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Mohali News: मोहाली समेत पंजाब में पहली बार पीपीपी मॉडल पर बनेंगे ईडब्ल्यूएस मकान, हजारों को मिलेगा सस्ता घर
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मोहाली। पंजाब में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के लोगों को सस्ते आवास उपलब्ध कराने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। राज्य में पहली बार पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल के तहत ईडब्ल्यूएस मकानों का निर्माण किया जाएगा। इस योजना की शुरुआत पायलट प्रोजेक्ट के रूप में होगी, जिसे बाद में अन्य क्षेत्रों में भी लागू किया जा सकता है। यह कदम वर्षों से सस्ते आवास का इंतजार कर रहे हजारों परिवारों को राहत देगा।
पंजाब अर्बन प्लानिंग एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (पुडा) और उसकी सभी छह विकास अथॉरिटियां इस परियोजना का नेतृत्व कर रही हैं। इनमें गमाडा, ग्लाडा, जेडीए, बीडीए, पीडीए और एडीए विकास प्राधिकरण शामिल हैं। इन एजेंसियों ने इस परियोजना के लिए एक ट्रांजेक्शन एडवाइजर नियुक्त किया है। यह एजेंसी पूरे पंजाब में उपयुक्त स्थानों की पहचान करेगी, जहां ईडब्ल्यूएस आवासीय परियोजनाएं विकसित की जा सकें। स्थानों की पहचान होने के बाद, संबंधित विकास प्राधिकरण निजी बिल्डरों के साथ साझेदारी कर मकानों का निर्माण करेंगे। अधिकारियों का मानना है कि पीपीपी मॉडल अपनाने से परियोजनाओं के निर्माण में तेजी आएगी। इससे लोगों को कम समय में आवास उपलब्ध हो सकेंगे। साथ ही, सरकारी एजेंसियों पर वित्तीय बोझ भी कम होगा। पुडा के मुख्य अभियंता और इस योजना के नोडल अधिकारी अनुज सहगल ने बताया कि प्रक्रिया चल रही है। उन्होंने कहा कि ट्रांजेक्शन एडवाइजर की नियुक्ति के बाद पंजाब के विभिन्न शहरों में जगह की पहचान की जाएगी, जिसके बाद काम शुरू होगा। संवाद
जमीनों की पहचान और परियोजना का क्रियान्वयन
ईडब्ल्यूएस मकानों के निर्माण से पहले पूरे पंजाब में उपयुक्त जमीनों की पहचान की जाएगी। इसके लिए पुडा और उसकी छह विकास अथॉरिटियां ने ट्रांजेक्शन एडवाइजर नियुक्त किया है। यह एजेंसी विभिन्न शहरों और विकास क्षेत्रों का सर्वेक्षण करेगी। इसका उद्देश्य ऐसी जमीनों का चयन करना है जहां आवासीय परियोजनाएं विकसित की जा सकें। जमीनों की उपलब्धता, बुनियादी सुविधाओं और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर एक रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इस रिपोर्ट के आधार पर निजी डेवलपर्स के साथ मिलकर परियोजनाओं को आगे बढ़ाया जाएगा। यह सुनिश्चित करेगा कि आवास सही स्थानों पर और उचित योजना के साथ बनें।
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हजारों परिवारों का लंबा इंतजार खत्म
पंजाब में पिछले कई वर्षों से आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के हजारों लोग ईडब्ल्यूएस मकानों की नई योजनाओं का इंतजार कर रहे हैं। विभिन्न शहरों में पहले शुरू की गई आवास योजनाओं की संख्या सीमित थी। बढ़ती मांग के कारण बड़ी संख्या में पात्र परिवार अभी भी अपने घर के सपने को पूरा नहीं कर सके हैं। बढ़ती जमीन कीमतों और निर्माण लागत के कारण निजी स्तर पर घर खरीदना भी उनके लिए मुश्किल हो गया है। ऐसे में पीपीपी मॉडल के तहत प्रस्तावित नई आवास योजना से लोगों को राहत मिल सकती है। यह पहल आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों को अपने घर का सपना पूरा करने का अवसर देगी। इससे किफायती आवास की उपलब्धता बढ़ने की उम्मीद है।
पीपीपी मॉडल के लाभ
पीपीपी मॉडल को अपनाने से परियोजनाओं के निर्माण में महत्वपूर्ण तेजी आने की उम्मीद है। यह मॉडल सरकारी और निजी क्षेत्रों की विशेषज्ञता और संसाधनों को एक साथ लाता है। इससे आवास परियोजनाओं को अधिक कुशलता से पूरा किया जा सकेगा। लोगों को कम समय में अपने आवास मिल सकेंगे, जिससे उनकी प्रतीक्षा अवधि कम होगी। इसके अतिरिक्त, यह मॉडल सरकारी एजेंसियों पर पड़ने वाले वित्तीय बोझ को भी कम करेगा। निजी बिल्डरों की भागीदारी से निवेश और निर्माण क्षमता में वृद्धि होगी। यह सुनिश्चित करेगा कि अधिक संख्या में गुणवत्तापूर्ण ईडब्ल्यूएस मकान उपलब्ध हों।
