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डकैत जगन गुर्जर हत्याकांड: 'काश जन्म लेते ही मर जाता', बेटे के गुनाह से टूटा पिता, परिवार ने मान लिया मरा हुआ

Wed, 01 Jul 2026 11:09 AM IST
अजमेर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अजमेर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अजमेर Published by: अजमेर ब्यूरो Updated Wed, 01 Jul 2026 11:09 AM IST
सार

अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में डकैत जगन गुर्जर हत्याकांड के मुख्य आरोपी विष्णु उर्फ विष्णु अजान के गांव पहुंची पड़ताल में एक गरीब और टूटे हुए परिवार की दर्दनाक कहानी सामने आई। पिता रामबाबू सिंह ने कहा कि बेटे ने पूरे परिवार को शर्मिंदा कर दिया है और अब वे उसके लिए न वकील करेंगे और न ही जेल में मिलने जाएंगे।

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vishnu jat family broken after jagan gurjar murder case ajmer high security jail
बेटे के अपराध से टूटा परिवार - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में डकैत जगन गुर्जर की हत्या के मुख्य आरोपी विष्णु उर्फ विष्णु अजान के गांव भरतपुर के अजान में परिवार गहरे सदमे में है। पिता ने साफ कहा कि बेटे ने पूरे परिवार को शर्मिंदा कर दिया है, इसलिए अब उसके लिए न वकील करेंगे और न ही कभी जेल में मिलने जाएंगे। गांव में भी उसके नाम से लोग दूरी बना रहे हैं।
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पिता बोले- काश जन्म लेते ही मर जाता

विष्णु के पिता रामबाबू सिंह ने कहा कि अगर वह जन्म लेते ही मर जाता तो सिर्फ दुख होता, लेकिन आज उसने पूरे परिवार को समाज में शर्मिंदा कर दिया है। उन्होंने कहा कि जो जैसा करेगा, वैसा भरेगा। अब वह बेटे की कोई कानूनी मदद नहीं करेंगे और न ही उससे जेल में मिलने जाएंगे। डीग जिले के अजान गांव में विष्णु का घर इन दिनों सन्नाटे में डूबा हुआ है। गांव के लोग भी उसके नाम से दूरी बना रहे हैं। परिजनों का कहना है कि बचपन से लेकर जेल जाने तक उन्होंने उसे कई बार समझाया, लेकिन वह अपराध की दुनिया से बाहर नहीं निकल सका।
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तीसरी कक्षा के बाद छूटी पढ़ाई

रामबाबू सिंह ने बताया कि विष्णु ने गांव के सरकारी स्कूल से तीसरी कक्षा तक पढ़ाई की थी। इसके बाद उसका पढ़ाई में मन नहीं लगा और वह गलत संगत में पड़ गया। परिवार को उम्मीद थी कि समय के साथ वह सुधर जाएगा, लेकिन उसका झुकाव लगातार अपराध की ओर बढ़ता गया।
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परिवार और सरपंच ने भी समझाया

पिता ने बताया कि घर के हर सदस्य ने उसे समझाने की कोशिश की। जब उसने परिवार की बात नहीं मानी तो उसे गांव के सरपंच के पास भी ले जाया गया। सरपंच ने भी समझाया, लेकिन उस पर किसी बात का असर नहीं हुआ। वह मजदूरी करने के बहाने भरतपुर जाता था, लेकिन वहां अपराधियों की संगत में पड़ गया। रामबाबू सिंह ने बताया कि करीब तीन साल पहले विष्णु का संदेश आया था कि वह जेल में बहुत परेशान है और अपराध छोड़ना चाहता है। इसके बाद वह उससे मिलने जेल गए। पिता ने बताया कि जेल में विष्णु उनके सामने रोया था और कहा था कि अब कभी अपराध नहीं करेगा। उन्हें लगा था कि बेटा सुधर जाएगा, लेकिन जेल से बाहर आते ही उसने पहले से भी बड़ा अपराध कर दिया। अब वह उससे मिलने कभी नहीं जाएंगे।

