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Mohali News: जीरकपुर नगर परिषद का प्रधान व उपप्रधान कौन होगा... कल होगा फैसला
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जीरकपुर। नगर परिषद को बुधवार को अपना नया प्रधान और उपप्रधान मिलेगा। नव निर्वाचित 31 पार्षद दोपहर दो बजे शपथ लेंगे। इसके बाद वे प्रधान और उपप्रधान का चुनाव करेंगे। इस चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी के सभी 16 पार्षद अज्ञात स्थान पर चले गए हैं। प्रशासन ने चुनाव की सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। यह बैठक उपमंडलीय दंडाधिकारी की अध्यक्षता में होगी। आम आदमी पार्टी ने नगर परिषद चुनाव में 31 में से 16 सीटें जीतकर पूर्ण बहुमत हासिल किया है। पार्टी के पास विधायक कुलजीत सिंह रंधावा का एक अतिरिक्त वोट भी है। इससे उनके कुल वोटों की संख्या 17 हो जाती है।
सोमवार दोपहर से ही आम आदमी पार्टी के सभी 16 पार्षद अपने फोन बंद करके दूसरी जगह चले गए हैं। लोगों में इस कदम को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। कुछ लोगों का मानना है कि पंजाब सरकार को पार्षदों के टूटने का डर सता रहा है। इसी कारण सभी जीते हुए पार्षदों को अलग स्थान पर भेजा गया है। कार्यकारी अधिकारी परविंदर सिंह भट्टी ने बताया कि बुधवार दोपहर दो बजे सभी पार्षदों को संविधान की शपथ दिलाई जाएगी। उन्होंने कहा कि इसके बाद उपमंडलीय दंडाधिकारी की अध्यक्षता में बैठक होगी। इसमें प्रधान व उपप्रधान का चयन हाथ उठाकर किया जाएगा। जीरकपुर नगर परिषद के चुनाव के लिए उपमंडलीय दंडाधिकारी अमित गुप्ता को संयोजक नियुक्त किया गया है। उन्होंने सोमवार दोपहर सभी 31 पार्षदों को एजेंडा जारी कर दिया। एजेंडे के अनुसार, बुधवार दोपहर दो बजे सभी पार्षदों को संविधान की शपथ दिलाई जाएगी। शपथ ग्रहण के बाद प्रधान और उपप्रधान का चुनाव होगा। सभी पार्षदों को बुधवार दोपहर दो बजे नगर परिषद कार्यालय पहुंचना अनिवार्य है। यह सुनिश्चित करेगा कि तय समय पर कार्रवाई पूरी हो सके। प्रशासन ने इस पूरी प्रक्रिया के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं।
आम आदमी पार्टी की रणनीति और बहुमत
जीरकपुर नगर परिषद में आम आदमी पार्टी ने 31 में से 16 सीटों पर जीत दर्ज की है। यह संख्या उन्हें पूर्ण बहुमत प्रदान करती है। सांविधानिक रूप से, किसी भी पार्टी को प्रधान बनाने के लिए 16 पार्षदों का समर्थन आवश्यक है। आम आदमी पार्टी के पास 16 पार्षद हैं। इसके अतिरिक्त, विधायक कुलजीत सिंह रंधावा का एक वोट भी उनके पक्ष में है। इस प्रकार, पार्टी के पास कुल 17 वोट हैं। यह संख्या उन्हें प्रधान और उपप्रधान चुनने में कोई परेशानी नहीं होने देगी। पार्षदों को अज्ञात स्थान पर भेजने का निर्णय इसी बहुमत को सुरक्षित रखने के लिए लिया गया है।
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पार्षदों को अज्ञात स्थान पर भेजने का पुराना चलन
