{"_id":"6a53fd53578005bbf1010815","slug":"setback-for-ats-builder-ordered-to-refund-165-lakh-charged-in-excess-mohali-news-c-71-1-spkl1025-144573-2026-07-13","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mohali News: एटीएस बिल्डर को झटका, अधिक वसूली के 1.65 लाख रुपये लौटाने का आदेश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mohali News: एटीएस बिल्डर को झटका, अधिक वसूली के 1.65 लाख रुपये लौटाने का आदेश
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मोहाली। जिला उपभोक्ता आयोग ने एटीएस एस्टेट्स प्राइवेट लिमिटेड और एटीएस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड को ईडीसी (एक्सटर्नल डेवलपमेंट चार्ज) के नाम पर अधिक राशि वसूलने के मामले में बड़ा झटका दिया है। आयोग ने दोनों कंपनियों को 1,65,943 रुपये 24 जून 2022 से नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित लौटाने का निर्देश दिया है। इसके अतिरिक्त, मानसिक प्रताड़ना और मुकदमेबाजी खर्च के लिए 20 हजार रुपये भी अदा करने होंगे। आयोग ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि रीसेल में प्लॉट खरीदने वाला व्यक्ति भी उपभोक्ता की श्रेणी में आता है। उसे बिल्डर के खिलाफ उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराने का पूरा अधिकार है। आयोग ने बिल्डर की उन दलीलों को खारिज कर दिया, जिनमें कहा गया था कि शिकायतकर्ताओं के साथ उसका कोई प्रत्यक्ष अनुबंध नहीं था और नगर परिषद को मामले में पक्षकार बनाया जाना चाहिए था।
शिकायत और बिल्डर का तर्क
शिकायतकर्ता शशि भूषण मित्तल और रेणु मित्तल ने वर्ष 2021 में डेराबस्सी स्थित एटीएस गोल्फ मेडोज-2 परियोजना में 350 वर्ग गज का प्लॉट मूल आवंटियों से खरीदा था। उनके अनुसार, बिल्डर ने मूल आवंटियों से ईडीसी के नाम पर 4.37 लाख रुपये वसूले थे। बाद में नगर परिषद डेराबस्सी ने नक्शा स्वीकृत कराने के दौरान केवल 2,42,382 रुपये ईडीसी जमा कराने को कहा, जो उन्होंने जमा करा दिए। बिल्डर ने यह राशि वापस कर दी, लेकिन पहले वसूली गई राशि में से 1,65,943 रुपये अपने पास ही रख लिए। सुनवाई के दौरान बिल्डर ने तर्क दिया कि शिकायतकर्ताओं ने प्लॉट रीसेल में खरीदा है, इसलिए कंपनी का उनसे सीधा अनुबंध नहीं था। कंपनी ने यह भी कहा कि अतिरिक्त ईडीसी मूल आवंटियों ने जमा कराई थी और मामला नगर परिषद से संबंधित है, इसलिए उपभोक्ता आयोग इसकी सुनवाई नहीं कर सकता।
आयोग का फैसला
आयोग ने अपने फैसले में कहा कि विवाद नगर परिषद द्वारा वसूले जाने वाले ईडीसी का नहीं, बल्कि बिल्डर द्वारा अधिक राशि लेकर अपने पास रखने का है। ऐसे में नगर परिषद को पक्षकार बनाना आवश्यक नहीं था। आयोग ने बिल्डर के उस पत्र को भी महत्वपूर्ण साक्ष्य माना, जिसमें शिकायतकर्ताओं को नगर परिषद में 2,42,382 रुपये ईडीसी जमा कराने के निर्देश दिए गए थे। इससे स्पष्ट हुआ कि वास्तविक ईडीसी पहले वसूली गई राशि से काफी कम थी और 1,65,943 रुपये बिना किसी वैधानिक आधार के रोके गए थे।
विज्ञापन
विज्ञापन
शिकायत और बिल्डर का तर्क
शिकायतकर्ता शशि भूषण मित्तल और रेणु मित्तल ने वर्ष 2021 में डेराबस्सी स्थित एटीएस गोल्फ मेडोज-2 परियोजना में 350 वर्ग गज का प्लॉट मूल आवंटियों से खरीदा था। उनके अनुसार, बिल्डर ने मूल आवंटियों से ईडीसी के नाम पर 4.37 लाख रुपये वसूले थे। बाद में नगर परिषद डेराबस्सी ने नक्शा स्वीकृत कराने के दौरान केवल 2,42,382 रुपये ईडीसी जमा कराने को कहा, जो उन्होंने जमा करा दिए। बिल्डर ने यह राशि वापस कर दी, लेकिन पहले वसूली गई राशि में से 1,65,943 रुपये अपने पास ही रख लिए। सुनवाई के दौरान बिल्डर ने तर्क दिया कि शिकायतकर्ताओं ने प्लॉट रीसेल में खरीदा है, इसलिए कंपनी का उनसे सीधा अनुबंध नहीं था। कंपनी ने यह भी कहा कि अतिरिक्त ईडीसी मूल आवंटियों ने जमा कराई थी और मामला नगर परिषद से संबंधित है, इसलिए उपभोक्ता आयोग इसकी सुनवाई नहीं कर सकता।
विज्ञापन
आयोग का फैसला
आयोग ने अपने फैसले में कहा कि विवाद नगर परिषद द्वारा वसूले जाने वाले ईडीसी का नहीं, बल्कि बिल्डर द्वारा अधिक राशि लेकर अपने पास रखने का है। ऐसे में नगर परिषद को पक्षकार बनाना आवश्यक नहीं था। आयोग ने बिल्डर के उस पत्र को भी महत्वपूर्ण साक्ष्य माना, जिसमें शिकायतकर्ताओं को नगर परिषद में 2,42,382 रुपये ईडीसी जमा कराने के निर्देश दिए गए थे। इससे स्पष्ट हुआ कि वास्तविक ईडीसी पहले वसूली गई राशि से काफी कम थी और 1,65,943 रुपये बिना किसी वैधानिक आधार के रोके गए थे।
विज्ञापन