रारंभिक जांच में यह आशंका भी जताई गई है कि यह गिरोह अन्य लोगों के साथ भी इसी तरह की धोखाधड़ी कर चुका है। आरोपी गोपाल सिंह को भी मामले में नामजद किया गया है।
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