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Mohali News: जीरकपुर की आबादी 6 लाख की गंदगी को साफ कर रहा एक एसटीपी
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जीरकपुर। साल 2012 में शहर की आबादी 2 लाख होती थी और बढ़ती जरूरतों को देखते हुए 2013 में गांव सिंघपुरा में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किया गया। इसके बाद शहर की आबादी का सीवरेज यहां आकर ट्रीट होने लगा और कभी सीवरेज ओवरफ्लो की परेशानी नहीं हुई। दूसरी ओर, 13 साल बाद शहर की आबादी 6 लाख से अधिक हो गई है और अब भी सिंघपुरा वाला ट्रीटमेंट प्लांट इतनी बड़ी आबादी के सीवरेज को साफ करने में लगा हुआ है। बीते 13 सालों में नया एसटीपी न लगने की वजह से आए दिन सीवरेज ओवरफ्लो की शिकायतें आती रहती है और सीवरेज ओवरफ्लो की वजह से सड़कें दूषित पानी से भरी रहती है।
2015 के दौरान शहर की बढ़ती आबादी को देखते हुए एक नया सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने का फैसला हुआ, जिसके बाद स्थानीय प्रशासन द्वारा बनाए प्रस्ताव को पंजाब सरकार ने मंजूरी प्रदान कर दी। धीरे-धीरे सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने की कार्रवाई शुरू हुई तो इसको लगाने के लिए गाजीपुर गांव में सुखना चो के पास लगाने के लिए जगह चयनित हुई और 2021 में जब ट्रीटमेंट प्लांट लगाने का काम शुरू हुआ तो स्थानीय लोगों के विरोध के बाद इसका काम रुक गया। मामला अदालत तक पहुंचा तो लोगों की मांग पर ट्रीटमेंट प्लांट गाजीपुर से किशनपुरा शिफ्ट हो गया, जिसको लेकर ट्रीटमेंट प्लांट लगाने की कार्रवाई दोबारा शुरू हुई तो 2025 में इसका शिलान्यास करते हुए इसका निर्माण कार्य शुरू हुआ। लेकिन यहां भी स्थानीय लोगों के ऐतराज के बाद मामला अदालत पहुंच गया, जिसके बाद से अब तक मामला अदालत में विचाराधीन है। इसके साथ ही अदालत ने ट्रीटमेंट प्लांट के निर्माण कार्य पर पूरी तरह से रोक लगा रखी है।
ये कहना है लोगों का
- गांव के अंदर जहां ट्रीटमेंट प्लांट लगाया जा रहा था, वो आबादी के बिल्कुल पास था और ट्रीटमेंट प्लांट अगर लग जाता तो पूरा क्षेत्र गंदगी से भरा रहता। यहां पहले ही सुखना चो की वजह से गांववासी गंभीर बीमारियों का सामना कर रहे हैं। ऊपर से सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लग जाता तो सांस लेना मुश्किल हो जाता।- हरदीप सिंह, गाजीपुर।
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- किशनपुरा की जिस जगह पर सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने के लिए जगह चयनित हुई, उसके आसपास स्कूल से लेकर हाईराइज सोसाइटीज है। इसमें हजारों की संख्या में लोगों ने अपनी जीवनभर की पूंजी लगाकर घर खरीदे हैं और हजारों की आबादी के बीचोंबीच ट्रीटमेंट प्लांट लगने का पता चला तो अपना विरोध दर्ज करवाया। जब प्रशासन नहीं माना तो उनकी आवाज हाईकोर्ट ने सुनीं, जिसके बाद अदालत द्वारा प्रोजेक्ट पर स्टे लगा दी।- सुधीर कांतिवाल, निवासी किशनपुरा।
फोटो सहित :
जीरकपुर : सिंघपुरा में स्थित सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट।
हरदीप सिंह, निवासी गाजीपुर।
सुधीर कांतिवाल, निवासी, किशनपुरा।
2015 के दौरान शहर की बढ़ती आबादी को देखते हुए एक नया सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने का फैसला हुआ, जिसके बाद स्थानीय प्रशासन द्वारा बनाए प्रस्ताव को पंजाब सरकार ने मंजूरी प्रदान कर दी। धीरे-धीरे सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने की कार्रवाई शुरू हुई तो इसको लगाने के लिए गाजीपुर गांव में सुखना चो के पास लगाने के लिए जगह चयनित हुई और 2021 में जब ट्रीटमेंट प्लांट लगाने का काम शुरू हुआ तो स्थानीय लोगों के विरोध के बाद इसका काम रुक गया। मामला अदालत तक पहुंचा तो लोगों की मांग पर ट्रीटमेंट प्लांट गाजीपुर से किशनपुरा शिफ्ट हो गया, जिसको लेकर ट्रीटमेंट प्लांट लगाने की कार्रवाई दोबारा शुरू हुई तो 2025 में इसका शिलान्यास करते हुए इसका निर्माण कार्य शुरू हुआ। लेकिन यहां भी स्थानीय लोगों के ऐतराज के बाद मामला अदालत पहुंच गया, जिसके बाद से अब तक मामला अदालत में विचाराधीन है। इसके साथ ही अदालत ने ट्रीटमेंट प्लांट के निर्माण कार्य पर पूरी तरह से रोक लगा रखी है।
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ये कहना है लोगों का
- गांव के अंदर जहां ट्रीटमेंट प्लांट लगाया जा रहा था, वो आबादी के बिल्कुल पास था और ट्रीटमेंट प्लांट अगर लग जाता तो पूरा क्षेत्र गंदगी से भरा रहता। यहां पहले ही सुखना चो की वजह से गांववासी गंभीर बीमारियों का सामना कर रहे हैं। ऊपर से सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लग जाता तो सांस लेना मुश्किल हो जाता।- हरदीप सिंह, गाजीपुर।
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- किशनपुरा की जिस जगह पर सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने के लिए जगह चयनित हुई, उसके आसपास स्कूल से लेकर हाईराइज सोसाइटीज है। इसमें हजारों की संख्या में लोगों ने अपनी जीवनभर की पूंजी लगाकर घर खरीदे हैं और हजारों की आबादी के बीचोंबीच ट्रीटमेंट प्लांट लगने का पता चला तो अपना विरोध दर्ज करवाया। जब प्रशासन नहीं माना तो उनकी आवाज हाईकोर्ट ने सुनीं, जिसके बाद अदालत द्वारा प्रोजेक्ट पर स्टे लगा दी।- सुधीर कांतिवाल, निवासी किशनपुरा।
फोटो सहित :
जीरकपुर : सिंघपुरा में स्थित सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट।
हरदीप सिंह, निवासी गाजीपुर।
सुधीर कांतिवाल, निवासी, किशनपुरा।