प्रक्रिया चल रही है। ट्रांजेक्शन एडवाइजर की नियुक्ति के बाद वह पंजाब में अलग-अलग शहरों में जगह की पहचान करेंगे। इसके बाद काम शुरू होगा। - अनुज सहगल, चीफ इंजीनियर एवं नोडल अधिकारी, पुडा
पंजाब अर्बन प्लानिंग एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (पुडा) और उसकी सभी छह विकास अथॉरिटियां इस परियोजना का नेतृत्व कर रही हैं। इनमें गमाडा, ग्लाडा, जेडीए, बीडीए, पीडीए और एडीए विकास प्राधिकरण शामिल हैं। इन एजेंसियों ने इस परियोजना के लिए एक ट्रांजेक्शन एडवाइजर नियुक्त किया है। यह एजेंसी पूरे पंजाब में उपयुक्त स्थानों की पहचान करेगी, जहां ईडब्ल्यूएस आवासीय परियोजनाएं विकसित की जा सकें। स्थानों की पहचान होने के बाद, संबंधित विकास प्राधिकरण निजी बिल्डरों के साथ साझेदारी कर मकानों का निर्माण करेंगे। अधिकारियों का मानना है कि पीपीपी मॉडल अपनाने से परियोजनाओं के निर्माण में तेजी आएगी। इससे लोगों को कम समय में आवास उपलब्ध हो सकेंगे। साथ ही, सरकारी एजेंसियों पर वित्तीय बोझ भी कम होगा। पुडा के मुख्य अभियंता और इस योजना के नोडल अधिकारी अनुज सहगल ने बताया कि प्रक्रिया चल रही है। उन्होंने कहा कि ट्रांजेक्शन एडवाइजर की नियुक्ति के बाद पंजाब के विभिन्न शहरों में जगह की पहचान की जाएगी, जिसके बाद काम शुरू होगा। संवाद
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जमीनों की पहचान और परियोजना का क्रियान्वयन
ईडब्ल्यूएस मकानों के निर्माण से पहले पूरे पंजाब में उपयुक्त जमीनों की पहचान की जाएगी। इसके लिए पुडा और उसकी छह विकास अथॉरिटियां ने ट्रांजेक्शन एडवाइजर नियुक्त किया है। यह एजेंसी विभिन्न शहरों और विकास क्षेत्रों का सर्वेक्षण करेगी। इसका उद्देश्य ऐसी जमीनों का चयन करना है जहां आवासीय परियोजनाएं विकसित की जा सकें। जमीनों की उपलब्धता, बुनियादी सुविधाओं और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर एक रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इस रिपोर्ट के आधार पर निजी डेवलपर्स के साथ मिलकर परियोजनाओं को आगे बढ़ाया जाएगा। यह सुनिश्चित करेगा कि आवास सही स्थानों पर और उचित योजना के साथ बनें।
हजारों परिवारों का लंबा इंतजार खत्म
पंजाब में पिछले कई वर्षों से आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के हजारों लोग ईडब्ल्यूएस मकानों की नई योजनाओं का इंतजार कर रहे हैं। विभिन्न शहरों में पहले शुरू की गई आवास योजनाओं की संख्या सीमित थी। बढ़ती मांग के कारण बड़ी संख्या में पात्र परिवार अभी भी अपने घर के सपने को पूरा नहीं कर सके हैं। बढ़ती जमीन कीमतों और निर्माण लागत के कारण निजी स्तर पर घर खरीदना भी उनके लिए मुश्किल हो गया है। ऐसे में पीपीपी मॉडल के तहत प्रस्तावित नई आवास योजना से लोगों को राहत मिल सकती है। यह पहल आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों को अपने घर का सपना पूरा करने का अवसर देगी। इससे किफायती आवास की उपलब्धता बढ़ने की उम्मीद है।
पीपीपी मॉडल के लाभ
पीपीपी मॉडल को अपनाने से परियोजनाओं के निर्माण में महत्वपूर्ण तेजी आने की उम्मीद है। यह मॉडल सरकारी और निजी क्षेत्रों की विशेषज्ञता और संसाधनों को एक साथ लाता है। इससे आवास परियोजनाओं को अधिक कुशलता से पूरा किया जा सकेगा। लोगों को कम समय में अपने आवास मिल सकेंगे, जिससे उनकी प्रतीक्षा अवधि कम होगी। इसके अतिरिक्त, यह मॉडल सरकारी एजेंसियों पर पड़ने वाले वित्तीय बोझ को भी कम करेगा। निजी बिल्डरों की भागीदारी से निवेश और निर्माण क्षमता में वृद्धि होगी। यह सुनिश्चित करेगा कि अधिक संख्या में गुणवत्तापूर्ण ईडब्ल्यूएस मकान उपलब्ध हों।
प्रक्रिया चल रही है। ट्रांजेक्शन एडवाइजर की नियुक्ति के बाद वह पंजाब में अलग-अलग शहरों में जगह की पहचान करेंगे। इसके बाद काम शुरू होगा। - अनुज सहगल, चीफ इंजीनियर एवं नोडल अधिकारी, पुडा