{"_id":"69e92cc7c367c510b10bf171","slug":"relief-to-flat-buyers-gmada-ordered-to-pay-interest-and-compensation-mohali-news-c-71-1-mli1010-141629-2026-04-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mohali News: फ्लैट खरीदार को राहत, गमाडा को ब्याज व मुआवजा देने के आदेश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mohali News: फ्लैट खरीदार को राहत, गमाडा को ब्याज व मुआवजा देने के आदेश
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
मोहाली। सेक्टर-88 के पूरब प्रीमियम अपार्टमेंट्स योजना में फ्लैट खरीदार महिला को राज्य उपभोक्ता आयोग ने बड़ी राहत दी है। आयोग ने गमाडा को सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार का दोषी ठहराते हुए ब्याज और मुआवजा देने के आदेश जारी किए हैं।
शिकायतकर्ता शिल्पी श्रीवास्तव ने 2012 में फ्लैट के लिए आवेदन किया था। 21 मई 2012 को जारी लेटर ऑफ इंटेंट में 36 महीने के भीतर कब्जा देने का वादा किया गया था, लेकिन तय समय सीमा तक निर्माण पूरा नहीं हुआ। 2016 में अधूरी सुविधाओं के बावजूद महिला को कब्जा लेने पर मजबूर होना पड़ा।
आयोग ने पाया कि परियोजना का कंप्लीशन और ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट भी प्राप्त नहीं हुआ था, फिर भी कब्जा दे दिया गया और मेंटेनेंस शुल्क वसूला गया। गमाडा ने सभी आरोपों को खारिज किया था, लेकिन आयोग ने इसे सेवा में कमी माना।
आयोग ने गमाडा को 21 मई 2015 से 7 अक्टूबर 2016 तक जमा राशि पर 9% वार्षिक ब्याज देने का आदेश दिया है। साथ ही 50 हजार रुपये मानसिक पीड़ा और मुकदमेबाजी खर्च के रूप में देने तथा कंप्लीशन सर्टिफिकेट मिलने तक मेंटेनेंस चार्ज न लेने के निर्देश दिए हैं।
Trending Videos
शिकायतकर्ता शिल्पी श्रीवास्तव ने 2012 में फ्लैट के लिए आवेदन किया था। 21 मई 2012 को जारी लेटर ऑफ इंटेंट में 36 महीने के भीतर कब्जा देने का वादा किया गया था, लेकिन तय समय सीमा तक निर्माण पूरा नहीं हुआ। 2016 में अधूरी सुविधाओं के बावजूद महिला को कब्जा लेने पर मजबूर होना पड़ा।
विज्ञापन
विज्ञापन
आयोग ने पाया कि परियोजना का कंप्लीशन और ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट भी प्राप्त नहीं हुआ था, फिर भी कब्जा दे दिया गया और मेंटेनेंस शुल्क वसूला गया। गमाडा ने सभी आरोपों को खारिज किया था, लेकिन आयोग ने इसे सेवा में कमी माना।
आयोग ने गमाडा को 21 मई 2015 से 7 अक्टूबर 2016 तक जमा राशि पर 9% वार्षिक ब्याज देने का आदेश दिया है। साथ ही 50 हजार रुपये मानसिक पीड़ा और मुकदमेबाजी खर्च के रूप में देने तथा कंप्लीशन सर्टिफिकेट मिलने तक मेंटेनेंस चार्ज न लेने के निर्देश दिए हैं।

कमेंट
कमेंट X