अब कोई रिश्ता नहीं

रामबाबू सिंह ने कहा कि जिसने जैसा किया है, उसे वैसी ही सजा मिलनी चाहिए। परिवार उसके लिए कोई वकील नहीं करेगा और अब उससे उनका कोई संबंध नहीं है।

ताई बोलीं- हमारे लिए वह मर चुका है

विष्णु की ताई रतन देवी ने कहा कि उनके लिए विष्णु अब मर चुका है। उसने पूरे परिवार को बदनाम कर दिया है। विष्णु के चचेरे भाई ने कहा कि परिवार ने उसे कई बार समझाया, लेकिन उसने कभी किसी की बात नहीं मानी।

बेहद गरीब है परिवार

ग्रामीणों के मुताबिक विष्णु का परिवार बेहद गरीब है। पिता रामबाबू और ताऊ दयाराम राजमिस्त्री का काम करते हैं। परिवार के दूसरे सदस्य भी मजदूरी करके घर चलाते हैं। उनके पास केवल करीब एक बीघा जमीन है।

मजदूरी मिलने पर ही जलता था चूल्हा

ग्रामीणों ने बताया कि परिवार की आर्थिक हालत इतनी खराब है कि कई बार जिस दिन मजदूरी मिलती थी, उसी दिन आटा खरीदा जाता था और तभी घर में चूल्हा जलता था। परिवार का अपराध की दुनिया से कभी कोई संबंध नहीं रहा।

लोहे की जंजीरें चोरी करने से शुरू हुआ अपराध

ग्रामीणों के अनुसार विष्णु ने शुरुआत छोटी-छोटी चोरियों से की थी। वह गांव के पोखर पर बंधे पशुओं की लोहे की जंजीरें चुराकर कबाड़ में बेच देता था और उसी पैसे से नशा करता था। इस बात पर कई बार ग्रामीणों ने उसकी पिटाई भी की। जब गांव में उसकी बदनामी बढ़ने लगी तो उसने शहर का रुख किया और बाइक चोरी जैसी वारदातों में शामिल हो गया।

जेल में गैंग से हुई मुलाकात

लगातार अपराधों में शामिल रहने के कारण वर्ष 2023 में उसे गिरफ्तार कर सेवर जेल भेजा गया। वहीं उसकी मुलाकात कृपाल जघीना गैंग के सदस्यों से हुई। जांच में सामने आया कि जेल से बाहर आने के बाद गैंग ने उसकी जमानत कराई। रहने, खाने और खर्च की पूरी जिम्मेदारी भी उठाई। धीरे-धीरे वह गैंग का सक्रिय सदस्य बन गया।

कुलदीप जघीना हत्याकांड में भी था शामिल

जांच के मुताबिक कुलदीप जघीना हत्याकांड में बस के अंदर पहली गोली विष्णु ने ही चलाई थी। वह जयपुर से बस में बैठकर पूरे रास्ते कुलदीप की गतिविधियों की जानकारी अपने साथियों तक पहुंचाता रहा। कुछ समय पहले अजान गांव में सरपंच पद के एक दावेदार को फोन पर जान से मारने की धमकी देने का मामला भी सामने आया था। इस मामले में पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की थी।

जेल के भीतर भी रची गई साजिश

मई 2024 में अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल से मोबाइल फोन के जरिए कृपाल जघीना गैंग ने कुलदीप गैंग के बचे हुए सदस्यों की हत्या की साजिश रची थी। एटीएस ने जांच रिपोर्ट तैयार कर भरतपुर और अजमेर जेल प्रशासन को सौंपी थी। रिपोर्ट के आधार पर कोतवाली थाने में मामला दर्ज हुआ और कई बदमाश गिरफ्तार किए गए।


अब जगन गुर्जर हत्याकांड का मुख्य आरोपी

अब अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में डकैत जगन गुर्जर की हत्या के मामले में विष्णु मुख्य आरोपी है। इस घटना के बाद उसके गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है। परिवार और ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने विष्णु को अपराध की राह से हटाने की हर संभव कोशिश की, लेकिन वह नहीं बदला। आज हालात ऐसे हैं कि परिवार अपने जिंदा बेटे को भी अपने लिए मरा हुआ मान चुका है।
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