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Mohali News: मकान बेचने के नाम पर 35 लाख की ठगी, पति-पत्नी व बेटी पर मामला दर्ज
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मोहाली। बलौंगी थाना क्षेत्र में मकान बेचने के नाम पर 35 लाख रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। पुलिस ने जांच के बाद आरोपी देविंदर कुमार, उसकी पत्नी गीता कुमारी और बेटी निशु के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस को दी शिकायत में जुझार नगर निवासी साहनूर अब्बास और उसके भाई सलमान हैदर ने बताया कि वे मोहाली क्षेत्र में रहने के लिए मकान खरीदना चाहते थे। इसी दौरान उनके परिचित के माध्यम से जुझार नगर निवासी देविंदर कुमार से संपर्क हुआ। उसने अपना मकान बेचने की बात कही। दोनों पक्षों के बीच करीब 35 लाख रुपये में सौदा तय हुआ।
शिकायतकर्ताओं के अनुसार 3 जनवरी 2024 को लिखित बयाना किया गया और सात लाख रुपये बयाने के रूप में दिए गए। इनमें 2.5 लाख रुपये सीधे आरोपी को दिए गए, जबकि 4.5 लाख रुपये उस महिला को दिए गए, जिससे आरोपी ने पहले उधार लिया हुआ था। इसके बाद बाकी राशि मकान पर चल रहे कर्ज को चुकाने के लिए देने की बात तय हुई। पीड़ितों का आरोप है कि उन्होंने बैंक से कर्ज लेकर करीब 26.45 लाख रुपये की बकाया राशि वित्त कंपनी में जमा कराकर आरोपी के मकान का लोन भी क्लियर करवा दिया। इसके बाद आरोपी ने उनके नाम पावर ऑफ अटॉर्नी और वसीयत भी कर दी।
रजिस्ट्री कराने के नाम पर करने लगा टालमटोल
कुछ समय बाद जब उन्होंने मकान का कब्जा और रजिस्ट्री कराने की बात कही तो आरोपी टालमटोल करने लगा। बाद में आरोपी ने पावर ऑफ अटॉर्नी और वसीयत भी रद्द करवा दी और मकान देने से इनकार कर दिया। आरोप है कि कई बार समझौते भी हुए और आरोपी ने रकम लौटाने का भरोसा दिया, लेकिन पूरी राशि वापस नहीं की। इस दौरान दिया गया एक चेक भी बाउंस हो गया। मामले की जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि आरोपी ने मकान की पूरी कीमत लेने के बावजूद कब्जा और रजिस्ट्री नहीं दी। जांच रिपोर्ट और कानूनी राय के आधार पर पुलिस ने आरोपी देविंदर कुमार, उसकी पत्नी गीता कुमारी और बेटी निशु के खिलाफ केस दर्ज किया है। थाना बलौंगी पुलिस ने बताया कि मामले की आगे की जांच एएसआई अमनदीप सिंह को सौंपी गई है।
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शिकायतकर्ताओं के अनुसार 3 जनवरी 2024 को लिखित बयाना किया गया और सात लाख रुपये बयाने के रूप में दिए गए। इनमें 2.5 लाख रुपये सीधे आरोपी को दिए गए, जबकि 4.5 लाख रुपये उस महिला को दिए गए, जिससे आरोपी ने पहले उधार लिया हुआ था। इसके बाद बाकी राशि मकान पर चल रहे कर्ज को चुकाने के लिए देने की बात तय हुई। पीड़ितों का आरोप है कि उन्होंने बैंक से कर्ज लेकर करीब 26.45 लाख रुपये की बकाया राशि वित्त कंपनी में जमा कराकर आरोपी के मकान का लोन भी क्लियर करवा दिया। इसके बाद आरोपी ने उनके नाम पावर ऑफ अटॉर्नी और वसीयत भी कर दी।
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रजिस्ट्री कराने के नाम पर करने लगा टालमटोल
कुछ समय बाद जब उन्होंने मकान का कब्जा और रजिस्ट्री कराने की बात कही तो आरोपी टालमटोल करने लगा। बाद में आरोपी ने पावर ऑफ अटॉर्नी और वसीयत भी रद्द करवा दी और मकान देने से इनकार कर दिया। आरोप है कि कई बार समझौते भी हुए और आरोपी ने रकम लौटाने का भरोसा दिया, लेकिन पूरी राशि वापस नहीं की। इस दौरान दिया गया एक चेक भी बाउंस हो गया। मामले की जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि आरोपी ने मकान की पूरी कीमत लेने के बावजूद कब्जा और रजिस्ट्री नहीं दी। जांच रिपोर्ट और कानूनी राय के आधार पर पुलिस ने आरोपी देविंदर कुमार, उसकी पत्नी गीता कुमारी और बेटी निशु के खिलाफ केस दर्ज किया है। थाना बलौंगी पुलिस ने बताया कि मामले की आगे की जांच एएसआई अमनदीप सिंह को सौंपी गई है।