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Mohali News: नयागांव नगर परिषद में 42 दिन बाद सत्ता की तस्वीर होगी साफ, अध्यक्ष-उपाध्यक्ष चुनाव पर नजर

Fri, 10 Jul 2026 02:47 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 10 Jul 2026 02:47 AM IST
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The picture regarding power in the Nayagaon Municipal Council will become clear after 42 days; all eyes are on the election for the President and Vice-President
नयागांव। करीब 42 दिन तक चली राजनीतिक खींचतान और कानूनी प्रक्रिया के बाद आखिरकार शुक्रवार, 10 जुलाई को नयागांव नगर परिषद की पहली विशेष बैठक आयोजित होने जा रही है। इस बैठक में नवनिर्वाचित 21 पार्षदों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई जाएगी। इसके साथ ही नगर परिषद के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया भी पूरी किए जाने की संभावना है। लंबे समय से अटकी इस बैठक को लेकर राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है, क्योंकि इसके बाद नयागांव की स्थानीय सरकार का नेतृत्व पूरी तरह स्पष्ट हो जाएगा।
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एसडीएम खरड़ द्वारा जारी आदेश के अनुसार, राज्य चुनाव आयोग के निर्देशों के तहत 10 जुलाई को दोपहर 2 बजे नगर परिषद कार्यालय में विशेष बैठक बुलाई गई है। कार्यकारी अधिकारी को सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने तथा सभी नवनिर्वाचित पार्षदों की समय पर उपस्थिति सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए गए हैं।
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संख्या बल और राजनीतिक गतिविधियां

इस बार नगर परिषद के 21 निर्वाचित सदस्यों में भारतीय जनता पार्टी के 16, तीन निर्दलीय, एक कांग्रेस और एक आम आदमी पार्टी का पार्षद शामिल है। संख्या बल के लिहाज से भाजपा स्पष्ट रूप से सबसे मजबूत स्थिति में दिखाई दे रही है। हालांकि, अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव तक राजनीतिक गतिविधियां जारी रहने की संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता।
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राजनीतिक जानकारों का कहना है कि चुनाव परिणाम आने के बाद करीब 42 दिनों तक नगर परिषद की पहली बैठक नहीं हो सकी। विपक्षी दलों और स्थानीय नेताओं का आरोप रहा कि सत्ताधारी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने के कारण जानबूझकर शपथ ग्रहण और अध्यक्ष पद के चुनाव में देरी की गई। इस बीच मामला अदालत तक पहुंचा, जिसके बाद उच्च न्यायालय के निर्देशों के पश्चात अब विशेष बैठक आयोजित की जा रही है। प्रशासन की ओर से देरी को लेकर कोई आधिकारिक राजनीतिक कारण नहीं बताया गया है, लेकिन अदालत के आदेश के बाद बैठक बुलाए जाने से इस पूरे घटनाक्रम ने राजनीतिक रंग ले लिया है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव में क्या निर्विरोध सहमति बनती है या फिर मतदान की नौबत आती है।
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