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रेरा का फैसला : मोहाली हाउसिंग केस में डेवलपर से 27.82 लाख की रिकवरी के आदेश
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जीरकपुर। घर खरीदारों के अधिकारों को मजबूती देते हुए रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) ने एक अहम फैसला सुनाया है। अथॉरिटी ने सुषमा डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ 27,82,775 रुपये की रिकवरी का नोटिस जारी किया है। यह कार्रवाई पहले दिए गए आदेशों का पालन न करने पर की गई है। मामला डॉ. गुरमीत सिंह चावला की ओर से दायर शिकायत से जुड़ा है। उन्होंने जीरकपुर स्थित सुषमा वेलेंसिया प्रोजेक्ट में फ्लैट नंबर R4-119/02 बुक किया था। इसके लिए उन्होंने कुल 66,98,804 रुपये का भुगतान किया था। एग्रीमेंट के मुताबिक फ्लैट का कब्जा 29 दिसंबर 2021 तक मिलना था।
रेरा के रिकॉर्ड के अनुसार डेवलपर ने 3 अक्टूबर 2023 को कब्जा ऑफर किया, लेकिन यह ऑफर बिना वैध कंप्लीशन या ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट के था। इसके अलावा, निर्माण कार्य भी अधूरा था। इसी कारण शिकायतकर्ता ने कब्जा लेने से इनकार कर दिया। 29 मई 2025 को दिए गए अपने आदेश में रेरा ने स्पष्ट किया कि बिना जरूरी मंजूरियों के दिया गया कब्जा कानूनी रूप से मान्य नहीं है। अथॉरिटी ने कहा कि यदि प्रमोटर तय समय पर कब्जा देने में विफल रहता है, तो खरीदार को देरी की अवधि के लिए ब्याज पाने का अधिकार है। रेरा ने डेवलपर को निर्देश दिया कि वह शिकायतकर्ता को 25,42,389 रुपये की राशि 11.10 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ अदा करे। इसमें कोविड-19 की चार महीने की अवधि को छूट दी गई है।
साथ ही यह भी आदेश दिया गया कि वैध कब्जा मिलने तक ब्याज जारी रहेगा। हालांकि, आदेश का पालन न होने पर शिकायतकर्ता ने एक्जीक्यूशन आवेदन (नंबर 52/2025) दायर किया। इसके बाद रेरा ने रियल एस्टेट (रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट) एक्ट, 2016 की धारा 40 के तहत बकाया राशि को भू-राजस्व की तरह वसूलने के निर्देश दिए। 16 फरवरी 2026 को जारी रिकवरी नोटिस में मोहाली के डिप्टी कमिश्नर को निर्देश दिया गया है कि 60 दिनों के भीतर डेवलपर की संपत्तियों से यह राशि वसूल की जाए। शिकायतकर्ता डॉ. गुरमीत सिंह चावला ने कहा कि यह आदेश साफ करता है कि बिना वैधानिक सर्टिफिकेट के कब्जा ऑफर करना अमान्य है और ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई जरूरी है।
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रेरा के रिकॉर्ड के अनुसार डेवलपर ने 3 अक्टूबर 2023 को कब्जा ऑफर किया, लेकिन यह ऑफर बिना वैध कंप्लीशन या ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट के था। इसके अलावा, निर्माण कार्य भी अधूरा था। इसी कारण शिकायतकर्ता ने कब्जा लेने से इनकार कर दिया। 29 मई 2025 को दिए गए अपने आदेश में रेरा ने स्पष्ट किया कि बिना जरूरी मंजूरियों के दिया गया कब्जा कानूनी रूप से मान्य नहीं है। अथॉरिटी ने कहा कि यदि प्रमोटर तय समय पर कब्जा देने में विफल रहता है, तो खरीदार को देरी की अवधि के लिए ब्याज पाने का अधिकार है। रेरा ने डेवलपर को निर्देश दिया कि वह शिकायतकर्ता को 25,42,389 रुपये की राशि 11.10 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ अदा करे। इसमें कोविड-19 की चार महीने की अवधि को छूट दी गई है।
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साथ ही यह भी आदेश दिया गया कि वैध कब्जा मिलने तक ब्याज जारी रहेगा। हालांकि, आदेश का पालन न होने पर शिकायतकर्ता ने एक्जीक्यूशन आवेदन (नंबर 52/2025) दायर किया। इसके बाद रेरा ने रियल एस्टेट (रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट) एक्ट, 2016 की धारा 40 के तहत बकाया राशि को भू-राजस्व की तरह वसूलने के निर्देश दिए। 16 फरवरी 2026 को जारी रिकवरी नोटिस में मोहाली के डिप्टी कमिश्नर को निर्देश दिया गया है कि 60 दिनों के भीतर डेवलपर की संपत्तियों से यह राशि वसूल की जाए। शिकायतकर्ता डॉ. गुरमीत सिंह चावला ने कहा कि यह आदेश साफ करता है कि बिना वैधानिक सर्टिफिकेट के कब्जा ऑफर करना अमान्य है और ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई जरूरी है।