आम आदमी पार्टी ने पार्षदों को अज्ञात स्थान पर भेजकर एक पुराने राजनीतिक चलन को अपनाया है। जीरकपुर नगर परिषद के इतिहास में ऐसा पहले भी हो चुका है। 2008 में आजाद ग्रुप ने बहुमत हासिल करने के बाद अपने पार्षदों को हिमाचल के पहाड़ों में भेज दिया था। उन्हें पंजाब सरकार से पार्षदों के टूटने का डर था। इसी तरह, 2021 में कांग्रेस ने 31 में से 23 सीटें जीती थीं। बहुमत होने के बावजूद कांग्रेस ने अपने पार्षदों को राजस्थान भेज दिया था। बलटाना के एक पार्षद ने अपना फोन अपने भाई को दे दिया है।
सोमवार दोपहर से ही आम आदमी पार्टी के सभी 16 पार्षद अपने फोन बंद करके दूसरी जगह चले गए हैं। लोगों में इस कदम को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। कुछ लोगों का मानना है कि पंजाब सरकार को पार्षदों के टूटने का डर सता रहा है। इसी कारण सभी जीते हुए पार्षदों को अलग स्थान पर भेजा गया है। कार्यकारी अधिकारी परविंदर सिंह भट्टी ने बताया कि बुधवार दोपहर दो बजे सभी पार्षदों को संविधान की शपथ दिलाई जाएगी। उन्होंने कहा कि इसके बाद उपमंडलीय दंडाधिकारी की अध्यक्षता में बैठक होगी। इसमें प्रधान व उपप्रधान का चयन हाथ उठाकर किया जाएगा। जीरकपुर नगर परिषद के चुनाव के लिए उपमंडलीय दंडाधिकारी अमित गुप्ता को संयोजक नियुक्त किया गया है। उन्होंने सोमवार दोपहर सभी 31 पार्षदों को एजेंडा जारी कर दिया। एजेंडे के अनुसार, बुधवार दोपहर दो बजे सभी पार्षदों को संविधान की शपथ दिलाई जाएगी। शपथ ग्रहण के बाद प्रधान और उपप्रधान का चुनाव होगा। सभी पार्षदों को बुधवार दोपहर दो बजे नगर परिषद कार्यालय पहुंचना अनिवार्य है। यह सुनिश्चित करेगा कि तय समय पर कार्रवाई पूरी हो सके। प्रशासन ने इस पूरी प्रक्रिया के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं।
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आम आदमी पार्टी की रणनीति और बहुमत
जीरकपुर नगर परिषद में आम आदमी पार्टी ने 31 में से 16 सीटों पर जीत दर्ज की है। यह संख्या उन्हें पूर्ण बहुमत प्रदान करती है। सांविधानिक रूप से, किसी भी पार्टी को प्रधान बनाने के लिए 16 पार्षदों का समर्थन आवश्यक है। आम आदमी पार्टी के पास 16 पार्षद हैं। इसके अतिरिक्त, विधायक कुलजीत सिंह रंधावा का एक वोट भी उनके पक्ष में है। इस प्रकार, पार्टी के पास कुल 17 वोट हैं। यह संख्या उन्हें प्रधान और उपप्रधान चुनने में कोई परेशानी नहीं होने देगी। पार्षदों को अज्ञात स्थान पर भेजने का निर्णय इसी बहुमत को सुरक्षित रखने के लिए लिया गया है।
पार्षदों को अज्ञात स्थान पर भेजने का पुराना चलन
आम आदमी पार्टी ने पार्षदों को अज्ञात स्थान पर भेजकर एक पुराने राजनीतिक चलन को अपनाया है। जीरकपुर नगर परिषद के इतिहास में ऐसा पहले भी हो चुका है। 2008 में आजाद ग्रुप ने बहुमत हासिल करने के बाद अपने पार्षदों को हिमाचल के पहाड़ों में भेज दिया था। उन्हें पंजाब सरकार से पार्षदों के टूटने का डर था। इसी तरह, 2021 में कांग्रेस ने 31 में से 23 सीटें जीती थीं। बहुमत होने के बावजूद कांग्रेस ने अपने पार्षदों को राजस्थान भेज दिया था। बलटाना के एक पार्षद ने अपना फोन अपने भाई को दे दिया है।