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Mohali News: पंजाब में 35 पुलिस मुठभेड़ों पर मानवाधिकार आयोग का नोटिस, डीजीपी से मांगी रिपोर्ट

Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 23 Jun 2026 01:48 AM IST
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Human Rights Commission issues notice regarding 35 police encounters in Punjab; seeks report from DGP.
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मोहाली। पंजाब में पुलिस मुठभेड़ों को लेकर मानवाधिकारों का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। पंजाब एवं चंडीगढ़ मानवाधिकार आयोग ने पंजाब के डीजीपी गौरव यादव से स्टेटस रिपोर्ट तलब की है। यह कार्रवाई पंजाब मानवाधिकार संगठन के अध्यक्ष रणजीत सिंह की शिकायत पर हुई है। शिकायत में वर्ष 2023 से 2026 के बीच हुए 42 पुलिस मुठभेड़ों और उनसे जुड़ी 16 मौतों का विस्तृत ब्योरा आयोग को दिया गया है। रणजीत सिंह ने 35 पुलिस मुठभेड़ों की अलग से सूची भी सौंपी है। शिकायत में आरोप है कि राज्य में अतिरिक्त न्यायिक हिंसा को बढ़ावा दिया जा रहा है। कई मामलों में कानूनी प्रक्रिया को दरकिनार किया गया है। शिकायत की समीक्षा के बाद पंजाब राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष संत प्रकाश और सदस्य गुरबीर सिंह ने मामले में नोटिस जारी किया है।

मुठभेड़ों में पुलिस की एक जैसी कहानी
शिकायत में कहा गया है कि अधिकांश मामलों में पुलिस का दावा एक जैसा होता है। पुलिस का कहना होता है कि आरोपी को हथियार बरामद करवाने के लिए ले जाया जा रहा था। इसी दौरान आरोपी पुलिसकर्मी का हथियार छीनकर भागने या हमला करने की कोशिश करता है। इसके बाद जवाबी कार्रवाई में उसकी टांग में गोली मार दी जाती है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि यह घटनाक्रम कई मामलों में लगभग समान दिखाई दिया है। उन्होंने आयोग से पूरे मामले की स्वतंत्र एजेंसी से जांच करवाने की मांग की है। शिकायत में इसी वर्ष फरवरी में गुरदासपुर में 19 वर्षीय रणजीत सिंह की मौत का भी जिक्र है। पुलिस के अनुसार, युवक को 25 फरवरी को गिरफ्तार किया गया था। हथियार बरामदगी के लिए ले जाते समय वह भाग गया था। बाद में मुठभेड़ में उसकी मौत हो गई। इस घटना पर विपक्षी दलों ने राज्य सरकार पर सवाल उठाए थे। मृतक के परिजन अंतिम संस्कार के लिए भी तैयार नहीं हुए थे और करीब 12 दिन बाद उसका संस्कार किया गया था। शिकायत में वर्ष 2014 में उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में तीन युवकों की मुठभेड़ में हुई मौत का भी हवाला दिया गया है।
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हाईकोर्ट के निर्देशों की अनदेखी का आरोप
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि राज्य में गोली के बदले गोली जैसी सोच को बढ़ावा दिया जा रहा है। यह कानून के शासन और संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत प्रदत्त जीवन एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार के खिलाफ है। शिकायतकर्ता ने कहा कि पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने हाल ही में मानवाधिकार उल्लंघन और अवैध हिरासत को रोकने के निर्देश दिए थे। इनमें पुलिस थानों के औचक निरीक्षण शामिल थे, लेकिन इन निर्देशों की अनदेखी की जा रही है। अब आयोग द्वारा मांगी गई रिपोर्ट के बाद पुलिस का पक्ष और आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी।
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