'एडीएम आए, ज्ञापन देने को कहा, फिर नहीं हुई कोई बातचीत': टंकी पर चढ़े छात्र बोले, प्रशासन ने नहीं दिया आश्वासन
Rajasthan: छात्रों का पानी की टंकी पर प्रदर्शन साढ़े 12 घंटे बाद भी जारी है। छात्रों का कहना है कि प्रशासन ने अब तक कोई वार्ता या ठोस आश्वासन नहीं दिया। छात्रा वियोना जाट ने कहा कि वे लाखों युवाओं के भविष्य के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
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पानी की टंकी पर चढ़े छात्रों को साढ़े 12 घंटे से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन वे अब भी टंकी पर डटे हुए हैं। छात्रों ने अमर उजाला से बातचीत में बताया कि अब तक प्रशासन की ओर से उनसे किसी तरह की कोई औपचारिक वार्ता नहीं की गई है और न ही कोई आश्वासन दिया गया है। छात्र विजयपाल ने बताया कि सुबह एडीएम मौके पर आए थे। उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि आप नीचे उतरकर ज्ञापन दे दीजिए। इसके बाद से अब तक प्रशासन की ओर से कोई बातचीत नहीं हुई है।
टंकी पर मौजूद छात्रा वियोना जाट ने कहा, "मेरा परिवार मेरे साथ खड़ा है, इसलिए मैं इतनी मजबूत हूं। हम पानी का इस्तेमाल भी बहुत सीमित मात्रा में कर रहे हैं, ताकि लंबे समय तक यहां डटे रह सकें। यह लड़ाई हम अपने लिए नहीं लड़ रहे हैं, बल्कि उन लाखों युवाओं के लिए लड़ रहे हैं, जिनका भविष्य इस व्यवस्था की वजह से प्रभावित हो रहा है।
क्या है मामला?
दरअसल, गुरुवार सुबह जयपुर में एनएसयूआई के तीन छात्र नेताओं ने टोंक फाटक पुलिया के समीप स्थित रेलवे प्रशासन की पानी की टंकी पर चढ़कर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारी छात्र राजस्थान में पिछले चार वर्षों से बंद छात्रसंघ चुनावों की बहाली और दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों पर हुए कथित लाठीचार्ज के विरोध में केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, प्रशासन, रेलवे पुलिस, सिविल डिफेंस और फायर ब्रिगेड की टीमें मौके पर पहुंच गईं तथा छात्रों को सुरक्षित नीचे उतारने के प्रयास शुरू कर दिए।
टंकी पर चढ़े छात्रों में राजस्थान विश्वविद्यालय के एनएसयूआई प्रभारी विजयपाल कुड़ी, छात्र नेत्री वियोना जाट और छात्र नेता कोशेन खान शामिल हैं। तीनों ने हाथों में पोस्टर लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और दिल्ली में छात्रों पर हुई कार्रवाई को लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बताया। प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से इस्तीफे और छात्रों से माफी मांगने की भी मांग उठाई।
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छात्र नेताओं का कहना है कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने वाले छात्रों पर बल प्रयोग स्वीकार्य नहीं है। उनका आरोप है कि छात्रों की आवाज को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। साथ ही उन्होंने राजस्थान में लंबे समय से छात्रसंघ चुनाव नहीं कराए जाने पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि छात्रसंघ चुनाव लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और चुनाव नहीं होने से छात्रों को अपना प्रतिनिधि चुनने का अवसर नहीं मिल रहा है। उन्होंने राज्य सरकार से जल्द छात्रसंघ चुनाव कराने की घोषणा करने की मांग की।