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Mohali News: नए सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट पर असमंजस, छह लाख आबादी की चिंता बढ़ी
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जीरकपुर। नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के निर्माण को लेकर प्रशासन को लगातार विरोध का सामना करना पड़ रहा है। शहर की छह लाख से अधिक आबादी के लिए मौजूदा 17.3 मिलियन लीटर प्रतिदिन (एमएलडी) क्षमता का एसटीपी अपर्याप्त साबित हो रहा है। प्रशासन अब इस दुविधा में है कि बढ़ती आबादी की जरूरत पूरी करने के लिए नया एसटीपी कहां स्थापित किया जाए। हालांकि गांव रामगढ़ भुड्ढा में नया एसटीपी स्थापित करने की योजना पर काम चल रहा है। वर्ष 2013 में गांव सिंघपुरा में 17.3 एमएलडी क्षमता का एसटीपी लगाया गया था। यह एसटीपी उस समय की आबादी को ध्यान में रखकर स्थापित किया गया था। पिछले 13 वर्षों में जीरकपुर की आबादी तेजी से बढ़कर छह लाख से अधिक हो गई है। बढ़ती आबादी के कारण मौजूदा एसटीपी अब शहर की जरूरतों को पूरा नहीं कर पा रहा है। बारिश के दौरान एसटीपी से पानी ओवरफ्लो होकर बाहर गिरने लगता है। स्थानीय लोग सीवर ओवरफ्लो की समस्या से निजात पाने की उम्मीद कर रहे हैं। नगर परिषद ने वर्ष 2015 में एक और एसटीपी लगाने का फैसला किया था। इस परियोजना का प्रस्ताव पंजाब सरकार को भेजा गया था, जिसे मंजूरी भी मिल गई थी। हालांकि, निर्माण कार्य शुरू होने के बाद से ही इसे विरोध का सामना करना पड़ रहा है।
गाजीपुर से सनोली तक विरोध का सिलसिला
प्रारंभ में नए एसटीपी को गाजीपुर में स्थापित करने का निर्णय लिया गया था। गाजीपुर के स्थानीय लोगों ने इस फैसले का कड़ा विरोध किया। विरोध के चलते प्रशासन को परियोजना को दूसरी जगह स्थानांतरित करना पड़ा। इसके बाद एसटीपी को सनोली की सरकारी जमीन पर लगाने का फैसला लिया गया। यहां भी पास के गांव किशनपुरा की रिहायशी सोसाइटी के लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया।
अदालत ने एसटीपी परियोजना पर लगाई रोक
स्थानीय लोगों के विरोध को देखते हुए प्रशासन ने उन्हें समझाने का प्रयास किया। हालांकि, यह मामला अदालत तक पहुंच गया। अदालत ने लोगों की मांग पर एसटीपी परियोजना पर स्थगन आदेश जारी कर दिया है। लोगों द्वारा दायर याचिका पर अभी अदालत का फैसला आना बाकी है। इस स्थिति ने प्रशासन की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
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मौजूदा एसटीपी की क्षमता बढ़ाने या एक नया एसटीपी स्थापित करने की आवश्यकता तत्काल है। बिना प्रभावी सीवरेज प्रणाली के शहर में स्वच्छता और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं। प्रशासन को न केवल तकनीकी समाधान खोजने होंगे, बल्कि सामाजिक स्वीकार्यता भी सुनिश्चित करनी होगी। जनभागीदारी और पारदर्शी प्रक्रियाएं ही इस समस्या का स्थायी समाधान प्रदान कर सकती हैं। यह सुनिश्चित करना होगा कि भविष्य की परियोजनाएं बिना किसी कानूनी या सामाजिक बाधा के पूरी हों। - परवीन शर्मा, निवासी बलटाना।
जीरकपुर की आबादी में जिस प्रकार से बढ़ोत्तरी हो रही है, उसको देखते हुए नया एसटीपी लगाना जरूरी हो गया है। अभी कुछ कालोनियां ऐसी है, जिनमें लोगों ने घर बनाना तो शुरू कर दिया है और घर बनने के बाद शिफ्ट होना शुरू कर देंगे। तब सबसे बड़ी समस्या सीवरेज ओवरफ्लो की होगी। -हरजीत मिंटा, निवासी जीरकपुर।
सनोली में लगने वाले एसटीपी परियोजना का मामला अदालत में अभी विचाराधीन है। हमारी तरफ से गांव रामगढ़ भुड्ढा में नया एसटीपी स्थापित करने की योजना पर काम चल रहा है। इसके अलावा हमारी प्राथमिकता है कि जीरकपुर में अगर कोई परियोजना को लागू करना है तो वह लोगों की सहमति के बाद ही होगी। - परविंदर सिंह भट्टी, ईओ, जीरकपुर नगर परिषद
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गाजीपुर से सनोली तक विरोध का सिलसिला
प्रारंभ में नए एसटीपी को गाजीपुर में स्थापित करने का निर्णय लिया गया था। गाजीपुर के स्थानीय लोगों ने इस फैसले का कड़ा विरोध किया। विरोध के चलते प्रशासन को परियोजना को दूसरी जगह स्थानांतरित करना पड़ा। इसके बाद एसटीपी को सनोली की सरकारी जमीन पर लगाने का फैसला लिया गया। यहां भी पास के गांव किशनपुरा की रिहायशी सोसाइटी के लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया।
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अदालत ने एसटीपी परियोजना पर लगाई रोक
स्थानीय लोगों के विरोध को देखते हुए प्रशासन ने उन्हें समझाने का प्रयास किया। हालांकि, यह मामला अदालत तक पहुंच गया। अदालत ने लोगों की मांग पर एसटीपी परियोजना पर स्थगन आदेश जारी कर दिया है। लोगों द्वारा दायर याचिका पर अभी अदालत का फैसला आना बाकी है। इस स्थिति ने प्रशासन की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
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मौजूदा एसटीपी की क्षमता बढ़ाने या एक नया एसटीपी स्थापित करने की आवश्यकता तत्काल है। बिना प्रभावी सीवरेज प्रणाली के शहर में स्वच्छता और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं। प्रशासन को न केवल तकनीकी समाधान खोजने होंगे, बल्कि सामाजिक स्वीकार्यता भी सुनिश्चित करनी होगी। जनभागीदारी और पारदर्शी प्रक्रियाएं ही इस समस्या का स्थायी समाधान प्रदान कर सकती हैं। यह सुनिश्चित करना होगा कि भविष्य की परियोजनाएं बिना किसी कानूनी या सामाजिक बाधा के पूरी हों। - परवीन शर्मा, निवासी बलटाना।
जीरकपुर की आबादी में जिस प्रकार से बढ़ोत्तरी हो रही है, उसको देखते हुए नया एसटीपी लगाना जरूरी हो गया है। अभी कुछ कालोनियां ऐसी है, जिनमें लोगों ने घर बनाना तो शुरू कर दिया है और घर बनने के बाद शिफ्ट होना शुरू कर देंगे। तब सबसे बड़ी समस्या सीवरेज ओवरफ्लो की होगी। -हरजीत मिंटा, निवासी जीरकपुर।
सनोली में लगने वाले एसटीपी परियोजना का मामला अदालत में अभी विचाराधीन है। हमारी तरफ से गांव रामगढ़ भुड्ढा में नया एसटीपी स्थापित करने की योजना पर काम चल रहा है। इसके अलावा हमारी प्राथमिकता है कि जीरकपुर में अगर कोई परियोजना को लागू करना है तो वह लोगों की सहमति के बाद ही होगी। - परविंदर सिंह भट्टी, ईओ, जीरकपुर नगर परिषद